Bihar
AISA: नीट पेपर लीक और कैंपस मुद्दों पर आंदोलन की तैयारी
मधेपुरा: AISA: उच्च शिक्षण संस्थानों में लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली, शिक्षा के व्यवसायीकरण और प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली के खिलाफ छात्र राजनीति एक बार फिर तेज होने लगी है।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की मधेपुरा जिला कमेटी ने अपने संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा करने के साथ ही आगामी AISA 11th National Conference Madhepura अभियान की तैयारियों का बिगुल फूंक दिया है। मधेपुरा स्थित पीएस कॉलेज परिसर में आयोजित जिला कमेटी की विशेष बैठक में छात्र नेताओं ने राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से लेकर स्थानीय महाविद्यालयों तक के विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर गहन विमर्श किया और आने वाले दिनों में सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन को धार देने का संकल्प दोहराया।
AISA: लोकतंत्र और शिक्षा पर हमलों के खिलाफ लामबंदी
बैठक को संबोधित करते हुए आइसा के जिला सचिव पावेल कुमार ने कहा कि संगठन का 11वां राष्ट्रीय सम्मेलन ऐसे ऐतिहासिक और चुनौतीपूर्ण समय में आयोजित होने जा रहा है, जब देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और स्वायत्त शिक्षण संस्थानों पर चौतरफा हमले हो रहे हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहे नीट (NEET) पेपर लीक प्रकरण, एसआईआर और जामिया मिल्लिया इस्लामिया सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में छात्रों के दमन का उल्लेख करते हुए कहा कि आइसा इन जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर लड़ाई लड़ रहा है। पावेल कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय सम्मेलन को सफल बनाने के लिए मधेपुरा के प्रबुद्ध नागरिक, शिक्षक, बुद्धिजीवी और आम छात्र खुलकर संगठन के अभियान को अपना समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान दौर में बड़ी संख्या में युवा और छात्र प्रगतिशील विचारधारा से जुड़ रहे हैं।
AISA: कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग पर जोर
बैठक में भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (बीएनएमयू) और इसके अंतर्गत आने वाले सभी अंगीभूत व संबद्ध महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। छात्र नेताओं ने कहा कि छात्रसंघ केवल राजनीतिक अखाड़ा नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक आवाज का वास्तविक मंच होता है। इसके अभाव में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रशासनिक मनमानी बढ़ जाती है।
आइसा नेताओं ने स्पष्ट किया कि छात्रावासों की जर्जर हालत, नियमित कक्षाओं का अभाव, पुस्तकालयों में आधुनिक पुस्तकों की कमी, नामांकन में धांधली और परीक्षा परिणामों में होने वाली देरी जैसे बुनियादी मुद्दों के समाधान के लिए छात्रसंघ का होना अनिवार्य है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ चुनाव की दिशा में शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए, तो व्यापक छात्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
छात्रों के हक की लड़ाई निरंतर रहेगी जारी: अभिषेक कुमार
आइसा के जिलाध्यक्ष अभिषेक कुमार विकास ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मधेपुरा जिला इकाई ने हमेशा आम छात्रों, खासकर पिछड़े और वंचित वर्ग से आने वाले विद्यार्थियों के हक और हुकूक की आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि संगठन की सर्वोच्च प्राथमिकता विद्यार्थियों की दिन-प्रतिदिन की समस्याओं का समाधान कराना और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक माहौल में छात्रों को संगठित कर उनके भीतर सामाजिक व राजनीतिक चेतना का संचार करना आवश्यक है। बैठक के दौरान संगठन के विगत कामकाज की समीक्षा की गई और आगामी कार्यक्रमों के लिए कार्ययोजना तैयार की गई, ताकि राष्ट्रीय सम्मेलन का संदेश गांव-गांव और हर कॉलेज तक पहुंचाया जा सके।
बैठक में ये प्रमुख छात्र प्रतिनिधि रहे उपस्थित
पीएस कॉलेज में आयोजित इस महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक में जिला उपाध्यक्ष अजय कुमार, सह सचिव श्याम कुमार, मीडिया प्रभारी अंकु आनंद, सौरभ कुमार, रणवीर कुमार और सोनू कुमार सहित कई अन्य सक्रिय छात्र कार्यकर्ता व प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में संगठन के आगामी अभियानों को बूथ और कॉलेज स्तर पर मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। इस बैठक के बाद यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बीएनएमयू परिसर सहित पूरे जिले में छात्र राजनीति की सरगर्मी नए सिरे से परवान चढ़ेगी।
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Supaul में शराब तस्करों का भंडाफोड़: 2,040 बोतल नेपाली शराब जब्त
त्रिवेणीगंज (Supaul): बिहार में सख्त शराबबंदी कानून के बावजूद भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय शराब माफिया अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। इसी क्रम में सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज थाना क्षेत्र में पुलिस ने त्वरित और गुप्त कार्रवाई करते हुए तस्करी के एक बड़े नेटवर्क पर करारी चोट की है।
इलाके में चर्चा का विषय बने इस Triveniganj Supaul Liquor Seizure मामले में पुलिस ने पिपरा थाना क्षेत्र की सीमा से सटे बेला गांव के वार्ड संख्या 9 में ग्रामीण संपर्क मार्ग के किनारे लावारिस हालत में रखी 17 प्लास्टिक की बोरियों से 612 लीटर नेपाली शराब की बड़ी खेप जब्त की है। पुलिस की इस छापेमारी से तस्करों की योजना पूरी तरह विफल हो गई और मामले में दो नामजद तस्करों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
Supaul : आधी रात को सड़क किनारे मिलीं 17 बोरियां, अंदर था शराब का जखीरा
त्रिवेणीगंज पुलिस को बुधवार देर रात सटीक गुप्त सूचना मिली थी कि बेला गांव के सुनसान ग्रामीण मार्ग पर पिपरा सीमा के समीप शराब की एक भारी खेप एकत्र की गई है, जिसे अन्यत्र ले जाने की तैयारी चल रही है। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष राकेश कुमार के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने फौरन मौके पर पहुंचकर सघन तलाशी अभियान शुरू किया।
सड़क के किनारे काले रंग की 17 प्लास्टिक बोरियां लावारिस अवस्था में झाड़ियों के सहारे रखी हुई पाई गईं। जब पुलिस बल ने इन बोरियों को खोलकर जांचा, तो सभी बोरियां शराब की बोतलों से भरी हुई मिलीं। गिनती के दौरान बोरियों से 300 एमएल की कुल 2,040 बोतलें बरामद हुईं। बरामद शराब ‘नेपाली दिलवाले’ ब्रांड की विदेशी शराब है, जिसकी कुल मात्रा 612 लीटर आंकी गई है। पुलिस ने पंचनामा तैयार कर समूची खेप को जब्त कर लिया, हालांकि पुलिस के आने की भनक लगते ही अंधेरे का फायदा उठाकर तस्कर मौके से भागने में सफल रहे।
Supaul: इंडो-नेपाल बॉर्डर के गुप्त मार्गों से तस्करी की थी साजिश
सुपौल जिला नेपाल सीमा से सटा होने के कारण शराब तस्कर अक्सर मुख्य सड़कों, चेकपोस्टों और पुलिस गश्ती दलों से बचकर सीमावर्ती पगडंडियों, तटबंधों और सुदूर ग्रामीण रास्तों का उपयोग करते हैं। बेला गांव का वार्ड संख्या 9 भौगोलिक रूप से त्रिवेणीगंज और पिपरा थाना क्षेत्र की सीमा पर स्थित है।
तस्करों ने इस सीमावर्ती स्थान को इसलिए चुना था ताकि पुलिस की नजरों से बचते हुए आधी रात के सन्नाटे में पिकअप वैन या अन्य वाहनों के जरिए इसे आसपास के देहाती बाजारों व कस्बों में खपाया जा सके। लेकिन गश्ती टीम और स्थानीय गुप्तचर तंत्र की मुस्तैदी ने शराब माफियाओं की इस पूरी प्लानिंग को समय रहते ध्वस्त कर दिया।
दो नामजद तस्करों पर प्राथमिकी, गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज
थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मौके से बरामद शराब के आधार पर दो स्थानीय नामजद तस्करों और कुछ अज्ञात सहयोगियों के विरुद्ध उत्पाद अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
उन्होंने बताया कि पुलिस की विशेष टीमें नामजद आरोपियों के संभावित ठिकानों, आवासों और सीमावर्ती संपर्कों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस केवल शराब जब्ती तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह जांच की जा रही है कि नेपाल सीमा से शराब की यह खेप किस रास्ते से भारतीय क्षेत्र में लाई गई और इसे किस सिंडिकेट तक पहुंचाया जाना था।
सीमाई इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ी, ग्रामीणों ने ली राहत
शराबबंदी के बीच सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में शराब तस्करों की लगातार आवाजाही से स्थानीय ग्रामीणों में सुरक्षा और सामाजिक माहौल को लेकर चिंता बनी रहती है। शराब के अवैध कारोबार के चलते गांव में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ने की आशंका रहती है।
पुलिस की इस बड़ी जब्ती और तत्परता से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। प्रशासन ने पिपरा, त्रिवेणीगंज और सीमा से जुड़े अन्य संवेदनशील मार्गों पर रात्रि गश्त बढ़ा दी है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
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Baba Mateshwar Dham: जहां मुंगेर से पैदल खिंचे चले आते हैं शिवभक्त
सहरसा: Baba Mateshwar Dham: कोसी प्रमंडल के आध्यात्मिक और धार्मिक परिदृश्य में सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड स्थित काठो गांव का पावन स्थल सनातन आस्था का एक जाग्रत केंद्र बना हुआ है।
यहां स्थित Baba Mateshwar Dham Saharsa सदियों से लाखों शिवभक्तों की अगाध आस्था और अटूट विश्वास का प्रतीक है। मान्यता है कि मटेश्वर महादेव के दरबार में जो भी श्रद्धालु सच्चे अंतःकरण से शीश झुकाता है, भोलेनाथ उसकी झोली खुशियों से भर देते हैं। इसी अटूट जनआस्था के कारण स्थानीय ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ समूचे कोसी, मिथिलांचल और सीमांचल से वर्ष भर श्रद्धालुओं का तांता जलाभिषेक के लिए लगा रहता है।
Baba Mateshwar Dham: स्वयंभू शिवलिंग का अलौकिक प्राकट्य और नित्य आरती
मटेश्वर धाम की सबसे बड़ी विशेषता इसका ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व है। जनश्रुतियों और क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर के गर्भगृह में स्थापित पवित्र शिवलिंग किसी मानव द्वारा गढ़ा या स्थापित नहीं किया गया है, बल्कि यह स्वयंभू स्वरूप में धरती से स्वयं प्रकट हुआ था। शिवलिंग के प्राकट्य के उपरांत से ही यहां अनवरत वैदिक पद्धति से पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का क्रम जारी है।
ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली प्रभात आरती और गोधूलि बेला की संध्या महाआरती के दौरान बजने वाले शंख, घंटे-घड़ियाल और डमरू की दिव्य ध्वनियों से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठता है। स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि काठो और आसपास के दर्जनों गांवों पर बाबा मटेश्वरनाथ की विशेष कृपा बरसती है, जिससे क्षेत्र में दैवीय आपदाओं का प्रभाव कम रहता है और सुख-शांति बनी रहती है।
Baba Mateshwar Dham: सावन में मुंगेर के छर्रापट्टी घाट से पदयात्रा कर पहुंचते हैं कांवरिये
श्रावण मास और फाल्गुन की महाशिवरात्रि के दौरान मटेश्वर धाम का वातावरण पूरी तरह ‘बोल-बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से सराबोर रहता है। सावन के पूरे महीने मुंगेर जिले के प्रसिद्ध छर्रापट्टी गंगा घाट से पवित्र गंगाजल भरकर कांवरियों का विशाल जत्था नंगे पांव कठिन पदयात्रा करते हुए काठो धाम पहुंचता है।
सैकड़ों किलोमीटर की दुर्गम यात्रा तय कर बाबा के दरबार में पहुंचने वाले डाक बम और सामान्य कांवरिये जैसे ही पावन शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करते हैं, उनकी समस्त शारीरिक थकान आध्यात्मिक आनंद में बदल जाती है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर तो यहां जनसैलाब उमड़ पड़ता है। इस अवसर पर बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय राजकीय मटेश्वर धाम महोत्सव का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें ख्यातिप्राप्त कलाकारों की प्रस्तुतियां देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।
धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर तेजी से उभरता तीर्थ
अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा, नैसर्गिक ग्रामीण परिवेश और चमत्कारी मान्यताओं के बल पर बाबा मटेश्वर धाम अब बिहार के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों की श्रेणी में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। प्रशासनिक सहयोग और स्थानीय न्यास समिति के प्रयासों से हाल के वर्षों में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पक्के शेड, पेयजल, विश्रामालय, रोशनी और कतार प्रबंधन की बेहतर व्यवस्थाएं की गई हैं।
स्थानीय प्रबुद्धजनों का कहना है कि बाबा के दरबार में आने वाला कोई भी याचक कभी निराश होकर नहीं लौटता। मन्नत पूरी होने पर भक्त यहां विशेष पूजा, महामृत्युंजय जाप और ब्राह्मण भोज का आयोजन करते हैं। यदि इस पावन धाम को कोसी सर्किट के तहत और अधिक सुनियोजित तरीके से विकसित किया जाए, तो यह क्षेत्र में पर्यटन और ग्रामीण रोजगार को नई दिशा देने में मील का पत्थर साबित होगा।
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Darbhanga AIIMS: निर्माण के लिए 1549.25 करोड़ का टेंडर जारी, 30 महीने में पूरा होगा काम
दरभंगा: Darbhanga AIIMS: उत्तर बिहार और कोसी-मिथिलांचल के लोगों के लिए आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की बहुप्रतीक्षित सौगात अब धरातल पर उतरने के बेहद करीब पहुंच गई है।
दरभंगा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मुख्य परिसर के निर्माण की दिशा में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए Darbhanga AIIMS Construction Tender आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्यरत उपक्रम एचएससीसी (इंडिया) लिमिटेड ने अस्पताल भवन, अकादमिक ब्लॉक, आवासीय परिसर तथा अन्य आवश्यक आधारभूत संरचनाओं के निर्माण हेतु 1,549.25 करोड़ रुपये की ई-निविदा आमंत्रित की है। यह संपूर्ण निर्माण कार्य इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (EPC) मोड पर 30 महीने की तय समयसीमा में पूरा किया जाएगा।
Darbhanga AIIMS: अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और आवासीय ब्लॉक का एक साथ होगा निर्माण
एचएससीसी द्वारा जारी विस्तृत निविदा दस्तावेज के अनुसार, परियोजना के मुख्य चरण में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भवन, अत्याधुनिक अकादमिक ब्लॉक (मेडिकल व नर्सिंग कॉलेज), चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों के लिए आवासीय क्वार्टर, छात्र-छात्राओं के हॉस्टल और सहायक संरचनाओं का निर्माण शामिल है।
अकादमिक ब्लॉक में विश्वस्तरीय चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए उच्च तकनीक युक्त प्रयोगशालाएं, व्याख्यान कक्ष और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही अनुबंध के तहत निर्माण एजेंसी को परियोजना पूर्ण होने के बाद दोष दायित्व अवधि (डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड) के दौरान परिसर के संधारण और तकनीकी रखरखाव की जिम्मेदारी भी उठानी होगी।
Darbhanga AIIMS: मिट्टी भराई और समतलीकरण पर 184.17 करोड़ का काम
मुख्य भवनों के निर्माण से पूर्व एम्स की अधिग्रहित भूमि को निर्माण योग्य और सुरक्षित बनाने के लिए पूर्व में ही तीन अलग-अलग पैकेजों में निविदाएं जारी की जा चुकी हैं। जल संसाधन विभाग के माध्यम से परिसर में मिट्टी भराई और समतलीकरण (लैंड फिलिंग एंड लेवलिंग) का कार्य कराया जा रहा है।
इन तीनों पैकेजों की प्राक्कलित राशि क्रमशः 66.74 करोड़ रुपये, 73.12 करोड़ रुपये और 44.31 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी, जिसकी कुल लागत लगभग 184.17 करोड़ रुपये है। जलजमाव और बाढ़ से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जमीन को मानक ऊंचाई तक समतल किया जा रहा है।
50.60 करोड़ की लागत से बाउंड्री वॉल और सुरक्षा ढांचा
परिसर के स्थायी सीमांकन और सुरक्षा के दृष्टिकोण से 50.60 करोड़ रुपये की संशोधित अनुमानित लागत से चारदीवारी का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। इसके अंतर्गत आरसीसी रिटेनिंग वॉल, प्रीकास्ट कंक्रीट कंपाउंड वॉल, भव्य मुख्य प्रवेश द्वार, सुरक्षा चौकियां और ड्रेनेज चैनल बनाए जा रहे हैं। भूमि समतलीकरण और चहारदीवारी के सुरक्षा घेरे के बाद अब 1549.25 करोड़ रुपये के मुख्य भवन निर्माण टेंडर से एम्स की भौतिक प्रगति को नई रफ्तार मिलने जा रही है।
Darbhanga AIIMS: 30 महीने की सख्त समयसीमा, 27 नवंबर तक जमा होंगे आवेदन
निविदा की शर्तों के मुताबिक, चयनित कार्यकारी एजेंसी को अनुबंध आवंटन की तिथि से कुल 30 महीनों (ढाई वर्ष) में समूचा निर्माण कार्य पूरा कर संस्थान को सौंपना होगा। इसमें शुरुआती दो महीने विस्तृत आर्किटेक्चरल डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग प्लानिंग और वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करने के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि शेष 28 महीने प्रत्यक्ष निर्माण गतिविधियों के लिए तय हैं।
बोली लगाने वाली इच्छुक एजेंसियों के लिए 15.59 करोड़ रुपये की अग्रधन राशि (EMD) तथा 1.77 लाख रुपये का निविदा शुल्क अनिवार्य किया गया है। आधिकारिक शेड्यूल के अनुसार, 6 नवंबर को निर्माण एजेंसियों के साथ ऑनलाइन प्री-बिड कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी, जबकि निविदाएं ऑनलाइन जमा करने की अंतिम तिथि 27 नवंबर तय की गई है। तकनीकी मूल्यांकन में सफल एजेंसियों के वित्तीय बिड खोलने के बाद निर्माण एजेंसी का अंतिम चयन कर काम शुरू करा दिया जाएगा।
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