Bihar
Madhepura की सड़कों पर आवारा गायों का ‘कब्जा’, रोजाना बढ़ रहा सड़क हादसों का ग्राफ
Madhepura। मधेपुरा शहर की सड़कों पर इन दिनों सबसे बड़ा खतरा बेकाबू ट्रैफिक नहीं, बल्कि आवारा और बेसहारा गायों के झुंड बन चुके हैं। शहर की लगभग सभी प्रमुख सड़कों और व्यस्त चौराहों के बीचों-बीच आवारा पशुओं के डेरा जमा लेने के कारण न केवल यातायात व्यवस्था चरमरा गई है, बल्कि राहगीरों की जान पर भी हर वक्त खतरा मंडराता रहता है। प्रशासन की ओर से कार्रवाई के तमाम दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
Madhepura News: व्यस्ततम चौराहे बने पशुओं का नया ठिकाना
मधेपुरा के सबसे व्यस्त व्यावसायिक और रिहाइशी इलाकों—जैसे सुभाष चौक, पूर्णिया गोला, कॉलेज चौक और स्टेशन रोड—पर सुबह से लेकर देर रात तक आवारा गायों के बड़े-बड़े झुंड देखे जा सकते हैं। बीच सड़क पर इन पशुओं के बैठ जाने से घंटों लंबा जाम लगना अब आम बात हो चुकी है।
स्थानीय दुकानदारों और वाहन चालकों के अनुसार, दोपहिया और साइकिल सवार अक्सर इन पशुओं से टकराकर गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं। सबसे खतरनाक स्थिति रात के समय पैदा होती है, जब सड़कों पर पर्याप्त रोशनी न होने के कारण दूर से बैठे पशु दिखाई नहीं देते और तेज रफ्तार वाहन दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
Madhepura News: बच्चों की सुरक्षा को लेकर सहमे अभिभावक
आवारा पशुओं की इस समस्या से समाज का हर वर्ग त्रस्त है:
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दुकानदार: बाजार के व्यापारियों का कहना है कि गायें दुकानों के ठीक सामने आकर कचरा फैलाती हैं, जिससे गंदगी और बदबू बढ़ती है और ग्राहकों का आना-जाना दूभर हो जाता है।
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स्कूली बच्चे: स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि सड़कों पर गायों के अचानक भड़कने और दौड़ने के कारण स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे बुरी तरह सहम जाते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर हमेशा डर बना रहता है।
समस्या की मुख्य वजह: ढुलमुल व्यवस्था और लापरवाही
विशेषज्ञों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि इस गंभीर समस्या के पीछे कई बड़े कारण हैं:
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पशुपालकों की संवेदनहीनता: कई पशुपालक गायों के दूध देना बंद करते ही उन्हें लावारिस छोड़ देते हैं।
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ठोस कचरा प्रबंधन का अभाव: शहर में कचरा निस्तारण की मुकम्मल व्यवस्था न होने से जगह-जगह कचरे के ढेर लग जाते हैं, जो इन पशुओं को मुख्य सड़कों की ओर आकर्षित करते हैं।
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गौशालाओं की कमी: नगर परिषद के पास आवारा पशुओं को पकड़कर रखने के लिए पर्याप्त संसाधन और क्षमता वाली गौशालाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे यह समस्या लगातार विकराल होती जा रही है।
नागरिकों की दोटूक मांग: सिर्फ आश्वासन नहीं, अब परमानेंट इलाज चाहिए
मधेपुरा के आम नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से मांग की है कि कागजी दावों और सिर्फ आश्वासनों के बजाय अब धरातल पर कड़ा एक्शन लिया जाए। लोगों ने मांग की है कि सड़कों से आवारा पशुओं को हटाने के लिए निरंतर विशेष अभियान चलाया जाए, पशुपालकों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और नई गौशालाओं का निर्माण कराया जाए ताकि शहरवासियों को इस दैनिक परेशानी और हादसों के साए से मुक्ति मिल सके।
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DIG का निरीक्षण टलने के बाद सदर थाना पहुंचे Saharsa SP: लंबित कांडों की समीक्षा, फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी के निर्देश
सहरसा। कोसी क्षेत्र के डीआईजी डॉ. कुमार आशीष का सदर थाने में प्रस्तावित निरीक्षण कार्यक्रम अपरिहार्य कारणों से स्थगित होने के बाद पुलिस अधीक्षक (Saharsa SP) विक्रम सिहाग स्वयं सदर थाना पहुंचे।
एसपी ने थाना परिसर में पुलिस पदाधिकारियों के साथ एक घंटे से अधिक समय तक गहन समीक्षा बैठक की और लंबित कांडों के त्वरित निष्पादन, अनुसंधान की गुणवत्ता व विधि-व्यवस्था को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए।
Saharsa SP: लंबित मामलों के निष्पादन और फरार अपराधियों की गिरफ्तारी पर जोर
एसपी ने थाना क्षेत्र के आपराधिक मामलों और अनुसंधानों की वर्तमान प्रगति की विस्तृत समीक्षा की:
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वारंट व कुर्की जब्ती: लंबे समय से लंबित वारंटों के निष्पादन और फरार अभियुक्तों के खिलाफ कुर्की-जब्ती की कार्रवाई को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का आदेश दिया गया।
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समयबद्ध कार्रवाई: आम जनता की शिकायतों का निष्पक्ष व समयबद्ध निस्तारण करने का निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी मामले की जांच में अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं होगा।
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क्वालिटी इन्वेस्टिगेशन: अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार लाने पर विशेष बल दिया गया ताकि कोर्ट में मजबूत पैरवी सुनिश्चित हो सके।
Saharsa SP: थाना परिसर, मालखाना और अभिलेखों का औचक निरीक्षण
बैठक के उपरांत पुलिस अधीक्षक ने सदर थाने के विभिन्न विंग्स का भौतिक निरीक्षण किया:
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दस्तावेजों का रख-रखाव: मालखाना, हाजत, शस्त्रागार और कार्यालयीन अभिलेखों की स्थिति देखकर रिकॉर्ड्स को हमेशा अपडेट और व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए।
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पारदर्शिता व स्वच्छता: थाना परिसर में स्वच्छता बनाए रखने और प्रशासनिक कामकाज में पूर्ण पारदर्शिता बरतने को कहा गया।
Saharsa SP: रात्रि गश्ती और वाहन जांच तेज करने के आदेश
अपराध नियंत्रण और सतर्कता बढ़ाने के उद्देश्य से एसपी ने मैदानी पुलिसिंग को मजबूत करने के निर्देश दिए:
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संवेदनशील इलाकों में नियमित निगरानी और सघन वाहन जांच अभियान चलाने को कहा गया।
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रात्रि गश्ती (Night Patrolling) को प्रभावी बनाने और आम नागरिकों के साथ बेहतर संवाद स्थापित कर जनता का भरोसा जीतने पर जोर दिया गया।
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Supaul में कार से टकराई शराब लदी बाइक: 30 लीटर देसी शराब छोड़कर तस्कर फरार, वाहन जब्त
छातापुर (Supaul )। मुख्यालय स्थित बजरंग चौक के समीप स्टेट हाईवे-91 (SH-91) पर शुक्रवार रात शराब से लदी एक बाइक और कार के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसे के बाद कार चालक और बाइक सवार दोनों तस्कर मौके पर ही क्षतिग्रस्त बाइक और शराब की खेप छोड़कर फरार हो गए।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल से 30 लीटर देसी चुलाई शराब और बिना नंबर प्लेट की बाइक जब्त कर ली।
Supaul Crime: बजरंग चौक पर SH-91 चढ़ते वक्त हुई टक्कर
जानकारी के अनुसार, दो युवक नरहैया की ओर से बाइक पर देसी शराब की खेप लादकर छातापुर की तरफ आ रहे थे:
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नशे में थे सवार: बताया जा रहा है कि बाइक सवार नशे की हालत में थे और जैसे ही बजरंग चौक के पास SH-91 पर चढ़ने लगे, सामने से आ रही कार से उनकी सीधी टक्कर हो गई।
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सड़क पर बिखरे पाउच: टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सड़क पर गिर गई और उस पर लदे शराब के कई पाउच फटकर सड़क पर बहने लगे।
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मौके से भागे आरोपी: स्थानीय लोगों के जुटने से पहले ही कार चालक और दोनों बाइक सवार अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भाग निकले।
Supaul Crime: बिना नंबर प्लेट की स्प्लेंडर बाइक, 30 लीटर शराब बरामद
थानाध्यक्ष प्रमोद झा के नेतृत्व में पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की:
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बरामदगी: पुलिस ने मौके से करीब 30 लीटर देसी चुलाई शराब और काले रंग की स्प्लेंडर बाइक को कब्जे में लिया।
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पहचान में जुटी पुलिस: बाइक पर नंबर प्लेट नहीं होने के कारण चेसिस और इंजन नंबर के आधार पर वाहन मालिक की पहचान की जा रही है।
बाइक मालिक और अज्ञात सवारों पर प्राथमिकी दर्ज
थानाध्यक्ष प्रमोद झा ने बताया कि बाइक और उसके मालिक के खिलाफ मद्यनिषेध अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस खुफिया सूत्रों की मदद से फरार तस्करों और शराब के सप्लायर व रिसीवर के नेटवर्क की कड़ियां तलाशने में जुटी है।
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Madhepura में एनीमिया मुक्त भारत अभियान तेज: DM ने दिए शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के निर्देश, 1 सितंबर से NCD कैंपेन
Madhepura। जिले में एनीमिया (खून की कमी) की रोकथाम और गैर-संचारी रोगों (NCD) के नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी अभिषेक रंजन की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में एनीमिया मुक्त भारत अभियान की प्रगति की जांच की गई और अधिकारियों को केवल कागजी आंकड़े जुटाने के बजाय धरातल पर शत-प्रतिशत परिणाम देने का सख्त निर्देश दिया गया।
Madhepura: स्क्रीनिंग से लेकर नियमित फॉलोअप तक पर जोर
डीएम ने स्पष्ट किया कि एनीमिया से निपटने के लिए केवल दवा वितरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी स्वास्थ्य प्रक्रिया को परिणामोन्मुख बनाना होगा:
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समय पर पहचान: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में व्यापक स्क्रीनिंग कर एनीमिया पीड़ितों की समय पर पहचान की जाएगी।
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दवा व पोषण: आयरन-फोलिक एसिड (IFA) की निर्बाध आपूर्ति, वितरण और उचित पोषण परामर्श सुनिश्चित किया जाएगा।
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मरीजों का फॉलोअप: उपचार के बाद मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि योजना का वास्तविक लाभ मिले।
Madhepura: 1 सितंबर से शुरू होगा NCD कैंपेन
बैठक में आगामी 1 सितंबर 2026 से प्रारंभ होने वाले गैर-संचारी रोग (NCD) अभियान की तैयारियों की भी विस्तृत समीक्षा की गई:
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गंभीर बीमारियों की पहचान: डायबिटीज, हाइपरटेंशन और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों की समय पूर्व स्क्रीनिंग की जाएगी।
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जांच, उपचार व रेफरल: संभावित मरीजों की पहचान कर आवश्यक जांच, निःशुल्क दवाइयां और आवश्यकता पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रेफरल की व्यवस्था रहेगी।
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के सभी चिकित्सा पदाधिकारियों और कर्मियों को आपसी समन्वय से समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सा पदाधिकारी और संबंधित कर्मी उपस्थित रहे।
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