Bihar
Darbhanga: गन्ने की पैदावार बढ़ाने को मनीगाछी में किसानों को मिले आधुनिक खेती के गुर
Darbhanga: सकरी चीनी मिल परिक्षेत्र अंतर्गत मनीगाछी प्रखंड के डेनिटोल गांव में गन्ना उत्पादक किसानों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
सहायक निदेशक, ईंख विकास, दरभंगा के तत्वावधान में ‘गन्ना प्रौद्योगिकी विस्तार कार्यक्रम 2026-27’ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को गन्ने की पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक व उन्नत पद्धतियों से जोड़ना था, ताकि कम लागत में गन्ने का उत्पादन और उत्पादकता दोनों बढ़ाई जा सके।
Darbhanga News: शरदकालीन बुआई और सह-फसली खेती से बढ़ेगा मुनाफा
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को शरदकालीन गन्ना बुआई के वैज्ञानिक फायदों से रूबरू कराया। विशेषज्ञों ने बताया कि शरद ऋतु में बोई जाने वाली फसल में जमाव और बढ़वार बेहतर होती है। इसके साथ ही गन्ने की कतारों के बीच सह-फसल (इंटरक्रॉपिंग) लगाने की तकनीक पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। किसानों को समझाया गया कि दलहन, तिलहन या सब्जियों को सह-फसल के रूप में अपनाने से एक ही खेत और समान संसाधनों में अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है, जिससे भूमि की उर्वरता भी सुरक्षित रहती है।
चार फीट की दूरी और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग
कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने गन्ने की रोपाई 4 फीट की चौड़ी दूरी पर करने की आधुनिक ट्रेंच विधि अपनाने की सलाह दी। विशेषज्ञों ने बताया कि कतारों के बीच पर्याप्त दूरी रखने से पौधों को प्रचुर मात्रा में धूप और हवा मिलती है, जिससे किल्ले ज्यादा निकलते हैं और तने की मोटाई बढ़ती है। इसके अलावा निराई-गुड़ाई और कीटनाशक छिड़काव में छोटे ट्रैक्टर व आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग सुगम हो जाता है, जिससे मजदूरी का खर्च काफी हद तक घट जाता है।
बीज व भूमि उपचार और खरपतवार नियंत्रण के उपाय
फसल को रोगों से बचाने के लिए बीज शोधन और खेत की तैयारी के समय भूमि उपचार के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने रेखांकित किया कि प्रमाणित बीजों का उचित उपचार कर रोपाई करने से रेड रॉट और उकठा जैसी घातक बीमारियों का खतरा न्यूनतम हो जाता है। साथ ही फसल की प्रारंभिक अवस्था में खरपतवार नियंत्रण, सही समय पर मिट्टी चढ़ाने और हवा-तूफान से फसल को गिरने से बचाने के लिए गन्ने की बंधाई की विधियां भी समझाई गईं।
किसान गन्ना आईडी से मिलेगा मुफ्त बीज
विभागीय अधिकारियों ने क्षेत्र विस्तार योजना के तहत मिलने वाले शासकीय लाभों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पंजीकृत किसान अपनी ‘गन्ना आईडी’ का उपयोग कर 0.25 एकड़ से लेकर 2.5 एकड़ तक के रकबे के लिए नि:शुल्क उन्नत गन्ना बीज प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही मिट्टी के स्वास्थ्य को दीर्घकाल तक अक्षुण्ण रखने के लिए रासायनिक खादों पर निर्भरता घटाकर जैविक उपादानों और वर्मीकम्पोस्ट के इस्तेमाल पर विशेष बल दिया गया।
प्रगतिशील किसान और विशेषज्ञ रहे मौजूद
कार्यक्रम में ईंख प्रसार पदाधिकारी प्रहलाद कुमार व सुहैल अंसारी, सकरी चीनी मिल के मुख्य गन्ना प्रबंधक विनोद तिवारी, केवीके सुखैत के विषय वस्तु विशेषज्ञ (एसएमएस) राहुल सिंह राजपूत, जनसेवक जगदम्ब कुमार सिंह सहित प्रगतिशील किसान ध्रुव नारायण झा, पूर्व मुखिया ब्रज किशोर यादव और पप्पू झा उपस्थित रहे।
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बिहार का कुख्यात ‘Kodha Gang’ STF के रडार पर: बच्चों को अपराध की ट्रेनिंग देने वाले सिंडिकेट पर कसा शिकंजा
पटना: Kodha Gang: बैंकों से पैसे निकालने वालों पर नजर रखकर झपटमारी, बड़ी डकैती और ज्वेलरी शोरूम में हाथ साफ करने के लिए कुख्यात बिहार के ‘कोढ़ा गिरोह’ के खिलाफ पुलिस ने बड़े पैमाने पर निर्णायक अभियान शुरू किया है।
इस अंतरराज्यीय आपराधिक सिंडिकेट के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक विशेष टीम का गठन किया है। यह टीम गिरोह के सदस्यों की गतिविधियों, उनके आपराधिक इतिहास और वित्तीय लेन-देन पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रही है।
Kodha Gang: कटिहार का कोढ़ा प्रखंड: अंतरराज्यीय अपराध का गढ़
कोढ़ा मूल रूप से बिहार के कटिहार जिले का एक प्रखंड है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इसी इलाके से इस संगठित अपराध गिरोह की जड़ें जुड़ी हैं। गिरोह का मुख्य पेशा बैंकों के बाहर से नकदी छीनना, ध्यान भटकाकर (जैसे पैसे या खुजली वाला पाउडर गिराकर) बैग उड़ाना, बड़ी डकैतियां डालना और आभूषण की दुकानों में सेंधमारी करना रहा है। यह गिरोह अत्याधुनिक रेकी और तेजी से फरार होने की रणनीति के कारण वर्षों से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना हुआ था।
Kodha Gang: कई राज्यों में फैला नेटवर्क, दूसरे राज्यों की पुलिस को भी मिलेगी मदद
कोढ़ा गिरोह का नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं है। पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख राज्यों में भी इसके गुर्गों ने कई सनसनीखेज वारदातों को अंजाम दिया है। अक्सर अन्य राज्यों की पुलिस मामलों की कड़ियां जोड़ते हुए आरोपियों की धरपकड़ के लिए कटिहार के कोढ़ा थाना पहुंचती रही है।
अब STF की विशेष टीम ने गिरोह के सदस्यों की पहचान से जुड़ा एक व्यापक डोजियर तैयार किया है। इसमें संदिग्धों की डिजिटल तस्वीरें, फिंगरप्रिंट, स्थाई व अस्थाई पते और उनके पारिवारिक सदस्यों का पूरा विवरण दर्ज किया गया है। यदि देश के किसी भी हिस्से में ऐसी वारदात होती है, तो संबंधित राज्य की पुलिस तुरंत बिहार STF के डेटाबेस से मिलान कर आरोपियों की पहचान सुनिश्चित कर सकेगी।
मासूम बच्चों को अपराध की ट्रेनिंग: गिरोह का खौफनाक पहलू
इस गिरोह का सबसे चिंताजनक और चौंकाने वाला पहलू नई पीढ़ी को अपराध में धकेलना है। जांच में सामने आया है कि गिरोह के पुराने और शातिर सदस्य नाबालिग बच्चों को भीड़भाड़ वाले इलाकों में नजर बचाकर नकदी उड़ाने, बैंक ग्राहकों पर नजर रखने और पुलिस के पकड़े जाने पर चकमा देकर भागने की बाकायदा ट्रेनिंग देते हैं। कानूनी प्रावधानों में नाबालिगों को मिलने वाली रियायत का फायदा उठाने के लिए सिंडिकेट द्वारा बच्चों को ढाल बनाया जाता रहा है।
Kodha Gang: 50 सक्रिय सदस्यों पर कड़ी निगरानी, गिरफ्तारी की तैयारी
कोढ़ा थाना प्रभारी पंकज आनंद के अनुसार, लगातार पुलिसिया दबाव और अभियानों के चलते पूर्व की तुलना में गिरोह की कमर टूटी है, लेकिन इलाके में अब भी करीब 50 सक्रिय सदस्य सक्रिय हैं। पुलिस संदिग्ध गांवों और व्यक्तियों की आवाजाही पर लगातार नजर रख रही है।
एसटीएफ की इस विशेष टीम के सक्रिय होने के बाद अंतरराज्यीय स्तर पर अपराधियों को ट्रेस करना बेहद आसान हो गया है। ठोस साक्ष्य जुटाकर इन अपराधियों को गिरफ्तार करने और उनके अवैध संपर्कों को नेस्तनाबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है।
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Supaul: त्रिवेणीगंज में घर में सो रही महिला को मारी गोली, सदर अस्पताल रेफर
Supaul: बिहार के सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज थाना क्षेत्र में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। बड़कुरवा पंचायत के सिकयाही वार्ड संख्या 7 में शुक्रवार देर रात करीब एक बजे घर में सो रही 25 वर्षीय महिला को अज्ञात हथियारबंद अपराधियों ने गोली मार दी।
गोली महिला के दाएं पैर को चीरती हुई आर-पार निकल गई। चीख-पुकार सुनकर परिजन दौड़े, लेकिन अंधेरे का फायदा उठाकर दोनों हमलावर मौके से फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल महिला को प्राथमिक उपचार के बाद सुपौल सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
Supaul Crime: देर रात घर में घुसे दो अज्ञात हमलावर
सिकयाही निवासी पप्पू यादव की 25 वर्षीय पत्नी डेजी कुमारी अपने कमरे में सो रही थीं। पीड़िता के अनुसार, रात लगभग एक बजे दो अज्ञात युवक दबे पांव घर में दाखिल हुए और उन पर सीधे गोली चला दी। गोली उनके दाएं पैर में लगी। अचानक हुए हमले और गोली की तेज आवाज के बाद महिला दर्द से चिल्लाने लगीं। आवाज सुनकर बगल के कमरे से परिजन दौड़े, तब तक दोनों हमलावर बाहर निकलकर भाग चुके थे। रात का घना अंधेरा होने के कारण उनकी पहचान नहीं हो सकी।
Supaul Crime: डायल 112 की टीम ने पहुंचाया अस्पताल
वारदात के तुरंत बाद घबराए परिजनों ने आपातकालीन सेवा डायल 112 को सूचना दी। डायल 112 की पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर पहुंचकर लहूलुहान महिला को अनुमंडलीय अस्पताल त्रिवेणीगंज पहुंचाया। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. बी.एन. पासवान ने बताया कि गोली पैर से आर-पार हो गई है। प्रारंभिक इलाज के बाद पीड़िता की हालत खतरे से बाहर बताई गई, लेकिन बेहतर देखभाल और जरूरी जांचों के लिए उन्हें सुपौल सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
गांव में दहशत, पुलिस ने शुरू की जांच
आधी रात को घर के भीतर घुसकर गोलीबारी की घटना से सिकयाही गांव में भय का माहौल है। वारदात की सूचना पर त्रिवेणीगंज एसडीपीओ दिलीप कुमार और थानाध्यक्ष राकेश कुमार पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे और पीड़िता से घटना की पूरी जानकारी ली। पुलिस आसपास के रास्तों और संभावित ठिकानों पर सुराग जुटाने में लगी है। गोलीबारी के कारणों का फिलहाल खुलासा नहीं हो सका है।
लिखित आवेदन का इंतजार, प्राथमिकी की तैयारी
थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने बताया कि पुलिस मामले के हर बिंदु की गहन पड़ताल कर रही है। परिजनों की ओर से लिखित शिकायत मिलते ही सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि हमलावरों को जल्द चिन्हित कर गिरफ्तार किया जाएगा।
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Saharsa: पाटलिपुत्र-पूर्णिया कोर्ट स्पेशल ट्रेन अब 1 दिसंबर तक चलेगी
Saharsa: दुर्गा पूजा, दिवाली और लोकआस्था के महापर्व छठ के दौरान बिहार आने-जाने वाले रेल यात्रियों के लिए पूर्व मध्य रेल ने राहत भरा फैसला लिया है। त्योहारों के मौके पर राजधानी पटना से सीमांचल और कोसी क्षेत्र की ओर जाने वाली नियमित ट्रेनों में कंफर्म सीट मिलना बेहद कठिन हो जाता है।
यात्रियों की भारी भीड़ और लंबी वेटिंग लिस्ट को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने गाड़ी संख्या 03216/03215 पाटलिपुत्र-पूर्णिया कोर्ट-पाटलिपुत्र स्पेशल ट्रेन की सेवा अवधि को आगे बढ़ाने की घोषणा की है।
Saharsa News: 16 अक्टूबर के बजाय अब 1 दिसंबर तक परिचालन
पूर्व मध्य रेल द्वारा जारी संशोधित आदेश के अनुसार, यह स्पेशल ट्रेन अब आगामी 1 दिसंबर तक पटरी पर दौड़ती रहेगी। इससे पूर्व रेलवे प्रशासन ने इस ट्रेन के परिचालन की अंतिम समय-सीमा 16 अक्टूबर तय की थी।
उल्लेखनीय है कि इस फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन की शुरुआत 17 सितंबर को की गई थी, ताकि त्योहारों के दौरान उमड़ने वाली अतिरिक्त भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। पर्व-त्योहारों के नजदीक आते ही इस रूट पर यात्रियों की संख्या में भारी उछाल दर्ज किया गया। यात्रियों की मांग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से मिले प्रस्तावों के आधार पर रेलवे प्रशासन ने इसके फेरों में विस्तार को मंजूरी दी है।
Saharsa News: सप्ताह में 5 दिन सेवा, परिचालन दिवसों का रखें ध्यान
यह स्पेशल ट्रेन पहले की तरह सप्ताह में 5 दिन दोनों दिशाओं से अपनी सेवाएं देगी। यात्रा की योजना बना रहे यात्रियों को इसके परिचालन दिवसों पर ध्यान देना आवश्यक है:
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गाड़ी संख्या 03216 (पाटलिपुत्र से पूर्णिया कोर्ट): यह ट्रेन सप्ताह में बुधवार और शनिवार को छोड़कर बाकी सभी 5 दिन चलाई जाएगी।
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गाड़ी संख्या 03215 (पूर्णिया कोर्ट से पाटलिपुत्र): वापसी दिशा में यह ट्रेन गुरुवार और रविवार को छोड़कर सप्ताह के शेष 5 दिन चलेगी।
रूट, समय और ठहराव में कोई बदलाव नहीं
रेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परिचालन अवधि में विस्तार के बाद भी ट्रेन की समय-सारणी, रूट और स्टॉपेज में कोई फेरबदल नहीं किया गया है। ट्रेन अपने पूर्व निर्धारित समय और तय स्टेशनों पर रुकते हुए ही चलेगी।
इस ट्रेन के लगातार चलने से सहरसा, मधेपुरा, सिमरी बख्तियारपुर, बनमनखी सहित आसपास के ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के दैनिक यात्रियों, छात्रों और कामकाजी लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। त्योहारों के दौरान निजी बसों या टैक्सियों के मनमाने किराए से जूझ रहे लोगों के लिए यह ट्रेन एक सुलभ और किफायती विकल्प साबित होगी।
त्योहारी सीजन में भीड़ प्रबंधन पर रेलवे का फोकस
पूर्व मध्य रेल के अधिकारियों का कहना है कि दशहरा, दीपावली और छठ महापर्व के दौरान बिहार के विभिन्न रेलखंडों पर लाखों प्रवासी अपने घरों की ओर लौटते हैं। इस दबाव को संतुलित करने के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। रेलवे प्रशासन विभिन्न रेलखंडों पर टिकट बुकिंग और ऑक्यूपेंसी की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त डिब्बे जोड़ने या अन्य रूटों पर भी ट्रेनों के फेरे बढ़ाने पर त्वरित निर्णय लिया जा सके।
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