Crime
Darbangha Crime: वाहन चेकिंग के दौरान आर्म्स एक्ट का फरार आरोपी नीतीश कुमार गिरफ्तार
Darbangha | स्थानीय थाना पुलिस ने अपराध नियंत्रण और सुरक्षा के मद्देनजर चलाए जा रहे विशेष अभियान में एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने नियमित वाहन चेकिंग के दौरान आर्म्स एक्ट के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे एक आरोपी को उसकी मोटरसाइकिल सहित धर दबोचा। गिरफ्तार आरोपी की पहचान स्थानीय थाना क्षेत्र के ननौरा गांव निवासी नीतीश कुमार के रूप में की गई है।
Darbangha: मंदिर के पास घेराबंदी कर पकड़ा गया आरोपी
केवटी थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि आर्म्स एक्ट मामले का एक संदिग्ध क्षेत्र में देखा गया है। इसी आधार पर थाना के ठीक सामने मंदिर के पास सघन वाहन जांच अभियान शुरू किया गया।
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संदेह के आधार पर रोका: जांच के दौरान एक पल्सर बाइक पर सवार युवक को संदिग्ध अवस्था में आते देखा गया, जिसे पुलिस बल ने घेराबंदी कर रोक लिया।
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पहचान की पुष्टि: जब युवक से कड़ाई से पूछताछ की गई और दस्तावेजों का मिलान किया गया, तो उसकी पहचान केवटी थाना में दर्ज आर्म्स एक्ट के मामले के अप्राथमिकी अभियुक्त (Non-FIR Accused) नीतीश कुमार के रूप में हुई।
Darbangha Crime: न्यायिक हिरासत में भेजा गया
पुलिस ने आरोपी नीतीश कुमार को घटना स्थल पर ही गिरफ्तार कर लिया और उसकी पल्सर बाइक को भी जब्त कर लिया है। थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी पुलिस की पकड़ से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था, लेकिन नियमित जांच की वजह से वह कानून के शिकंजे में आ गया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस द्वारा सभी आवश्यक कागजी और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं, जिसके बाद बुधवार को आरोपी को न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष (न्यायालय में) उपस्थापन के लिए भेज दिया गया है।
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Bihar
Rishu Shree Tender Scam: टेंडर माफिया रिशु श्री और उसके सिंडिकेट के खिलाफ चल रही जांच
Rishu Shree Tender Scam: बिहार में टेंडर और ठेकेदारी के खेल में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया कार्रवाई से लगाया जा सकता है. टेंडर माफिया रिशु श्री और उसके सिंडिकेट के खिलाफ चल रही जांच में अब एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है. जब्त किए गए मोबाइल और डिजिटल डेटा को खंगालने के बाद इस पूरे महाघोटाले में राजभवन और नौकरशाही के एक बड़े रसूखदार नाम की एंट्री हो गई है. जांच एजेंसियों के हाथ लगे दस्तावेजों से पता चला है कि रिशु श्री एक बेहद वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी के सीधे संपर्क में था और उन्हें ‘भैया’ कहकर संबोधित करता था. इस खुलासे के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है.
कौन हैं रिशु श्री के ‘आईएएस भैया’? ED खंगाल रही है कुंडली: Rishu Shree Tender Scam
ED की जांच के दौरान इस टेंडर घोटाले के तार राज्य के शीर्ष नौकरशाहों से जुड़ते दिख रहे हैं. जांच एजेंसी ने जब रिशु श्री और उसके करीबियों के डिजिटल डिवाइस, व्हाट्सएप चैट और कॉल लॉग्स को डिकोड किया, तो उसमें एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का बार-बार जिक्र मिला.
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‘भैया’ कोडनेम का रहस्य: रिशु श्री इस प्रभावशाली आईएएस अधिकारी को ‘भैया’ कहता था.
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रसूख का इस्तेमाल: शुरुआती जांच के मुताबिक, इसी वरिष्ठ अधिकारी के रसूख और संरक्षण की बदौलत रिशु श्री का सिंडिकेट सरकारी विभागों में करोड़ों रुपये के टेंडर अपनी मनमर्जी से हथियाने में कामयाब रहता था. अब ED की टीम इस ‘आईएएस भैया’ की पहचान पुख्ता करने और उनके खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाने में लगी है.
टेंडर सिंडिकेट पर कसा शिकंजा: रिशु श्री के सहयोगी की गिरफ्तारी: Rishu Shree Tender Scam
इस मामले में जांच एजेंसियों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है. रिशु श्री के काले कारनामों और टेंडर मैनेज करने के खेल में बराबर के भागीदार रहे उसके एक मुख्य सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया गया है. इस गिरफ्तारी के बाद से सिंडिकेट के अन्य सदस्यों और पर्दे के पीछे बैठे मास्टरमाइंड्स के चेहरे बेनकाब होने की उम्मीद बढ़ गई है. गिरफ्तार सहयोगी से लगातार पूछताछ की जा रही है.
करोड़ों की अकूत संपत्ति और ‘डील’ करने का खास तरीका: Rishu Shree Tender Scam
जांच में यह बात साफ हो चुकी है कि रिशु श्री कोई साधारण ठेकेदार नहीं, बल्कि एक संगठित टेंडर माफिया है. सरकारी धन की लूट और अवैध तरीकों से उसने बहुत कम समय में करोड़ों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया है.
छापेमारी में करोड़ों की काली कमाई का खुलासा: Rishu Shree Tender Scam
एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई में रिशु श्री और उसके करीबियों के ठिकानों से अकूत चल-अचल संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं. आलीशान मकानों, जमीनों के कागजात और बेनामी निवेश के साथ-साथ करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता चला है. इस काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा सिंडिकेट को संरक्षण देने वाले मददगारों तक भी पहुंचाया जाता था.
कैसे होती थी करोड़ों के टेंडरों की डील?: Rishu Shree Tender Scam
जांच में यह भी सामने आया है कि इस सिंडिकेट के काम करने का तरीका बेहद शातिराना था:
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विभागों में पैठ: ‘आईएएस भैया’ और अन्य बड़े संपर्कों का इस्तेमाल कर पहले सरकारी विभागों के भीतर टेंडर की शर्तों को अपने हिसाब से मोल्ड (मैनिपुलेट) कराया जाता था.
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प्रतिस्पर्धा खत्म करना: डिजिटल डेटा से खुलासा हुआ है कि अन्य योग्य ठेकेदारों को डरा-धमका कर या फिर सांठगांठ के जरिए रेस से बाहर कर दिया जाता था, ताकि टेंडर सिर्फ रिशु श्री या उसकी डमी कंपनियों को ही मिले.
ब्यूरोक्रेसी में मंचा हड़कंप, आगे क्या होगी कार्रवाई?
मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों से मिले इन पुख्ता सुरागों के बाद अब ED इस मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है. माना जा रहा है कि जल्द ही संबंधित वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को पूछताछ के लिए समन भेजा जा सकता है. रिशु श्री के टेंडर माफिया नेटवर्क और प्रशासनिक अधिकारियों के इस अपवित्र गठजोड़ (Nexus) के पूरी तरह उजागर होने से बिहार के कई और बड़े नामी चेहरों पर कानून का शिकंजा कसना तय माना जा रहा है.
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Bihar
Bihar News: रिशु श्री घोटाला केस, SVU का बड़ा एक्शन, करीबी डायरेक्टर संतोष कुमार गिरफ्तार
Bihar News: बिहार के बहुचर्चित रिशु श्री टेंडर घोटाला मामले में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार के इस बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एसवीयू की टीम लगातार एक्शन मोड में नजर आ रही है। इसी कड़ी में टीम ने रिशु श्री के बेहद करीबी सहयोगी और डायरेक्टर संतोष कुमार को दबोच लिया है।
पूछताछ में खुलेंगे भ्रष्टाचार के कई बड़े राज: Bihar News
डायरेक्टर संतोष कुमार की गिरफ्तारी को इस पूरे घोटाले की कड़ियों को जोड़ने में एक अहम कामयाबी माना जा रहा है। संतोष कुमार, रिशु श्री के बेहद करीब रहकर काम कर रहा था, ऐसे में विजिलेंस अधिकारियों को उम्मीद है कि उससे गहन पूछताछ के दौरान कई नए और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। इस टेंडर घोटाले में शामिल कुछ अन्य रसूखदार चेहरों और अवैध लेन-देन के गुप्त ठिकानों का पता भी चल सकता है।
बैकफुट पर घोटालेबाज, जांच का दायरा बढ़ा: Bihar News
एसवीयू की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से भ्रष्टाचार में लिप्त सिंडिकेट के बीच हड़कंप मच गया है। विभाग के सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है, जिससे कई और बड़े अधिकारियों और बिचौलियों पर शिकंजा कसने की पूरी संभावना है।
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Bihar
भागलपुर स्मार्ट सिटी में भी Rishu Shree का ‘खेल’, ई-टॉयलेट प्रोजेक्ट में एग्रीमेंट की उड़ाईं धज्जियां, अफसरों को कराई विदेश की सैर
भागलपुर | बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले के मुख्य आरोपी Rishu Shree और उसके सिंडिकेट के कारनामों की फेहरिस्त लगातार लंबी होती जा रही है। सहरसा नगर निगम में करोड़ों की हेराफेरी उजागर होने के बाद अब भागलपुर स्मार्ट सिटी परियोजना में भी बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और जालसाजी का मामला सामने आया है। नियमों को ताक पर रखकर टेंडर हथियाने के लिए रिशु श्री अधिकारियों को महंगे फ्लैट और देश-विदेश की सैर तक कराता था।
Rishu Shree Tender Scam: अफसरों को फ्लैट, विदेश टूर और टेंडर पर कब्जा
जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ‘सर्वश्री रिलायबल इंटरप्राइजेज’ का प्रोपराइटर रिशु श्री अपने रसूख और सत्ता की हनक का इस्तेमाल कर मलाईदार टेंडर हासिल करता था।
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सिंडिकेट का प्रभाव: वह मनपसंद अधिकारियों की तैनाती करवाता था।
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रिश्वत का नया मॉडल: अफसरों को अपने प्रभाव में लेने के लिए वह उन्हें देश-विदेश की सैर कराता था और महानगरों में आलीशान फ्लैट दिलाता था। इसके बदले में अधिकारी आंख मूंदकर टेंडर उसी के सिंडिकेट को सौंप देते थे।
25 स्मार्ट ई-टॉयलेट प्रोजेक्ट: स्थापना के बाद काम बंद
भागलपुर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत रिशु श्री की कंपनी को शहर में 25 स्मार्ट ई-टॉयलेट स्थापित करने का ठेका मिला था।
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शुरुआत: इस परियोजना का शुभारंभ 16 मार्च, 2022 को हुआ था। बाद में 28 जून, 2022 को उसके सहयोगी साहिल सिन्हा को एग्रीमेंट (एकरारनामा) के लिए अधिकृत किया गया।
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शर्तों का उल्लंघन: करार के तहत एजेंसी को ई-टॉयलेट लगाने के साथ-साथ 5 वर्षों तक उनके संचालन, तकनीकी सहायता और रखरखाव (Maintenance) की जिम्मेदारी संभालनी थी। लेकिन स्थापना के बाद से ही एजेंसी ने सुध नहीं ली और ई-टॉयलेट कबाड़ में तब्दील होने लगे।
Rishu Shree Tender Scam: 6 समीक्षा बैठकें, पर ईमेल और नोटिस का नहीं दिया जवाब
स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने प्रोजेक्ट की बदहाली को देखते हुए लगातार रिशु श्री की कंपनी को नोटिस और ईमेल भेजे। इसके बाद प्रबंधन ने इन तारीखों पर समीक्षा बैठकें बुलाईं:
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वर्ष 2025: 10 सितंबर, 22 सितंबर, 18 नवंबर और 22 दिसंबर।
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वर्ष 2026: 3 फरवरी और 9 फरवरी।
इन 6 आधिकारिक बैठकों और बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद एजेंसी का कोई भी प्रतिनिधि या अधिकारी बैठक में शामिल नहीं हुआ। इससे योजना का मूल उद्देश्य पूरी तरह अधूरा रह गया और सरकारी राशि की बर्बादी हुई।
इशाकचक थाने में FIR दर्ज, अनुसंधान अंतिम चरण में
एजेंसी की इस घोर लापरवाही और धोखाधड़ी को देखते हुए भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तकनीकी प्रबंधक पंकज कुमार ने 9 फरवरी, 2026 को भागलपुर के इशाकचक थाने में रिशु श्री और साहिल सिन्हा के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया।
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आरोप: दोनों आरोपियों पर परियोजना की शर्तों के उल्लंघन, धोखाधड़ी और सरकारी कार्य में लापरवाही का संगीन आरोप है।
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जांच: मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। केस की जांच दारोगा नीलमणि कुमार दास को सौंपी गई है, और पुलिस सूत्रों के मुताबिक अनुसंधान (Investigation) अब अपने अंतिम चरण में है।
सहरसा के बाद भागलपुर में सामने आया यह मामला साफ करता है कि रिशु श्री का नेटवर्क पूरे बिहार के नगर निकायों और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में किस कदर फैला हुआ था। बुडको और एसवीयू (SVU) की चौतरफा जांच के बीच भागलपुर पुलिस भी जल्द ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है।
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