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Darbhanga: बिरौल के प्रथम हॉस्पिटल में मोतियाबिंद का मुफ्त ऑपरेशन, सांसद गोपाल जी ठाकुर ने किया पौधरोपण

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Darbhanga: बिरौल के प्रथम हॉस्पिटल में मोतियाबिंद का मुफ्त ऑपरेशन, सांसद गोपाल जी ठाकुर ने किया पौधरोपण

Darbhanga: ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ कराने के उद्देश्य से दरभंगा जिले के बिरौल स्थित प्रथम हॉस्पिटल मल्टी स्पेशलिटी सेंटर में नि:शुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर का आयोजन किया गया।

सुपौल बाजार-डुमरी रोड पर स्थित इस चिकित्सा केंद्र में ‘सेवा संकल्प एवं समर्पण पखवाड़ा’ के तहत बड़ी संख्या में पहुंचे जरूरतमंद मरीजों का सफल ऑपरेशन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दरभंगा के सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर उपस्थित रहे। इस अवसर पर सांसद ने अस्पताल परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश भी दिया।

Darbhanga: आयुष्मान कार्ड के तहत नि:शुल्क सर्जरी व नेत्र जांच

अस्पताल में आयोजित विशेष चिकित्सा शिविर के दौरान केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वृद्ध मरीजों का पूरी तरह मुफ्त मोतियाबिंद ऑपरेशन संपन्न कराया गया। ऑपरेशन से पूर्व नेत्र रोग विशेषज्ञों द्वारा मरीजों की आंखों की गहन जांच, दृष्टि परीक्षण, रक्तचाप और शुगर की जांच की गई। जिन मरीजों में मोतियाबिंद परिपक्व पाया गया, उनकी आधुनिक फेको विधि और लेंस प्रत्यारोपण तकनीक से सुरक्षित सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद मरीजों को आवश्यक दवाएं, सुरक्षा चश्मे और देखरेख से जुड़े परामर्श भी नि:शुल्क प्रदान किए गए।

Darbhanga: ग्रामीण क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा सराहनीय: सांसद

सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों, ऑपरेशन थिएटर और जांच कक्षों का निरीक्षण कर चिकित्सा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों से बातचीत कर मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली।

समारोह को संबोधित करते हुए सांसद ने कहा कि सुदूर देहाती इलाकों में अत्याधुनिक संसाधनों से युक्त अस्पताल का संचालन और वहां विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराना अत्यंत सराहनीय पहल है। उन्होंने रेखांकित किया कि आयुष्मान कार्ड योजना आज देश के करोड़ों गरीबों के लिए वरदान साबित हुई है। इस कार्ड के माध्यम से निर्धन तबके के लोग बिना किसी आर्थिक चिंता के बड़े और महंगे ऑपरेशन आसानी से करा पा रहे हैं। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन की इस सेवा भावना की सराहना की।

घर के पास बेहतर इलाज उपलब्ध कराना मुख्य ध्येय

अस्पताल के संस्थापक डॉ. राजेश झा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान के विजन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अक्सर ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के मरीजों को मोतियाबिंद या अन्य गंभीर बीमारियों के ऑपरेशन के लिए दरभंगा शहर, पटना या अन्य बड़े महानगरों की दौड़ लगानी पड़ती है, जिससे उन पर भारी वित्तीय और मानसिक बोझ पड़ता है।

डॉ. झा ने कहा कि अस्पताल का प्राथमिक संकल्प ग्रामीणों को उनके घर के नजदीक ही महानगरों जैसी विश्वस्तरीय और पारदर्शी चिकित्सा सुविधा देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयुष्मान योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए मुफ्त उपचार और शल्य चिकित्सा का यह अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा।

प्रमुख जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता रहे मौजूद

इस सेवा कार्यक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष विनय पासवान, रामगोविंद ठाकुर, जिला महामंत्री शत्रुघ्न सहनी, प्रदीप प्रधान सहित स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता, प्रबुद्ध नागरिक और अस्पताल के चिकित्सक व पैरामेडिकल कर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने ग्रामीण स्वास्थ्य के क्षेत्र में इस प्रयास की सराहना की।

 

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कश्मीर में लहलहाएगी Mithila Makhana की फसल: दरभंगा के वैज्ञानिक देंगे तकनीकी सहयोग

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Mithila Makhana

दरभंगा: जीआई टैग प्राप्त ‘Mithila Makhana’ अब अपनी पारंपरिक भौगोलिक सीमाओं से निकलकर कश्मीर घाटी के जलस्रोतों में अपनी जड़ें जमाने जा रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के दरभंगा स्थित राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र और शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) के बीच हुए रणनीतिक शोध समझौते के तहत इस योजना पर जमीनी काम तेज हो गया है।

इस वैज्ञानिक सहयोग का मुख्य उद्देश्य कश्मीर के स्थानीय कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र में मखाने की व्यावसायिक खेती की संभावनाएं तलाशना और वहां के किसानों को उन्नत उत्पादन व प्रसंस्करण तकनीकों में दक्ष बनाना है।

Mithila Makhana: दरभंगा से कश्मीर तक पहुंचेगी आधुनिक जलीय कृषि तकनीक

दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच मखाना, कमल ककड़ी (कमल) और सिंघाड़े जैसी जलीय फसलों के उत्पादन, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) में संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए औपचारिक समझौता हुआ था।

इसी वैज्ञानिक आदान-प्रदान के अंतर्गत अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आई.एस. सिंह ने बांडीपोरा-वन स्थित कृषि विज्ञान केंद्र का दौरा कर स्थानीय कृषि वैज्ञानिकों के साथ तकनीकी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया। योजना के अनुसार, घाटी के उपयुक्त जलजमाव वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां प्रायोगिक खेती के जरिए किसानों को फसल सुरक्षा और पौध प्रबंधन की बारीकियां सिखाई जाएंगी।

Mithila Makhana: नवंबर-दिसंबर में घाटी का दौरा करेगा चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल

जम्मू-कश्मीर कृषि विभाग के विशेष अनुरोध पर राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार के नेतृत्व में वैज्ञानिकों का एक चार सदस्यीय दल आगामी नवंबर-दिसंबर में कश्मीर का विस्तृत दौरा करेगा। यह दल कश्मीर के विभिन्न आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) और शांत जलस्रोतों की मिट्टी व पानी के नमूनों का परीक्षण करेगा। इसके साथ ही स्थानीय किसानों और कृषि प्रसार अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिसमें मखाना रोपण से लेकर कटाई तक की संपूर्ण वैज्ञानिक पद्धति की जानकारी दी जाएगी।

कश्मीर के जलाशयों में परखी जाएगी ‘स्वर्ण वैदेही’ किस्म

इस अनुसंधान परियोजना के केंद्र में दरभंगा अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित मखाने की पहली उन्नत और अधिक उपज देने वाली किस्म स्वर्ण वैदेही है। यह किस्म स्थिर जल, दलदली भूमि और जलभराव वाले क्षेत्रों में बेहतर पैदावार देने के लिए पहचानी जाती है।

हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि मिथिला के समशीतोष्ण वातावरण और कश्मीर की अल्पाइन जलवायु में काफी अंतर है। ऐसे में कश्मीर के न्यूनतम तापमान, सूर्य के प्रकाश की अवधि और पानी की प्रकृति के बीच यह फसल किस प्रकार अनुकूलन करती है, इसका अंतिम परिणाम वहां किए जाने वाले प्रायोगिक परीक्षणों और फील्ड प्रदर्शन के बाद ही सामने आएगा।

देश के 10 राज्यों तक मखाना तकनीक का विस्तार

बिहार वर्तमान में देश का 85 प्रतिशत से अधिक मखाना उत्पादन करता है, जिसमें दरभंगा अग्रणी केंद्र रहा है। अब राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र इस तकनीकी अनुभव को देश के 10 विभिन्न गैर-पारंपरिक राज्यों तक पहुंचाने के अभियान में जुटा है।

यदि कश्मीर की झीलों और जलजमाव वाले क्षेत्रों में मखाने की खेती व्यावहारिक रूप से सफल साबित होती है, तो यह कश्मीरी किसानों के लिए पारंपरिक फसलों से इतर आजीविका और फसल विविधीकरण का एक अत्यंत लाभकारी व टिकाऊ विकल्प बन सकता है।

 

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Darbhanga Crime News: बिरौल के चमेली देवी हत्याकांड में पुलिस की कार्रवाई तेज, आधा दर्जन संदिग्ध हिरासत में; कई ठिकानों पर छापेमारी

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Darbhanga Crime News

Darbhanga Crime News: दरभंगा जिले के बिरौल थाना क्षेत्र अंतर्गत सहसराम गांव में हुई चमेली देवी की नृशंस हत्या के मामले में पुलिस प्रशासन ने तफ्तीश तेज कर दी है। गला रेतकर की गई इस वारदात के बाद इलाके में भारी आक्रोश और तनाव का माहौल है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ग्रामीण एसपी साक्षी कुमारी ने खुद कमान संभाल ली है और पुलिस अधिकारियों को जल्द से जल्द अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

ग्रामीण एसपी ने बिरौल थाने पहुंचकर की समीक्षा, एसआईटी गठित: Darbhanga Crime News

वारदात की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण पुलिस अधीक्षक साक्षी कुमारी ने बिरौल थाने का दौरा किया और जांच दल के साथ समीक्षा बैठक की।

  • विशेष जांच दल (SIT): हत्याकांड के खुलासे के लिए एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया है।

  • रणनीति और निर्देश: ग्रामीण एसपी ने अधिकारियों को वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाने तथा सभी संभावित पहलुओं की गहन पड़ताल करने का निर्देश दिया।

लूट के दौरान पहचान उजागर होने पर हत्या की आशंका: Darbhanga Crime News

पुलिस की शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आ रही है कि वारदात के पीछे लूट या चोरी की मंशा हो सकती है:

  • आशंका जताई जा रही है कि अपराधी चोरी की नीयत से घर में दाखिल हुए थे।

  • आहट होने पर चमेली देवी की नींद खुल गई और उन्होंने किसी अपराधी को पहचान लिया।

  • पहचान उजागर होने के डर से अपराधियों ने धारदार हथियार से गला रेतकर उनकी हत्या कर दी। हालांकि, पुलिस का कहना है कि यह केवल प्रारंभिक बिंदु है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

वैज्ञानिक व फोरेंसिक जांच, आधा दर्जन से अधिक संदिग्धों से पूछताछ: Darbhanga Crime News

एसआईटी मामले की तह तक पहुंचने के लिए हर संभव तकनीकी साधन का सहारा ले रही है:

  • तकनीकी साक्ष्य: घटना स्थल के आसपास के मोबाइल टावर डंप डेटा और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच की जा रही है।

  • फोरेंसिक टीम: घटनास्थल से उठाए गए फिंगरप्रिंट और फोरेंसिक नमूनों का विश्लेषण किया जा रहा है।

  • हिरासत और छापेमारी: शनिवार रात से लेकर रविवार दोपहर तक आधा दर्जन से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की गई है। उनसे मिले इनपुट के आधार पर संदिग्ध ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।

पुलिस का दावा: अहम सुराग हाथ लगे, जल्द होगा खुलासा

बिरौल थानाध्यक्ष चंद्रमणि ने बताया कि जांच दल को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस टीम संदिग्धों के आपराधिक इतिहास और घटना में उनकी संलिप्तता की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि मामले का पर्दाफाश कर मुख्य अभियुक्तों को जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

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दरभंगा की बेटी Bhawana Kanth ने फिर रचा इतिहास: FCL कोर्स पूरा करने वाली देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं

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दरभंगा की बेटी Bhawana Kanth ने फिर रचा इतिहास

दरभंगा: मिथिला की माटी और दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड अंतर्गत बाउर गांव की जांबाज बेटी स्क्वाड्रन लीडर Bhawana Kanth ने भारतीय वायुसेना (IAF) में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित प्रतिष्ठित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (TACDE) से भावना कंठ ने फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। वह इस सबसे चुनौतीपूर्ण और विशिष्ट प्रशिक्षण को पूरा करने वाली देश की पहली महिला फाइटर पायलट बन गई हैं। उनकी इस अभूतपूर्व कामयाबी से पूरे बिहार, विशेषकर मिथिलांचल और उनके पैतृक गांव बाउर में हर्षोल्लास की लहर दौड़ गई है।

Bhawana Kanth 20 हफ्तों की कड़ी ट्रेनिंग के बाद बनीं वायुसेना की ‘टॉप गन’

फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) कोर्स को भारतीय वायुसेना के सबसे कठिन और कठोर युद्धक कार्यक्रमों में गिना जाता है। करीब 20 सप्ताह तक चले इस सघन प्रशिक्षण में अत्यधिक दबाव और विषम परिस्थितियों के बीच जटिल हवाई युद्ध रणनीति, उन्नत वायु रक्षा प्रणाली, अचूक मारक क्षमता और लड़ाकू विमानों के दस्ते के नेतृत्व (कॉम्बैट लीडरशिप) के गुर सिखाए जाते हैं।

इस कोर्स में सफल होने वाले फाइटर पायलटों को वायुसेना की भाषा में ‘टॉप गन’ कहा जाता है। FCL क्वालिफिकेशन हासिल करने के बाद अब स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ युद्ध या किसी भी रणनीतिक अभियान के दौरान पूरे फाइटर फॉर्मेशन का सीधे नेतृत्व करने और युवा पायलटों को कॉम्बैट रणनीति में प्रशिक्षित करने में पूरी तरह सक्षम हो गई हैं। वर्तमान में वह पंजाब स्थित वायुसेना स्टेशन पर तैनात हैं।

बचपन का सपना और ऐतिहासिक उपलब्धियों का सफर

1 दिसंबर 1992 को बेगूसराय के बरौनी में जन्मी भावना कंठ के पिता तेज नारायण कंठ एक इंजीनियर हैं और माता राधा कंठ गृहिणी हैं। भावना ने अपनी स्कूली शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, बरौनी से पूरी करने के बाद बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बी.टेक की डिग्री प्राप्त की थी। उनके पिता के अनुसार, बचपन से ही आसमान में उड़ने की उनकी जिद और सैन्य सेवा में जाने का अटूट संकल्प उन्हें यहां तक लाया।

वर्ष 2015 में जब भारतीय वायुसेना ने महिला अधिकारियों के लिए फाइटर स्ट्रीम के दरवाजे खोले, तब उन्होंने इस अवसर को हाथ से नहीं जाने दिया। कठिन प्रशिक्षण के बाद वर्ष 2016 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने उन्हें वायुसेना में कमीशन प्रदान किया। वह भारत की पहली महिला फाइटर पायलटों के ऐतिहासिक बैच में शामिल हुईं। इसके बाद वर्ष 2019 में दिन के समय लड़ाकू विमान मिग-21 बाइसन से कॉम्बैट मिशन में शामिल होने के लिए योग्य घोषित होने वाली वह देश की पहली महिला पायलट बनीं। वर्ष 2021 के गणतंत्र दिवस समारोह में राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर भारतीय वायुसेना की झांकी का हिस्सा बनने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बनने का गौरव भी उन्हीं के नाम दर्ज है।

देश की बेटियों के लिए प्रेरणा की नई मिसाल

भावना कंठ के छोटे भाई नीलांबर कंठ और बहन तनुजा कंठ भी इंजीनियरिंग क्षेत्र से जुड़े हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर राष्ट्रीय क्षितिज पर अपनी जांबाजी और तकनीकी दक्षता का लोहा मनवाने वाली भावना की यह नई उपलब्धि देश की हर उस बेटी के लिए बड़ी प्रेरणा है जो रक्षा सेवाओं में आसमान छूने का सपना देखती हैं। उनकी इस उपलब्धि पर परिजनों, ग्रामीणों और पूरे मिथिलांचल के प्रबुद्ध नागरिकों ने उन्हें बधाई दी है।

 

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