Bihar
Supaul News: सुपौल में मोहर्रम को लेकर प्रशासन सख्त, बिना लाइसेंस नहीं निकलेगा जुलूस, डीजे पर लगा पूर्ण प्रतिबंध
Supaul News: आगामी मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और भाईचारे के माहौल में संपन्न कराने के लिए सुपौल जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। त्योहार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राघोपुर थाना परिसर में एक महत्वपूर्ण शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता थानाध्यक्ष अमित कुमार राय ने की। बैठक में मुख्य रूप से वीरपुर के एसडीपीओ (SDPO) सुरेंद्र कुमार और अंचलाधिकारी रश्मि प्रिया सहित क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की नई गाइडलाइंस: Supaul News
बैठक के दौरान शांति समिति और क्षेत्र के लोगों के लिए कई कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है:
1. जुलूस और मेले के लिए लाइसेंस अनिवार्य
एसडीपीओ सुरेंद्र कुमार ने साफ तौर पर कहा कि मोहर्रम के अवसर पर किसी भी प्रकार का जुलूस निकालने या मेला आयोजित करने के लिए संबंधित समिति को स्थानीय थाने से पूर्व अनुमति और लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। बिना वैध लाइसेंस के आयोजन करने वालों पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
2. डीजे (DJ) बजाने पर पूरी तरह रोक
त्योहार के दौरान ध्वनि प्रदूषण और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए डीजे के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा, लाइसेंस के आवेदन के साथ ही समितियों को निम्नलिखित जानकारियां प्रशासन को सौंपनी होंगी:
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जुलूस का तय मार्ग (रूट)
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अखाड़ा स्थल की जानकारी
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आयोजकों के नाम और मोबाइल नंबर
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शामिल होने वाले प्रतिभागियों की संभावित संख्या
3. मेला समितियों को तैनात करने होंगे स्वयंसेवक
सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन ने प्रत्येक मेला समिति को अपने स्तर पर 10 से 15 स्वयंसेवकों (Volunteers) की तैनाती करने का निर्देश दिया है। ये स्वयंसेवक भीड़ को संभालने में स्थानीय पुलिस की मदद करेंगे। यदि जुलूस या मेले के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी सीधी जवाबदेही लाइसेंस में दर्ज जिम्मेदार व्यक्तियों की होगी।
अफवाह फैलाने वालों और उपद्रवियों को सख्त चेतावनी: Supaul News
थानाध्यक्ष अमित कुमार राय ने बैठक में मौजूद लोगों को आश्वस्त किया कि पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। संवेदनशील इलाकों की विशेष निगरानी की जा रही है और असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखी जा रही है। प्रशासन की अपील: “नागरिक किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। यदि आसपास कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें। सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
बैठक में उपस्थित गणमान्य लोग
इस शांति समिति की बैठक में क्षेत्र के कई प्रमुख चेहरे शामिल हुए, जिन्होंने प्रशासन को शांति व्यवस्था बनाए रखने में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया। इनमें पूर्व प्रमुख महेंद्र गुप्ता, प्रो. कमल यादव, मो. तबरेज, नूर आलम, मो. बसीर, सागर यादव, मो. फैज, मित्तन यादव, गणेश दास, राधा देवी, अमित भगत और विनय भगत सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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Triveniganj में अवैध विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर सील, संचालक फरार
त्रिवेणीगंज (सुपौल): सुपौल जिले के Triveniganj अनुमंडल क्षेत्र में अवैध रूप से कुकुरमुत्ते की तरह फल-फूल रहे निजी क्लीनिकों और पैथोलॉजी-अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों के विरुद्ध स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने अपना कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
इसी क्रम में मंगलवार की शाम अनुमंडलीय अस्पताल चौक स्थित ‘विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर’ पर औचक छापेमारी की गई। जांच के दौरान केंद्र संचालन से जुड़ा कोई भी वैध निबंधन (रजिस्ट्रेशन) अथवा अनुमति पत्र प्रस्तुत नहीं किया जा सका। मौके से मुख्य संचालक भी फरार पाया गया, जिसके बाद जांच दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे सेंटर को सील कर दिया।
Triveniganj Crime: औचक निरीक्षण में न मिले कागजात, न मिले विशेषज्ञ डॉक्टर
मंगलवार देर शाम अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. उमेश कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की एक उच्चस्तरीय टीम ने अस्पताल चौक पर अचानक दबिश दी। इस छापेमारी दल में स्वास्थ्य प्रबंधक एस. अदीब अहमद के साथ स्थानीय पुलिस बल के जवान भी तैनात थे।
जांच टीम के पहुंचते ही अल्ट्रासाउंड केंद्र पर अफरा-तफरी मच गई और मुख्य संचालक मौके से खिसक गया। जांच दल ने जब परिसर में मौजूद संचालक के भाई से पीसीपीएनडीटी (PNDT) एक्ट के तहत अनिवार्य निबंधन, वैध कागजात और योग्यता प्रमाण पत्र मांगे, तो वह कोई भी दस्तावेज दिखाने में असमर्थ रहा। इसके अलावा सेंटर में कोई रेडियोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ चिकित्सक भी उपस्थित नहीं था, जिसके अभाव में अल्ट्रासाउंड जांच का संचालन पूरी तरह गैरकानूनी है।
Triveniganj News: लंबे समय से चल रहा था खेल, बोर्ड लगाकर हो रहा था गुमराह
स्थानीय सूत्रों के अनुसार विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर काफी समय से अनुमंडलीय अस्पताल के ठीक सामने धड़ल्ले से संचालित किया जा रहा था। बाहर बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर अत्याधुनिक और उच्च स्तरीय जांच सुविधाओं का दावा कर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले भोले-भाले मरीजों को आकर्षित किया जाता था।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सेंटर नियमों को ताक पर रखकर अप्रशिक्षित कर्मियों के सहारे चलाया जा रहा था। गंभीर अनियमितताओं और मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खुले खिलवाड़ को देखते हुए अधिकारियों ने विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए केंद्र के मुख्य प्रवेश द्वार को सील कर दिया।
उपाधीक्षक का बयान: दर्ज होगी प्राथमिकी, जारी रहेगा अभियान
कार्रवाई के संबंध में अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. उमेश कुमार ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण के दौरान विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर का कोई वैध रिकॉर्ड नहीं मिला। न तो संचालक उपस्थित था और न ही कोई अधिकृत डॉक्टर। प्रथम दृष्टया अवैध पाए जाने पर सेंटर को सील कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की विस्तृत रिपोर्ट वरीय अधिकारियों और सिविल सर्जन को भेजी जा रही है, जिसके आधार पर संबंधित संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
फर्जी क्लीनिक और नर्सिंग होम संचालकों में फैली बेचैनी
स्वास्थ्य विभाग की इस सख्त कार्रवाई के बाद त्रिवेणीगंज और आसपास के इलाकों में अवैध रूप से चल रहे निजी नर्सिंग होम, जांच केंद्रों और झोलाछाप चिकित्सकों में हड़कंप मच गया है। कई संचालक अपनी दुकानों के शटर गिराकर भूमिगत हो गए हैं। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए मांग की है कि यह अभियान केवल सील करने तक सीमित न रहे, बल्कि अवैध स्वास्थ्य माफियाओं के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमे दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए।
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Darbhanga के वैज्ञानिक का वैश्विक पटल पर परचम: लगातार तीसरी बार दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल
Darbhanga : मिथिलांचल की उर्वर बौद्धिक धरती ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है। दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड अंतर्गत पैगंबरपुर गांव निवासी डॉ. संतोष कुमार ने वैश्विक विज्ञान जगत में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
अमेरिका के प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और विख्यात शोध प्रकाशक एल्सेवियर द्वारा संयुक्त रूप से जारी दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत (Top 2%) वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में डॉ. संतोष को लगातार तीसरी बार स्थान मिला है। फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी (खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) विषय में उन्हें वैश्विक स्तर पर 652वीं रैंक प्रदान की गई है। उनका अनुसंधान मुख्य रूप से खाद्य सुरक्षा, भंडारण क्षमता के विस्तार और प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्ति दिलाने वाली पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग तकनीकों पर केंद्रित है।
Darbhanga News: टिकाऊ पैकेजिंग और खाद्य संरक्षण पर गहन अनुसंधान
डॉ. संतोष कुमार वर्तमान में असम स्थित केंद्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईटी), कोकराझार के खाद्य अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वह मई 2011 से इस संस्थान में अध्यापन और उच्चस्तरीय शोध कार्य में सक्रिय हैं। उनका मुख्य शोध कार्य सस्टेनेबल फूड पैकेजिंग, बायोडिग्रेडेबल मैटेरियल्स (जैव-अपघटनीय सामग्री), खाद्य-योग्य (एडिबल) कोटिंग्स और सुरक्षात्मक फिल्मों के विकास पर आधारित है।
डॉ. कुमार की तकनीक का मुख्य उद्देश्य खाद्य उत्पादों की पोषण गुणवत्ता, स्वाद और ताजगी को बिना किसी रासायनिक मिलावट के लंबे समय तक सुरक्षित रखना है। इसके अलावा, वह ‘सक्रिय एवं स्मार्ट पैकेजिंग’ प्रणालियों पर भी काम कर रहे हैं। इस उन्नत तकनीक के जरिए पैकेजिंग का आवरण स्वतः खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और ताजगी के स्तर पर नजर रखने में सक्षम होता है, जिससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन मिल सके।
Darbhanga news: प्राकृतिक स्रोतों से विकल्प तैयार कर प्लास्टिक प्रदूषण पर चोट
वैज्ञानिक डॉ. संतोष कुमार के शोध में बायोपॉलिमर आधारित संरचनाओं और प्राकृतिक वर्णकों (नेचुरल पिगमेंट्स) का उपयोग प्रमुखता से शामिल है। वह कृषि अवशेषों, प्राकृतिक संसाधनों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों से निकलने वाले उप-उत्पादों (वेस्ट बायोमास) का पुनः उपयोग कर मूल्यवर्धित पैकेजिंग सामग्री तैयार करने की तकनीक विकसित कर रहे हैं।
उनका यह नवाचार एकल-उपयोग वाले हानिकारक प्लास्टिक (सिंगल-यूज प्लास्टिक) के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल वैश्विक स्तर पर होने वाली खाद्य पदार्थों की बर्बादी (फूड वेस्टेज) को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी, बल्कि पैकेजिंग उद्योग से उत्पन्न होने वाले पर्यावरणीय कचरे और कार्बन फुटप्रिंट को घटाकर सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
पैतृक गांव पैगंबरपुर में हर्ष, युवाओं के लिए बने प्रेरणा
जमादार साह के पुत्र डॉ. संतोष कुमार के एक ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्वस्तरीय वैज्ञानिकों की कतार में खड़े होने पर उनके पैतृक गांव पैगंबरपुर सहित समूचे दरभंगा जिले में गर्व का माहौल है। अपनी इस उपलब्धि पर उन्होंने अपने माता-पिता, गुरुजनों, शोधार्थियों और छात्रों का आभार जताया। शिक्षाविदों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार तीसरी बार अंतरराष्ट्रीय मानक सूची में शामिल होकर डॉ. कुमार ने यह साबित कर दिया है कि लगन और शोध निष्ठा से सुदूर देहात का युवा भी दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकता है। यह उपलब्धि विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए बड़ी प्रेरणा साबित होगी।
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Supaul: थुमहा में प्रखंड स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट का आगाज: राघोपुर ने किशनपुर को 7 विकेट से रौंदा
Supaul: सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड क्षेत्र स्थित थुमहा उच्च विद्यालय के खेल मैदान में मंगलवार से बहुप्रतीक्षित प्रखंड स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट का रंगारंग आगाज हुआ। पहले ही मुकाबले में दर्शकों को रोमांचक खेल देखने को मिला, जहां राघोपुर की टीम ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए किशनपुर की टीम को 7 विकेट से करारी शिकस्त दी। मैच में राघोपुर के गेंदबाज दिलखुश की घातक गेंदबाजी और बल्लेबाज मनीष की आतिशी पारी ने मैच को पूरी तरह एकतरफा बना दिया।
Supaul: जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से किया उद्घाटन
टूर्नामेंट का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि स्थानीय विधायक रामविलास कामत, स्थानीय मुखिया दिनेश चौधरी, पैक्स अध्यक्ष बद्रीनारायण चौधरी, पूर्व मुखिया रामप्रसाद मंडल और हुसैन साहब ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। इस अवसर पर खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए विधायक रामविलास कामत ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने का बेहतरीन मंच मिलता है। उन्होंने खिलाड़ियों से खेल भावना और अनुशासन के साथ खेलने का आह्वान किया।
110 रनों पर ढेर हुई किशनपुर की टीम
उद्घाटन मैच में राघोपुर की टीम के कप्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी किशनपुर की शुरुआत बेहद लड़खड़ाती रही। राघोपुर के तेज गेंदबाजों की कसी हुई लाइन-लेंथ के सामने किशनपुर के बल्लेबाज खुलकर शॉट नहीं खेल सके और नियमित अंतराल पर अपने विकेट गंवाते चले गए। पूरी टीम 17.1 ओवरों में मात्र 110 रनों के मामूली स्कोर पर सिमट गई।
दिलखुश के पांच विकेट और मनीष का बल्ला गरजा
किशनपुर को सस्ते में समेटने में राघोपुर के गेंदबाज दिलखुश ने मुख्य भूमिका निभाई। दिलखुश ने शानदार गेंदबाजी करते हुए विपक्षी टीम के 5 महत्वपूर्ण बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया।
इसके बाद 111 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी राघोपुर की टीम ने शुरू से ही आक्रामक तेवर अपनाए। सलामी बल्लेबाज मनीष ने मैदान के चारों ओर चौकों-छक्कों की बरसात करते हुए महज 17 गेंदों पर 45 रनों की धुआंधार पारी खेली। मनीष के इस तूफान की बदौलत राघोपुर की टीम ने मात्र 9.1 ओवरों में 3 विकेट के नुकसान पर जीत का लक्ष्य हासिल कर लिया। घातक गेंदबाजी के लिए दिलखुश को ‘मैन ऑफ द मैच’ के पुरस्कार से नवाजा गया।
स्थानीय युवाओं के प्रयास से सजा खेल का मंच
इस ग्रामीण खेल महोत्सव को सफल बनाने में स्थानीय युवाओं ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया। मैच के दौरान कमेंट्री बॉक्स में संजय कुमार और कैलाश कुमार ने अपनी रोचक कमेंट्री से दर्शकों का उत्साह बढ़ाया। वहीं, मैदान पर अंपायर की निष्पक्ष भूमिका नीरज कुशवाहा और मयंक मणि ने निभाई। स्कोरिंग की जिम्मेदारी उपेंद्र मेहता और सोनू ने बखूबी संभाली।
प्रतियोगिता के सफल आयोजन में कैलाश कुमार, अभिषेक कुमार, आयुष कुमार सहित खेल समिति के कई युवाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मैच देखने के लिए मैदान के चारों ओर बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और ग्रामीण मौजूद रहे।
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