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वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटने पर बवाल: Madhepura में CEC पर महाभियोग चलाने की मांग

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वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटने पर बवाल: Madhepura में CEC पर महाभियोग चलाने की मांग

Madhepura: मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और लाखों पात्र नागरिकों के नाम काटे जाने के आरोपों को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (आरवाईए) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया।

मधेपुरा स्थित टी.पी. कॉलेज गेट के सामने एकत्रित छात्रों और युवाओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उन पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए पद से हटाने और महाभियोग चलाने की मांग की।

Madhepura News: अखबार की रिपोर्ट और आयोग के आंतरिक मतभेद पर सवाल

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए आइसा के जिला सचिव पावेल कुमार ने कहा कि एक राष्ट्रीय दैनिक में प्रकाशित रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया है कि चुनाव आयोग के भीतर गंभीर मतभेद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अपने फैसलों को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताकर गलतियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है। छात्र नेताओं ने कहा कि संवैधानिक संस्था के प्रमुख की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल लोकतंत्र की निष्पक्षता को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं।

एसआईआर प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकार का हनन

छात्र नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर कड़ा एतराज जताया। आरोप लगाया गया कि इस प्रक्रिया के दौरान जमीनी स्तर पर हुई अनियमितताओं के कारण लाखों वास्तविक और गरीब मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। मधेपुरा सहित विभिन्न जिलों से आई आपत्तियों और शिकायतों को निर्वाचन तंत्र द्वारा नजरअंदाज किया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक को वोट के अधिकार से वंचित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ अन्याय है।

Madhepura News: महाभियोग और नए सिरे से चुनाव की मांग

आरवाईए के जिला संयोजक कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता से समझौता कर एक पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त पर महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके साथ ही विवादित मतदाता सूचियों के आधार पर हुए चुनावों को रद्द कर बिहार और पश्चिम बंगाल में नए सिरे से निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की मांग रखी गई।

व्यापक जनांदोलन की चेतावनी

आइसा के जिलाध्यक्ष अभिषेक कुमार विकास, उपाध्यक्ष राजकिशोर राज और अंकु आनंद ने चेतावनी दी कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस्तीफा नहीं दिया या उनकी जवाबदेही तय नहीं की गई, तो यह विरोध प्रदर्शन राज्यव्यापी आंदोलन का रूप लेगा। इस मौके पर अजय कुमार, सुमन कुमार, विकास कुमार, अनुज कुमार, शिवम कुमार, सोनू कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र एवं युवा मौजूद थे।

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SIR विवाद पर जेडीयू का पलटवार: उमेश कुशवाहा बोले—’एक साल में एक भी गलत नाम नहीं दिखा पाई आरजेडी’

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SIR विवाद पर जेडीयू का पलटवार: उमेश कुशवाहा बोले—'एक साल में एक भी गलत नाम नहीं दिखा पाई आरजेडी'

पटना: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी टकराव चरम पर पहुंच गया है। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए इंडिया गठबंधन के नेताओं ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अगुवाई में पटना के शहीद स्मारक से लोकभवन तक विरोध मार्च निकाला।

मार्च के दौरान हुए भारी हंगामे और नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद जनता दल (यूनाइटेड) ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला है। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने प्रदर्शन को ‘सियासी ड्रामा’ करार देते हुए विपक्ष से सीधा सवाल किया कि एसआईआर में आखिर किस वैध मतदाता का नाम गलत तरीके से काटा गया है।

शहीद स्मारक से लोकभवन तक मार्च, पुलिस बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी

राजधानी की सड़कों पर इंडिया गठबंधन का यह मार्च निर्वाचन आयोग कार्यालय की ओर बढ़ रहा था, तभी प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करते हुए भारी बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। आगे बढ़ने से रोके जाने पर आक्रोशित तेजस्वी यादव और उनके समर्थक बैरिकेड्स पर चढ़ गए। स्थिति अनियंत्रित होते देख पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए तेजस्वी यादव सहित कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया।

नेताओं को ले जा रही पुलिस वैन पर भी कई समर्थक चढ़ गए, जिससे इलाके में काफी देर तक अफरातफरी मची रही। इसी गहमागहमी और धक्का-मुक्की के दौरान भाकपा-माले के पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा अचानक बेहोश होकर गिर पड़े, जिन्हें सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।

जेडीयू का हमला: चेहरा चमकाने की कोशिश और सियासी हताशा

इस पूरे घटनाक्रम पर जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह मार्च जनहित से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं, बल्कि केवल तेजस्वी यादव द्वारा अपना चेहरा चमकाने और राजनीतिक जमीन तलाशने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि चुनावी पराजयों से उपजी हताशा के चलते विपक्ष लगातार संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक जनादेश पर बिना किसी आधार के सवाल खड़े कर रहा है। जनता के स्पष्ट जनादेश का इस तरह अपमान करना विपक्ष के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को उजागर करता है, जिसे बिहार की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।

‘एक साल बाद भी एक भी सबूत नहीं पेश कर सकी आरजेडी’

उमेश कुशवाहा ने विपक्षी दलों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया संपन्न हुए एक साल से अधिक का समय बीत चुका है। इसके बावजूद तेजस्वी यादव या उनका गठबंधन आज तक एक भी ऐसा वास्तविक उदाहरण प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसमें किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से काटा गया हो या किसी अपात्र व्यक्ति का नाम फर्जी तरीके से जोड़ा गया हो। उन्होंने सवाल उठाया कि जब विपक्ष के पास कोई ठोस दस्तावेज या साक्ष्य ही नहीं है, तो फिर राजधानी की सड़कों पर कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने वाला यह आंदोलन किस आधार पर खड़ा किया जा रहा है।

राज्यपाल से हुई मुलाकात, विधि सम्मत कार्रवाई करेगी पुलिस

पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र में रोका गया था। बाद में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और प्रतिनिधिमंडल के कुछ चुनिंदा नेताओं को लोकभवन ले जाया गया, जहां उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर अपना ज्ञापन सौंपा। एसएसपी ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था बाधित करने और उग्र प्रदर्शन में शामिल कुछ तत्वों को हिरासत में लिया गया है तथा कानून के अनुसार आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।

 

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CJP Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग या मतदाता सूची की पारदर्शिता की लड़ाई?

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CJP Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग या मतदाता सूची की पारदर्शिता की लड़ाई?

मुंबई: CJP Protest: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान और चुनावी पारदर्शिता को लेकर देश में सियासी तापमान चढ़ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), आम आदमी पार्टी, वामपंथी छात्र संगठनों आइसा (AISA) व एसएफआई (SFI) ने मुंबई और दिल्ली में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया।

मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में आयोजित सभा में हजारों युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ तुषार गांधी, नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और विशाल ददलानी जैसी जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की पुरजोर मांग उठाई।

CJP Protest: मुंबई से दिल्ली तक प्रदर्शन, जंतर-मंतर पर आंदोलन की चेतावनी

गांधी जयंती के अवसर पर शिवाजी पार्क और दादर इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले पोस्टर लेकर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने ‘राष्ट्रगान’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों के साथ लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया।

सीजेपी नेता अभिजीत दीपके ने सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची में 40 लाख संदिग्ध नाम जोड़े गए थे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ने तुरंत पद नहीं छोड़ा, तो यह आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश भर की सड़कों पर और तेज किया जाएगा।

CJP Protest: एसआईआर और आयोग की कार्यप्रणाली पर खड़े 5 अहम सवाल

ममता बनर्जी, कांग्रेस और अब सीजेपी के विरोध के बाद यह आंदोलन केवल एक संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि चुनावी तंत्र की विश्वसनीयता से जुड़े 5 गंभीर सवाल सामने ला रहा है:

  1. नाम काटने और जोड़ने के सटीक आंकड़े: चुनाव आयोग को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान देश और राज्यों में कितने मतदाताओं के नाम काटे गए, कितने नए जोड़े गए और किन कानूनी आधारों पर आपत्तियों का निस्तारण हुआ।

  2. आयुक्तों के मतभेद की सच्चाई: एक राष्ट्रीय दैनिक में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कथित आपत्तियों का उल्लेख सामने आने के बाद आयोग ने प्रेस नोट में फैसले सर्वसम्मति से होने की बात कही। लेकिन इस विषय पर स्वयं मुख्य निर्वाचन आयुक्त या दोनों आयुक्तों का आधिकारिक और प्रत्यक्ष बयान आना अभी बाकी है।

  3. सॉफ्टवेयर और डेटा सुरक्षा की पारदर्शिता: चुनाव आयोग द्वारा उपयोग किए जा रहे केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर, डेटाबेस तक पहुंच और संशोधन की तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर जनता के बीच पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

  4. राजनीतिक दलों के आरोपों के तथ्यात्मक साक्ष्य: सीजेपी और अन्य विपक्षी दलों को केवल बयानबाजी तक सीमित न रहकर उन ठोस दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स को भी सार्वजनिक करना चाहिए, जिनके आधार पर वे सीईसी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

  5. कानून-व्यवस्था और भविष्य की रणनीति: जंतर-मंतर और राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा के बीच आयोजकों को यह स्पष्ट करना होगा कि वे लोकतांत्रिक मर्यादा, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और पुलिस अनुमति के नियमों का पालन किस प्रकार सुनिश्चित करेंगे।

 

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बांकीपुर में बीजेपी की करारी हार पर Prashant Kishor का तंज

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बांकीपुर में बीजेपी की करारी हार पर Prashant Kishor का तंज

पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली बड़ी जीत के बाद जन सुराज पार्टी के प्रमुख Prashant Kishor ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेतृत्व पर जोरदार हमला बोला है।

उन्होंने कहा कि बांकीपुर की जनता ने बीजेपी के 30 साल पुराने दबदबे को खत्म करके केंद्र और राज्य के शीर्ष नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दे दिया है।

51 हजार की बढ़त से हार तक क्यों पहुंची बीजेपी?

प्रशांत किशोर ने क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछले चुनाव में बीजेपी को बांकीपुर से 51,000 वोटों की विशाल बढ़त मिली थी। उन्होंने कहा कि महज कुछ महीनों के भीतर सड़कें या बुनियादी ढांचा नहीं बदला है, बल्कि जनता की सोच बदली है।

बिहार का नया नेतृत्व जनता को स्वीकार नहीं: Prashant Kishor

बीजेपी के हारने की मुख्य वजह पर प्रकाश डालते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि बीजेपी द्वारा बिहार में पेश किया गया नया नेतृत्व राज्य के लोगों को कतई स्वीकार नहीं है। जनता उस नए नेतृत्व के चाल-चलन, व्यवहार और कार्यशैली से सहज महसूस नहीं कर रही है, जिसकी परिणति इस चुनावी नतीजे के रूप में सामने आई है।

Prashant Kishor News: शिक्षा, रोजगार और पलायन पर ध्यान देने की जरूरत

जन सुराज प्रमुख ने जोर देकर कहा कि बिहार की जनता अब काम चाहती है। सरकार को किसी योग्य और सक्षम व्यक्ति को नेतृत्व सौंपना चाहिए ताकि राज्य में शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त हो सके, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हों और राज्य से हो रहे पलायन पर प्रभावी रोक लग सके।

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