Bihar
Anant Singh की बेटी की शादी: सबको न्योता, सिर्फ नीरज कुमार बाहर
पटना/बाढ़: मोकामा के पूर्व बाहुबली विधायक Anant Singh अपनी छोटी बेटी शिवांगी सिंह की शादी को लेकर एक बार फिर बिहार के सियासी और सामाजिक हलकों में जबरदस्त चर्चा का विषय बने हुए हैं।
आगामी 25 नवंबर को बाढ़ अनुमंडल स्थित उनके पैतृक गांव लदमा (नदवां) में होने वाले इस भव्य विवाह समारोह की तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। इस बीच शादी के अतिथियों की सूची को लेकर हुए खुलासे ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। इस बहुचर्चित Anant Singh Daughter Marriage में पक्ष-विपक्ष के दिग्गज नेताओं—मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और जन सुराज के प्रशांत किशोर तक—को आमंत्रित किया जा रहा है, लेकिन जदयू के वरिष्ठ नेता व विधान पार्षद नीरज कुमार को न्योते की फेहरिस्त से साफ तौर पर बाहर रखा गया है।
सिर्फ नीरज कुमार को छोड़कर सबको मिलेगा न्योता: Anant Singh
हाल ही में एक मीडिया साक्षात्कार के दौरान जब पत्रकारों ने अनंत सिंह से पारिवारिक वैवाहिक समारोह में राजनीतिक हस्तियों को बुलाने के संबंध में सवाल किया, तो उन्होंने अपने चिरपरिचित बेबाक अंदाज में दो टूक जवाब दिया।
अनंत सिंह ने कहा कि वे बेटी की शादी में अपने तमाम राजनीतिक विरोधियों और बिहार के सभी प्रमुख नेताओं को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित करेंगे, लेकिन इस सूची में जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार का नाम कतई शामिल नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीरज कुमार के साथ उनका टकराव केवल सतही राजनीतिक नहीं, बल्कि गहरा व्यक्तिगत और नीतिगत है। इसलिए वे उन्हें अपने मांगलिक आयोजन की दहलीज पर देखना पसंद नहीं करेंगे।
Anant Singh: पटना स्नातक चुनाव और निष्कासन से और बढ़ी तल्खी
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक अदावत कोई नई नहीं है, किंतु हालिया पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव के दौरान यह खींचतान चरम पर पहुंच गई थी। चुनाव में जदयू ने नीरज कुमार को अधिकृत प्रत्याशी बनाया था, लेकिन अनंत सिंह ने पार्टी लाइन से बगावत करते हुए जन सुराज समर्थित प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में खुलकर प्रचार किया।
चुनाव परिणामों में नीरज कुमार ने जीत दर्ज की और अनंत सिंह को हार का सामना करना पड़ा। इस खुली बगावत को अनुशासनहीनता मानते हुए जदयू शीर्ष नेतृत्व ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह और उनकी धर्मपत्नी (पूर्व विधायक नीलम देवी) को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया। इस राजनीतिक झटके के बाद दोनों नेताओं के बीच तल्खी और अधिक बढ़ गई, जो अब पारिवारिक आयोजन के बहिष्कार के रूप में खुलकर सामने आई है।
नीतीश कुमार मेरे नेता हैं: Anant Singh
नीरज कुमार पर कड़ा रुख अपनाने के बावजूद अनंत सिंह ने राज्य के अन्य शीर्ष राजनीतिक दिग्गजों को लेकर लचीला और सम्मानजनक रुख दिखाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति उनकी निष्ठा और सम्मान पूर्ववत कायम है और वे आज भी उन्हें अपना नेता मानते हैं।
शादी समारोह के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राज्यसभा सांसद संजय झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, राजद नेता तेजस्वी यादव और जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर को सादर आमंत्रित किया जा रहा है। अनंत सिंह का कहना है कि वे पारिवारिक कार्यक्रमों में दलों की सीमाओं को नहीं देखते और सभी वरिष्ठ नेताओं का लदमा पहुंचने पर पारंपरिक रीति-रिवाजों से स्वागत किया जाएगा।
जॉर्जिया से एमबीए हैं दामाद, शादी में होगी भव्य घुड़दौड़
अनंत सिंह की पुत्री शिवांगी सिंह का विवाह ऋषिकेश सिंह के साथ तय हुआ है। ऋषिकेश संयुक्त राज्य अमेरिका में कार्यरत हैं और उन्होंने जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी से उच्च व्यावसायिक शिक्षा (एमबीए) पूरी की है। उनके पिता रणविजय सिंह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में कमांडेंट के पद पर सेवारत हैं।
विवाह को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए लदमा में 25 नवंबर की दोपहर 2 से 4 बजे के बीच एक भव्य घुड़दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन रखा गया है, जिसमें देश के कई राज्यों से नामी घुड़सवार और नस्ली घोड़े शिरकत करेंगे। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले को महिंद्रा थार, द्वितीय स्थान पर रहने वाले को मोटरसाइकिल और तृतीय विजेता को स्कूटी पुरस्कार स्वरूप प्रदान की जाएगी।
शादी के ठीक बाद 1 दिसंबर को सरेंडर की कानूनी अनिवार्यता
इस भव्य वैवाहिक आयोजन के बीच अनंत सिंह के सिर पर कानूनी तलवार भी लटक रही है। चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुसार, उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक न्यायालय में अनिवार्य रूप से आत्मसमर्पण (सरेंडर) करना है।
शीर्ष अदालत ने उनकी ओर से बेटी की शादी का हवाला दिए जाने के बाद ही सरेंडर की समयसीमा में यह मोहलत प्रदान की थी। ऐसे में 25 नवंबर को बेटी की विदाई के महज कुछ ही दिनों बाद उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत जेल जाना होगा। यही कारण है कि यह विवाह समारोह पारंपरिक उत्सव, राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और कानूनी घटनाक्रम—तीनों ही दृष्टिकोणों से प्रदेश भर में सुर्खियों में छाया हुआ है।
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