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Supaul में बिजली योजनाओं की समीक्षा: सांसद ने दिए समय पर काम पूरा करने के निर्देश, उपभोक्ताओं को मिलेगी निर्बाध आपूर्ति

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Supaul: जिले की बिजली व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से समाहरणालय स्थित लहटन चौधरी सभागार में जिला स्तरीय विद्युत समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता स्थानीय सांसद दिलेश्वर कामैत ने की।

बैठक के दौरान जिले में चल रही विभिन्न विद्युत परियोजनाओं, निर्बाध बिजली आपूर्ति की स्थिति, नए सबस्टेशनों के निर्माण, आरडीएसएस (RDSS) योजना और प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। सांसद ने अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को सख्त लहजे में हिदायत दी कि वे सभी सरकारी योजनाओं को तय समयसीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करें, ताकि उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली सेवा मिल सके।

Supaul : आरडीएसएस और सौर ऊर्जा योजनाओं पर रहा विशेष फोकस

बैठक में आरडीएसएस योजना के तहत बिछाई जा रही नई बिजली लाइनों और नए विद्युत शक्ति उपकेंद्रों (सबस्टेशनों) की स्थापना के कार्यों का जायजा लिया गया। सांसद ने कहा कि जिले में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए समय पर बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही बैठक में निम्नलिखित प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं की भी समीक्षा की गई:

  • प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: इसके तहत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयासों की समीक्षा हुई।

  • कुटीर ज्योति योजना: गरीब उपभोक्ताओं के लिए शुरू की गई निःशुल्क सोलर योजना की प्रगति जांची गई।

  • धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान: जनजातीय क्षेत्रों में चल रहे विद्युत विकास कार्यों का मूल्यांकन किया गया।

Supaul: लापरवाही बर्दाश्त नहीं, विभागों में आपसी समन्वय की जरूरत

सांसद दिलेश्वर कामैत ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं की नियमित रूप से निगरानी की जाए और विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर काम को गति दी जाए। यदि किसी योजना के क्रियान्वयन में कोई प्रशासनिक या तकनीकी बाधा आ रही है, तो उसकी तुरंत पहचान कर उसका जल्द से जल्द निपटारा सुनिश्चित किया जाए।

उपभोक्ताओं की शिकायतों का हो त्वरित निवारण

बैठक में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता, मेंटेनेंस के काम और उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित समाधान पर भी चर्चा हुई। सांसद ने जोर देकर कहा कि बिजली आज के दौर में केवल एक बुनियादी जरूरत नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और स्थानीय उद्योगों के विकास का मुख्य आधार है। इसलिए आम जनता को सुरक्षित और विश्वसनीय बिजली पहुंचाना बिजली विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

बैठक में ये रहे मौजूद

इस उच्च स्तरीय बैठक में कई महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें शामिल हैं:

  • जनप्रतिनिधि: त्रिवेणीगंज विधायक सोनम रानी सरदार।

  • प्रशासनिक अधिकारी: जिलाधिकारी (डीएम) सह जिला विद्युत समिति के संयोजक सावन कुमार और उप विकास आयुक्त (डीडीसी) सारा असरफ।

  • बिजली विभाग के अधिकारी: विद्युत अधीक्षण अभियंता सह सदस्य सचिव संतोष कुमार, वरीय प्रबंधक (राजस्व) दीपक कुमार, विद्युत कार्यपालक अभियंता धनंजय कुमार सिंह सहित सभी सहायक व कनीय विद्युत अभियंता और कार्यकारी एजेंसियों के प्रतिनिधि।

सांसद ने अंत में सभी को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से काम करने का निर्देश दिया ताकि जिले के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की विद्युत व्यवस्था को नया बल मिल सके।

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Saharsa: चैनपुर का ऐतिहासिक मां काली मंदिर, जहां पूरी होती है हर मनोकामना

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Saharsa: कोसी प्रमंडल के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक परिदृश्य में सहरसा जिले के चैनपुर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर की ख्याति एक जाग्रत सिद्धपीठ के रूप में है। सदियों से यह पावन स्थल सनातन आस्था, शक्ति उपासना और तांत्रिक अनुष्ठान का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

वर्तमान समय में चैनपुर में दो काली मंदिर स्थापित हो चुके हैं, परंतु आस्थावान भक्तों के बीच सबसे पुराना मूल मंदिर आज भी आस्था का मुख्य केंद्र है। सहरसा ही नहीं, बल्कि सुपौल, मधेपुरा, खगड़िया, दरभंगा और मधुबनी सहित पूरे मिथिलांचल व सीमांचल से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन यहां मां भगवती के चरणों में शीश नवाकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करने पहुंचते हैं।

Saharsa: दशकों पुरानी परंपरा और शक्ति साधना की पीठ

चैनपुर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर अपने अलौकिक आध्यात्मिक वातावरण और शक्ति संचय की भूमि के रूप में जाना जाता है। यहां नियमित रूप से मां काली की वैदिक और तांत्रिक दोनों पद्धतियों से विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ब्रह्म मुहूर्त में प्रातःकालीन मंगल आरती और संध्या वेला में महाआरती के दौरान बजने वाले घंटे-घड़ियाल, शंख की ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं।

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, इस दरबार में जो भी भक्त सच्चे अंतःकरण और निष्कपट भाव से झोली फैलाता है, मां उसकी हर मनोकामना अवश्य पूर्ण करती हैं। संतान प्राप्ति, असाध्य रोगों से मुक्ति और पारिवारिक संकटों के निवारण हेतु दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में घी के अखंड दीप प्रज्वलित कर मां से आशीर्वाद मांगते हैं। हाल के वर्षों में मंदिर प्रबंधन और ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, पेयजल व्यवस्था, शेड और प्रकाश के समुचित प्रबंध किए गए हैं, जिससे आने वाले भक्तों को सुगमता होती है।

Saharsa: नवरात्र, अमावस्या और दीपावली पर उमड़ता है जनसैलाब

सामान्य दिनों में भी यहां भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन शारदीय व चैत्र नवरात्र, प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तथा विशेष रूप से कार्तिक अमावस्या (दीपावली की रात) को यहां विशाल धार्मिक समागम देखने को मिलता है। इन पावन तिथियों पर माता का अलौकिक व मनोहारी भव्य श्रृंगार किया जाता है। अखंड दीप, हवन और रात्रि जागरण के साथ भजन-कीर्तन का दौर अनवरत चलता है।

इस पीठ की एक प्रमुख और प्राचीन परंपरा मन्नत पूरी होने पर छाग (बकरे) की बलि प्रदान करने की है। विशेषकर दीपावली और काली पूजा के अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु अपनी प्रतिज्ञा और संकल्प के अनुसार यहां बलि अर्पित करते हैं तथा मां को तांत्रिक व सात्विक भोग समर्पित करते हैं।

धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन और संस्कृति की धरोहर

चैनपुर का यह मां काली मंदिर केवल पूजा-पाठ का स्थल नहीं, बल्कि स्थानीय लोकसंस्कृति और धार्मिक पर्यटन का भी एक जीवंत केंद्र बन चुका है। नवरात्र और काली पूजा के समय यहां लगने वाला मेला ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक समरसता को नई ऊर्जा प्रदान करता है। मंदिर की ऐतिहासिक बनावट, प्राचीन वटवृक्ष और शांत परिवेश श्रद्धालुओं को गहन मानसिक शांति की अनुभूति कराते हैं। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि यदि इस ऐतिहासिक सिद्धपीठ को पर्यटन विभाग के मानचित्र पर प्रमुखता से विकसित किया जाए, तो यह समूचे कोसी क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन का एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

 

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Triveniganj में अवैध विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर सील, संचालक फरार

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त्रिवेणीगंज (सुपौल): सुपौल जिले के Triveniganj  अनुमंडल क्षेत्र में अवैध रूप से कुकुरमुत्ते की तरह फल-फूल रहे निजी क्लीनिकों और पैथोलॉजी-अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों के विरुद्ध स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने अपना कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।

इसी क्रम में मंगलवार की शाम अनुमंडलीय अस्पताल चौक स्थित ‘विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर’ पर औचक छापेमारी की गई। जांच के दौरान केंद्र संचालन से जुड़ा कोई भी वैध निबंधन (रजिस्ट्रेशन) अथवा अनुमति पत्र प्रस्तुत नहीं किया जा सका। मौके से मुख्य संचालक भी फरार पाया गया, जिसके बाद जांच दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे सेंटर को सील कर दिया।

Triveniganj  Crime: औचक निरीक्षण में न मिले कागजात, न मिले विशेषज्ञ डॉक्टर

मंगलवार देर शाम अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. उमेश कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की एक उच्चस्तरीय टीम ने अस्पताल चौक पर अचानक दबिश दी। इस छापेमारी दल में स्वास्थ्य प्रबंधक एस. अदीब अहमद के साथ स्थानीय पुलिस बल के जवान भी तैनात थे।

जांच टीम के पहुंचते ही अल्ट्रासाउंड केंद्र पर अफरा-तफरी मच गई और मुख्य संचालक मौके से खिसक गया। जांच दल ने जब परिसर में मौजूद संचालक के भाई से पीसीपीएनडीटी (PNDT) एक्ट के तहत अनिवार्य निबंधन, वैध कागजात और योग्यता प्रमाण पत्र मांगे, तो वह कोई भी दस्तावेज दिखाने में असमर्थ रहा। इसके अलावा सेंटर में कोई रेडियोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ चिकित्सक भी उपस्थित नहीं था, जिसके अभाव में अल्ट्रासाउंड जांच का संचालन पूरी तरह गैरकानूनी है।

Triveniganj  News: लंबे समय से चल रहा था खेल, बोर्ड लगाकर हो रहा था गुमराह

स्थानीय सूत्रों के अनुसार विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर काफी समय से अनुमंडलीय अस्पताल के ठीक सामने धड़ल्ले से संचालित किया जा रहा था। बाहर बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर अत्याधुनिक और उच्च स्तरीय जांच सुविधाओं का दावा कर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले भोले-भाले मरीजों को आकर्षित किया जाता था।

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सेंटर नियमों को ताक पर रखकर अप्रशिक्षित कर्मियों के सहारे चलाया जा रहा था। गंभीर अनियमितताओं और मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खुले खिलवाड़ को देखते हुए अधिकारियों ने विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए केंद्र के मुख्य प्रवेश द्वार को सील कर दिया।

उपाधीक्षक का बयान: दर्ज होगी प्राथमिकी, जारी रहेगा अभियान

कार्रवाई के संबंध में अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. उमेश कुमार ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण के दौरान विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर का कोई वैध रिकॉर्ड नहीं मिला। न तो संचालक उपस्थित था और न ही कोई अधिकृत डॉक्टर। प्रथम दृष्टया अवैध पाए जाने पर सेंटर को सील कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की विस्तृत रिपोर्ट वरीय अधिकारियों और सिविल सर्जन को भेजी जा रही है, जिसके आधार पर संबंधित संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

फर्जी क्लीनिक और नर्सिंग होम संचालकों में फैली बेचैनी

स्वास्थ्य विभाग की इस सख्त कार्रवाई के बाद त्रिवेणीगंज और आसपास के इलाकों में अवैध रूप से चल रहे निजी नर्सिंग होम, जांच केंद्रों और झोलाछाप चिकित्सकों में हड़कंप मच गया है। कई संचालक अपनी दुकानों के शटर गिराकर भूमिगत हो गए हैं। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए मांग की है कि यह अभियान केवल सील करने तक सीमित न रहे, बल्कि अवैध स्वास्थ्य माफियाओं के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमे दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए।

 

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Darbhanga के वैज्ञानिक का वैश्विक पटल पर परचम: लगातार तीसरी बार दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल

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Darbhanga के वैज्ञानिक का वैश्विक पटल पर परचम: लगातार तीसरी बार दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल

Darbhanga : मिथिलांचल की उर्वर बौद्धिक धरती ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है। दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड अंतर्गत पैगंबरपुर गांव निवासी डॉ. संतोष कुमार ने वैश्विक विज्ञान जगत में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

अमेरिका के प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और विख्यात शोध प्रकाशक एल्सेवियर द्वारा संयुक्त रूप से जारी दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत (Top 2%) वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में डॉ. संतोष को लगातार तीसरी बार स्थान मिला है। फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी (खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) विषय में उन्हें वैश्विक स्तर पर 652वीं रैंक प्रदान की गई है। उनका अनुसंधान मुख्य रूप से खाद्य सुरक्षा, भंडारण क्षमता के विस्तार और प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्ति दिलाने वाली पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग तकनीकों पर केंद्रित है।

Darbhanga  News: टिकाऊ पैकेजिंग और खाद्य संरक्षण पर गहन अनुसंधान

डॉ. संतोष कुमार वर्तमान में असम स्थित केंद्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईटी), कोकराझार के खाद्य अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वह मई 2011 से इस संस्थान में अध्यापन और उच्चस्तरीय शोध कार्य में सक्रिय हैं। उनका मुख्य शोध कार्य सस्टेनेबल फूड पैकेजिंग, बायोडिग्रेडेबल मैटेरियल्स (जैव-अपघटनीय सामग्री), खाद्य-योग्य (एडिबल) कोटिंग्स और सुरक्षात्मक फिल्मों के विकास पर आधारित है।

डॉ. कुमार की तकनीक का मुख्य उद्देश्य खाद्य उत्पादों की पोषण गुणवत्ता, स्वाद और ताजगी को बिना किसी रासायनिक मिलावट के लंबे समय तक सुरक्षित रखना है। इसके अलावा, वह ‘सक्रिय एवं स्मार्ट पैकेजिंग’ प्रणालियों पर भी काम कर रहे हैं। इस उन्नत तकनीक के जरिए पैकेजिंग का आवरण स्वतः खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और ताजगी के स्तर पर नजर रखने में सक्षम होता है, जिससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन मिल सके।

Darbhanga  news: प्राकृतिक स्रोतों से विकल्प तैयार कर प्लास्टिक प्रदूषण पर चोट

वैज्ञानिक डॉ. संतोष कुमार के शोध में बायोपॉलिमर आधारित संरचनाओं और प्राकृतिक वर्णकों (नेचुरल पिगमेंट्स) का उपयोग प्रमुखता से शामिल है। वह कृषि अवशेषों, प्राकृतिक संसाधनों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों से निकलने वाले उप-उत्पादों (वेस्ट बायोमास) का पुनः उपयोग कर मूल्यवर्धित पैकेजिंग सामग्री तैयार करने की तकनीक विकसित कर रहे हैं।

उनका यह नवाचार एकल-उपयोग वाले हानिकारक प्लास्टिक (सिंगल-यूज प्लास्टिक) के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल वैश्विक स्तर पर होने वाली खाद्य पदार्थों की बर्बादी (फूड वेस्टेज) को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी, बल्कि पैकेजिंग उद्योग से उत्पन्न होने वाले पर्यावरणीय कचरे और कार्बन फुटप्रिंट को घटाकर सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।

पैतृक गांव पैगंबरपुर में हर्ष, युवाओं के लिए बने प्रेरणा

जमादार साह के पुत्र डॉ. संतोष कुमार के एक ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्वस्तरीय वैज्ञानिकों की कतार में खड़े होने पर उनके पैतृक गांव पैगंबरपुर सहित समूचे दरभंगा जिले में गर्व का माहौल है। अपनी इस उपलब्धि पर उन्होंने अपने माता-पिता, गुरुजनों, शोधार्थियों और छात्रों का आभार जताया। शिक्षाविदों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार तीसरी बार अंतरराष्ट्रीय मानक सूची में शामिल होकर डॉ. कुमार ने यह साबित कर दिया है कि लगन और शोध निष्ठा से सुदूर देहात का युवा भी दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकता है। यह उपलब्धि विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए बड़ी प्रेरणा साबित होगी।

 

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