Bihar
CJP Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग या मतदाता सूची की पारदर्शिता की लड़ाई?
मुंबई: CJP Protest: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान और चुनावी पारदर्शिता को लेकर देश में सियासी तापमान चढ़ गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), आम आदमी पार्टी, वामपंथी छात्र संगठनों आइसा (AISA) व एसएफआई (SFI) ने मुंबई और दिल्ली में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया।
मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में आयोजित सभा में हजारों युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ तुषार गांधी, नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और विशाल ददलानी जैसी जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की पुरजोर मांग उठाई।
CJP Protest: मुंबई से दिल्ली तक प्रदर्शन, जंतर-मंतर पर आंदोलन की चेतावनी
गांधी जयंती के अवसर पर शिवाजी पार्क और दादर इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले पोस्टर लेकर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने ‘राष्ट्रगान’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों के साथ लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया।
सीजेपी नेता अभिजीत दीपके ने सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची में 40 लाख संदिग्ध नाम जोड़े गए थे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त ने तुरंत पद नहीं छोड़ा, तो यह आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश भर की सड़कों पर और तेज किया जाएगा।
CJP Protest: एसआईआर और आयोग की कार्यप्रणाली पर खड़े 5 अहम सवाल
ममता बनर्जी, कांग्रेस और अब सीजेपी के विरोध के बाद यह आंदोलन केवल एक संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि चुनावी तंत्र की विश्वसनीयता से जुड़े 5 गंभीर सवाल सामने ला रहा है:
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नाम काटने और जोड़ने के सटीक आंकड़े: चुनाव आयोग को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान देश और राज्यों में कितने मतदाताओं के नाम काटे गए, कितने नए जोड़े गए और किन कानूनी आधारों पर आपत्तियों का निस्तारण हुआ।
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आयुक्तों के मतभेद की सच्चाई: एक राष्ट्रीय दैनिक में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कथित आपत्तियों का उल्लेख सामने आने के बाद आयोग ने प्रेस नोट में फैसले सर्वसम्मति से होने की बात कही। लेकिन इस विषय पर स्वयं मुख्य निर्वाचन आयुक्त या दोनों आयुक्तों का आधिकारिक और प्रत्यक्ष बयान आना अभी बाकी है।
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सॉफ्टवेयर और डेटा सुरक्षा की पारदर्शिता: चुनाव आयोग द्वारा उपयोग किए जा रहे केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर, डेटाबेस तक पहुंच और संशोधन की तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर जनता के बीच पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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राजनीतिक दलों के आरोपों के तथ्यात्मक साक्ष्य: सीजेपी और अन्य विपक्षी दलों को केवल बयानबाजी तक सीमित न रहकर उन ठोस दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स को भी सार्वजनिक करना चाहिए, जिनके आधार पर वे सीईसी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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कानून-व्यवस्था और भविष्य की रणनीति: जंतर-मंतर और राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा के बीच आयोजकों को यह स्पष्ट करना होगा कि वे लोकतांत्रिक मर्यादा, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और पुलिस अनुमति के नियमों का पालन किस प्रकार सुनिश्चित करेंगे।
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