Bihar
Supaul: रूफटॉप सोलर पैनल पर 98 हजार रुपये तक की सब्सिडी, ‘सोलर सेवा सेतु’ कैंप में बंटे चेक
Supaul: केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड मुख्यालय स्थित टीसीपी भवन में बुधवार को एक दिवसीय ‘सोलर सेवा सेतु’ कैंप का आयोजन किया गया।
दानापुर Division के विभिन्न क्षेत्रों में Seva Setu Camp का आयोजन किया गया। Camp में PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के तहत उपभोक्ताओं को आवेदन, Subsidy एवं Solar Panel Installations से संबंधित आवश्यक जानकारी साझा की गई।
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@IPRDBihar https://t.co/SzOJLeigg2— Energy Department Govt. of Bihar (@EnergyBihar) October 7, 2026
विद्युत कार्यपालक अभियंता आलोक रंजन की अध्यक्षता में संपन्न हुए इस जागरूकता एवं सुविधा शिविर का उद्घाटन मुख्य अतिथि सुपौल सांसद दिलेश्वर कामैत और स्थानीय विधायक रामविलास कामत ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस कैंप में बड़ी संख्या में विद्युत उपभोक्ता, ग्रामीण, विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि और सोलर वेंडर शामिल हुए।
Supaul Solar Subsidy: लाभुकों को प्रशस्ति पत्र और चेक वितरण
समारोह के दौरान अतिथियों का स्वागत पाग, शॉल और पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। शिविर में उन उपभोक्ताओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने घरों की छत पर पहले ही रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करा लिया है। जनप्रतिनिधियों ने योजना के सफल क्रियान्वयन के तहत पात्र लाभार्थियों को सब्सिडी के चेक और प्रशस्ति पत्र सौंपे। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को सोलर संयंत्र लगाने के लिए सुलभ ऋण उपलब्ध कराने में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बैंक शाखा प्रबंधकों व कर्मियों को भी प्रशस्ति पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया।
1 किलोवाट पर ₹40,000 और 3 किलोवाट पर ₹98,000 तक का अनुदान
कैंप में मौजूद विद्युत विभाग के तकनीकी अधिकारियों ने उपभोक्ताओं को योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने पर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर भारी सब्सिडी दे रही हैं:
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1 किलोवाट क्षमता: केंद्र सरकार से ₹30,000 और राज्य सरकार से ₹10,000, यानी कुल ₹40,000 की सब्सिडी।
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2 किलोवाट क्षमता: कुल ₹80,000 की सब्सिडी का प्रावधान।
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3 किलोवाट क्षमता: कुल मिलाकर ₹98,000 तक की अधिकतम सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सब्सिडी की यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में अंतरित की जाती है, जिससे संयंत्र लगाने की लागत काफी कम हो जाती है।
बिजली बिल से मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण: सांसद व विधायक
उपभोक्ताओं को संबोधित करते हुए सांसद दिलेश्वर कामैत ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। अपनी छत पर सोलर प्लांट लगाने से न केवल भारी-भरकम बिजली बिल से मुक्ति मिलेगी, बल्कि यह पर्यावरण अनुकूल स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा देगा।
वहीं, विधायक रामविलास कामत ने लोगों से इस सरकारी योजना का बढ़-चढ़कर लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब घरों में सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन होगा, तो पारंपरिक बिजली ग्रिड पर दबाव कम होगा और बची हुई बिजली का उपयोग ग्रामीण कृषि पंपसेटों और स्थानीय कुटीर उद्योगों के संचालन में बेहतर ढंग से किया जा सकेगा।
ऑन-द-स्पॉट आवेदन और बैंक ऋण की जानकारी
शिविर स्थल पर उपभोक्ताओं के लिए ऑन-द-स्पॉट पंजीकरण और आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई। सोलर वेंडरों ने विभिन्न कंपनियों के पैनल, इनवर्टर और नेट मीटरिंग की कार्यप्रणाली समझाई। वहीं, बैंक प्रतिनिधियों ने बताया कि रूफटॉप सोलर के लिए बेहद आसान शर्तों और रियायती ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसकी मासिक किस्त बिजली बिल में होने वाली बचत से ही पूरी हो जाती है।
बड़ी संख्या में अधिकारी व स्थानीय लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में सहायक विद्युत कार्यपालक अभियंता आकाश कुमार, प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि, प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष, कटैया के कनीय अभियंता (जेई) विकास कुमार, पिपरा के जेई मनोज कुमार और किशनपुर की जेई हिमानी रंजन सहित बड़ी संख्या में विद्युत कर्मी और ग्रामीण उपभोक्ता उपस्थित रहे।
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Supaul: थुमहा में प्रखंड स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट का आगाज: राघोपुर ने किशनपुर को 7 विकेट से रौंदा
Supaul: सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड क्षेत्र स्थित थुमहा उच्च विद्यालय के खेल मैदान में मंगलवार से बहुप्रतीक्षित प्रखंड स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट का रंगारंग आगाज हुआ। पहले ही मुकाबले में दर्शकों को रोमांचक खेल देखने को मिला, जहां राघोपुर की टीम ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए किशनपुर की टीम को 7 विकेट से करारी शिकस्त दी। मैच में राघोपुर के गेंदबाज दिलखुश की घातक गेंदबाजी और बल्लेबाज मनीष की आतिशी पारी ने मैच को पूरी तरह एकतरफा बना दिया।
Supaul: जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से किया उद्घाटन
टूर्नामेंट का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि स्थानीय विधायक रामविलास कामत, स्थानीय मुखिया दिनेश चौधरी, पैक्स अध्यक्ष बद्रीनारायण चौधरी, पूर्व मुखिया रामप्रसाद मंडल और हुसैन साहब ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। इस अवसर पर खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए विधायक रामविलास कामत ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने का बेहतरीन मंच मिलता है। उन्होंने खिलाड़ियों से खेल भावना और अनुशासन के साथ खेलने का आह्वान किया।
110 रनों पर ढेर हुई किशनपुर की टीम
उद्घाटन मैच में राघोपुर की टीम के कप्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी किशनपुर की शुरुआत बेहद लड़खड़ाती रही। राघोपुर के तेज गेंदबाजों की कसी हुई लाइन-लेंथ के सामने किशनपुर के बल्लेबाज खुलकर शॉट नहीं खेल सके और नियमित अंतराल पर अपने विकेट गंवाते चले गए। पूरी टीम 17.1 ओवरों में मात्र 110 रनों के मामूली स्कोर पर सिमट गई।
दिलखुश के पांच विकेट और मनीष का बल्ला गरजा
किशनपुर को सस्ते में समेटने में राघोपुर के गेंदबाज दिलखुश ने मुख्य भूमिका निभाई। दिलखुश ने शानदार गेंदबाजी करते हुए विपक्षी टीम के 5 महत्वपूर्ण बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया।
इसके बाद 111 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी राघोपुर की टीम ने शुरू से ही आक्रामक तेवर अपनाए। सलामी बल्लेबाज मनीष ने मैदान के चारों ओर चौकों-छक्कों की बरसात करते हुए महज 17 गेंदों पर 45 रनों की धुआंधार पारी खेली। मनीष के इस तूफान की बदौलत राघोपुर की टीम ने मात्र 9.1 ओवरों में 3 विकेट के नुकसान पर जीत का लक्ष्य हासिल कर लिया। घातक गेंदबाजी के लिए दिलखुश को ‘मैन ऑफ द मैच’ के पुरस्कार से नवाजा गया।
स्थानीय युवाओं के प्रयास से सजा खेल का मंच
इस ग्रामीण खेल महोत्सव को सफल बनाने में स्थानीय युवाओं ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया। मैच के दौरान कमेंट्री बॉक्स में संजय कुमार और कैलाश कुमार ने अपनी रोचक कमेंट्री से दर्शकों का उत्साह बढ़ाया। वहीं, मैदान पर अंपायर की निष्पक्ष भूमिका नीरज कुशवाहा और मयंक मणि ने निभाई। स्कोरिंग की जिम्मेदारी उपेंद्र मेहता और सोनू ने बखूबी संभाली।
प्रतियोगिता के सफल आयोजन में कैलाश कुमार, अभिषेक कुमार, आयुष कुमार सहित खेल समिति के कई युवाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मैच देखने के लिए मैदान के चारों ओर बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और ग्रामीण मौजूद रहे।
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Madhepura: बदनामी के डर से पिता ने की नाबालिग बेटी की गला काटकर हत्या, बोरी में बंद कर नदी में फेंका शव
Madhepura: बिहार के मधेपुरा जिले में झूठी शान (ऑनर किलिंग) और सामाजिक बदनामी के खौफ में एक पिता द्वारा अपनी ही नाबालिग बेटी की नृशंस हत्या करने का रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है।
शंकरपुर थाना क्षेत्र के गौररहा गांव में पिता ने सोते समय अपनी नाबालिग बेटी की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी और शव को बोरी में भरकर नदी में प्रवाहित कर दिया। वारदात के बाद शातिर पिता ने थाने पहुंचकर बेटी के गायब होने की झूठी शिकायत दर्ज करा दी। हालांकि, पुलिसिया तफ्तीश और परिवार के सदस्यों के बयानों में विरोधाभास के बाद पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर इस खौफनाक हत्याकांड का पर्दाफाश कर दिया है।
Madhepura News: खुद थाने जाकर दर्ज कराई थी गुमशुदगी की झूठी रिपोर्ट
पुलिस के अनुसार, गौररहा वार्ड नंबर 4 निवासी 35 वर्षीय दिनेश कुमार ने 11 अक्टूबर को शंकरपुर थाने में एक लिखित आवेदन दिया था। उसने दावा किया था कि उसकी नाबालिग पुत्री घास काटने के लिए खेत की ओर गई थी और उसके बाद से घर नहीं लौटी। पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर गुमशुदगी की सनहा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। हालांकि, जब जांच अधिकारी घर पहुंचे, तो परिजनों के बयानों में गहरा विरोधाभास दिखा और पिता के हाव-भाव संदिग्ध पाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी) के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई के लिए एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया।
Madhepura news: छोटी बहन की गवाही ने खोली पिता के गुनाहों की पोल
विशेष जांच टीम ने जब मृतका की मां और उसकी छोटी बहन से एकांत में गहन पूछताछ की, तो पूरे मामले की परतें खुल गईं। मासूम छोटी बहन ने पुलिस को कांपते हुए बताया कि उसकी बड़ी बहन किसी दरिंदे का नहीं, बल्कि खुद उनके पिता के वहशीपन का शिकार हुई है। बहन ने खुलासा किया कि उसने अपनी आंखों से पिता को यह खौफनाक कृत्य करते देखा था। इस बयान के बाद पुलिस ने दिनेश कुमार को हिरासत में लेकर जब कड़ाई से पूछताछ की, तो वह टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
प्रेम-प्रसंग की बदनामी के डर से रची हत्या की साजिश
पूछताछ के दौरान आरोपी पिता ने बताया कि उसकी बेटी का पड़ोस के ही एक युवक के साथ प्रेम-प्रसंग चल रहा था, जिसे लेकर पूरे गांव और समाज में बातें होने लगी थीं। बदनामी के डर और आक्रोश में उसने बेटी को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया। आरोपी के स्वीकारोक्ति बयान के मुताबिक, 7-8 अक्टूबर की दरमियानी रात जब किशोरी गहरी नींद में सो रही थी, तब उसने दबिया (धारदार हथियार) से उसके गले पर ताबड़तोड़ वार कर उसकी जान ले ली।
बोरी में शव भरकर नदी में फेंका, साक्ष्य मिटाने के लिए जलाए कपड़े
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने खून से लथपथ शव को जूट की बोरी में ठूंसकर बांध दिया। इसके बाद वह शव को अपनी मोटरसाइकिल पर लादकर ले गया और बहरारी नदी के गहरे पानी में फेंक आया। इतना ही नहीं, सबूत मिटाने के लिए उसने खून से सने बिछावन, चादर, मृतका के वस्त्र और अपने कपड़े तक जला दिए। वारदात की चश्मदीद बनी अपनी छोटी बेटी को उसने जान से मारने की धमकी देकर चुप रहने को कहा और उसे ननिहाल भेज दिया था।
आरोपी जेल भेजा गया, नदी में गोताखोरों का सर्च ऑपरेशन जारी
शंकरपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता दिनेश कुमार को गिरफ्तार कर संबंधित धाराओं के तहत न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। वहीं, मृतका के शव और हत्या में प्रयुक्त हथियार (दबिया) की बरामदगी के लिए राज्य आपदा प्रबंधन और स्थानीय गोताखोरों की मदद से बहरारी नदी में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। पुलिस यह भी तफ्तीश कर रही है कि साक्ष्य छिपाने या शव फेंकने में आरोपी का साथ किसी अन्य व्यक्ति ने दिया था या नहीं। इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश करने में शंकरपुर थानाध्यक्ष राजीव कुमार, अवर निरीक्षक शैलेंद्र कुमार रंजन और जिला आसूचना इकाई (DIU) की टीम ने प्रमुख भूमिका निभाई।
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कश्मीर में लहलहाएगी Mithila Makhana की फसल: दरभंगा के वैज्ञानिक देंगे तकनीकी सहयोग
दरभंगा: जीआई टैग प्राप्त ‘Mithila Makhana’ अब अपनी पारंपरिक भौगोलिक सीमाओं से निकलकर कश्मीर घाटी के जलस्रोतों में अपनी जड़ें जमाने जा रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के दरभंगा स्थित राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र और शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) के बीच हुए रणनीतिक शोध समझौते के तहत इस योजना पर जमीनी काम तेज हो गया है।
इस वैज्ञानिक सहयोग का मुख्य उद्देश्य कश्मीर के स्थानीय कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र में मखाने की व्यावसायिक खेती की संभावनाएं तलाशना और वहां के किसानों को उन्नत उत्पादन व प्रसंस्करण तकनीकों में दक्ष बनाना है।
Mithila Makhana: दरभंगा से कश्मीर तक पहुंचेगी आधुनिक जलीय कृषि तकनीक
दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच मखाना, कमल ककड़ी (कमल) और सिंघाड़े जैसी जलीय फसलों के उत्पादन, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) में संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए औपचारिक समझौता हुआ था।
इसी वैज्ञानिक आदान-प्रदान के अंतर्गत अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आई.एस. सिंह ने बांडीपोरा-वन स्थित कृषि विज्ञान केंद्र का दौरा कर स्थानीय कृषि वैज्ञानिकों के साथ तकनीकी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया। योजना के अनुसार, घाटी के उपयुक्त जलजमाव वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां प्रायोगिक खेती के जरिए किसानों को फसल सुरक्षा और पौध प्रबंधन की बारीकियां सिखाई जाएंगी।
Mithila Makhana: नवंबर-दिसंबर में घाटी का दौरा करेगा चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल
जम्मू-कश्मीर कृषि विभाग के विशेष अनुरोध पर राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार के नेतृत्व में वैज्ञानिकों का एक चार सदस्यीय दल आगामी नवंबर-दिसंबर में कश्मीर का विस्तृत दौरा करेगा। यह दल कश्मीर के विभिन्न आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) और शांत जलस्रोतों की मिट्टी व पानी के नमूनों का परीक्षण करेगा। इसके साथ ही स्थानीय किसानों और कृषि प्रसार अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिसमें मखाना रोपण से लेकर कटाई तक की संपूर्ण वैज्ञानिक पद्धति की जानकारी दी जाएगी।
कश्मीर के जलाशयों में परखी जाएगी ‘स्वर्ण वैदेही’ किस्म
इस अनुसंधान परियोजना के केंद्र में दरभंगा अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित मखाने की पहली उन्नत और अधिक उपज देने वाली किस्म स्वर्ण वैदेही है। यह किस्म स्थिर जल, दलदली भूमि और जलभराव वाले क्षेत्रों में बेहतर पैदावार देने के लिए पहचानी जाती है।
हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि मिथिला के समशीतोष्ण वातावरण और कश्मीर की अल्पाइन जलवायु में काफी अंतर है। ऐसे में कश्मीर के न्यूनतम तापमान, सूर्य के प्रकाश की अवधि और पानी की प्रकृति के बीच यह फसल किस प्रकार अनुकूलन करती है, इसका अंतिम परिणाम वहां किए जाने वाले प्रायोगिक परीक्षणों और फील्ड प्रदर्शन के बाद ही सामने आएगा।
देश के 10 राज्यों तक मखाना तकनीक का विस्तार
बिहार वर्तमान में देश का 85 प्रतिशत से अधिक मखाना उत्पादन करता है, जिसमें दरभंगा अग्रणी केंद्र रहा है। अब राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र इस तकनीकी अनुभव को देश के 10 विभिन्न गैर-पारंपरिक राज्यों तक पहुंचाने के अभियान में जुटा है।
यदि कश्मीर की झीलों और जलजमाव वाले क्षेत्रों में मखाने की खेती व्यावहारिक रूप से सफल साबित होती है, तो यह कश्मीरी किसानों के लिए पारंपरिक फसलों से इतर आजीविका और फसल विविधीकरण का एक अत्यंत लाभकारी व टिकाऊ विकल्प बन सकता है।
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