Bihar

दरभंगा की बेटी Bhawana Kanth ने फिर रचा इतिहास: FCL कोर्स पूरा करने वाली देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं

Published

on

दरभंगा: मिथिला की माटी और दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड अंतर्गत बाउर गांव की जांबाज बेटी स्क्वाड्रन लीडर Bhawana Kanth ने भारतीय वायुसेना (IAF) में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित प्रतिष्ठित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (TACDE) से भावना कंठ ने फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। वह इस सबसे चुनौतीपूर्ण और विशिष्ट प्रशिक्षण को पूरा करने वाली देश की पहली महिला फाइटर पायलट बन गई हैं। उनकी इस अभूतपूर्व कामयाबी से पूरे बिहार, विशेषकर मिथिलांचल और उनके पैतृक गांव बाउर में हर्षोल्लास की लहर दौड़ गई है।

Bhawana Kanth 20 हफ्तों की कड़ी ट्रेनिंग के बाद बनीं वायुसेना की ‘टॉप गन’

फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) कोर्स को भारतीय वायुसेना के सबसे कठिन और कठोर युद्धक कार्यक्रमों में गिना जाता है। करीब 20 सप्ताह तक चले इस सघन प्रशिक्षण में अत्यधिक दबाव और विषम परिस्थितियों के बीच जटिल हवाई युद्ध रणनीति, उन्नत वायु रक्षा प्रणाली, अचूक मारक क्षमता और लड़ाकू विमानों के दस्ते के नेतृत्व (कॉम्बैट लीडरशिप) के गुर सिखाए जाते हैं।

इस कोर्स में सफल होने वाले फाइटर पायलटों को वायुसेना की भाषा में ‘टॉप गन’ कहा जाता है। FCL क्वालिफिकेशन हासिल करने के बाद अब स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ युद्ध या किसी भी रणनीतिक अभियान के दौरान पूरे फाइटर फॉर्मेशन का सीधे नेतृत्व करने और युवा पायलटों को कॉम्बैट रणनीति में प्रशिक्षित करने में पूरी तरह सक्षम हो गई हैं। वर्तमान में वह पंजाब स्थित वायुसेना स्टेशन पर तैनात हैं।

बचपन का सपना और ऐतिहासिक उपलब्धियों का सफर

1 दिसंबर 1992 को बेगूसराय के बरौनी में जन्मी भावना कंठ के पिता तेज नारायण कंठ एक इंजीनियर हैं और माता राधा कंठ गृहिणी हैं। भावना ने अपनी स्कूली शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, बरौनी से पूरी करने के बाद बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बी.टेक की डिग्री प्राप्त की थी। उनके पिता के अनुसार, बचपन से ही आसमान में उड़ने की उनकी जिद और सैन्य सेवा में जाने का अटूट संकल्प उन्हें यहां तक लाया।

वर्ष 2015 में जब भारतीय वायुसेना ने महिला अधिकारियों के लिए फाइटर स्ट्रीम के दरवाजे खोले, तब उन्होंने इस अवसर को हाथ से नहीं जाने दिया। कठिन प्रशिक्षण के बाद वर्ष 2016 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने उन्हें वायुसेना में कमीशन प्रदान किया। वह भारत की पहली महिला फाइटर पायलटों के ऐतिहासिक बैच में शामिल हुईं। इसके बाद वर्ष 2019 में दिन के समय लड़ाकू विमान मिग-21 बाइसन से कॉम्बैट मिशन में शामिल होने के लिए योग्य घोषित होने वाली वह देश की पहली महिला पायलट बनीं। वर्ष 2021 के गणतंत्र दिवस समारोह में राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर भारतीय वायुसेना की झांकी का हिस्सा बनने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बनने का गौरव भी उन्हीं के नाम दर्ज है।

देश की बेटियों के लिए प्रेरणा की नई मिसाल

भावना कंठ के छोटे भाई नीलांबर कंठ और बहन तनुजा कंठ भी इंजीनियरिंग क्षेत्र से जुड़े हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर राष्ट्रीय क्षितिज पर अपनी जांबाजी और तकनीकी दक्षता का लोहा मनवाने वाली भावना की यह नई उपलब्धि देश की हर उस बेटी के लिए बड़ी प्रेरणा है जो रक्षा सेवाओं में आसमान छूने का सपना देखती हैं। उनकी इस उपलब्धि पर परिजनों, ग्रामीणों और पूरे मिथिलांचल के प्रबुद्ध नागरिकों ने उन्हें बधाई दी है।

 

यह भी पढ़े: Supaul: SH-91 पर बाइक सवार युवक को टक्कर मार अगवा किया, ग्रामीणों पर 4 राउंड फायरिंग

 

यह भी पढ़े: सीएम हेमंत सोरेन ने अनुसेवक अंगद महतो को दी भावभीनी विदाई

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Trending

Exit mobile version