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 Darbhanga News: दरभंगा को बिहार का नंबर वन जिला बनाने की कवायद, प्रभारी मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र ने अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

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Darbhanga News: दरभंगा को विकास के हर मोर्चे पर सुसज्जित कर बिहार का शीर्ष जिला बनाना सरकार का मुख्य संकल्प है। विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह सख्त संदेश प्रदेश के पथ निर्माण मंत्री सह जिले के प्रभारी मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र ने समाहरणालय सभागार में आयोजित जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की उच्च स्तरीय बैठक में दिया। उन्होंने अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि सभी पदाधिकारी अपने दायित्वों का गंभीरतापूर्वक निर्वहन करें।

10 दिनों में चालू होंगे कृषि फीडर, खाद की कालाबाजारी पर रुकेगी लगाम:  Darbhanga News

बैठक में किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। जाले विधायक के प्रस्ताव पर संज्ञान लेते हुए प्रभारी मंत्री ने बिजली विभाग को 10 दिनों के भीतर कृषि फीडर चालू करने का कड़ा निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जहां पोल लग चुके हैं, वहां तुरंत तार बिछाकर सिंचाई के लिए बिजली आपूर्ति बहाल की जाए। इसके साथ ही, उर्वरकों की निर्धारित दर से अधिक वसूली (कालाबाजारी) की शिकायतों पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रभारी मंत्री ने जिलाधिकारी को रैक प्वाइंट्स और दुकानों का औचक निरीक्षण करने तथा दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

दरभंगा एम्स और डीएमसीएच सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के काम में आएगी तेजी:  Darbhanga News

बैठक के दौरान जिले की बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर गहन मंथन हुआ:

  • दरभंगा एम्स: सांसद डा. गोपालजी ठाकुर ने केंद्र सरकार द्वारा आवंटित राशि का जिक्र करते हुए एम्स के निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग उठाई।

  • DMCH सेवाएं: डीएमसीएच सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में इंडोर सेवा अविलंब शुरू करने और पूरे अस्पताल परिसर को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त करने पर बल दिया गया।

  • शहरी विकास: शहर में बुडको (BUIDCO) की परियोजनाओं और आरओबी (ROB) निर्माण कार्य की रफ्तार बढ़ाने के भी निर्देश जारी किए गए।

प्रशासनिक पारदर्शिता और ग्रामीण पेयजल संकट पर कड़े कदम:  Darbhanga News

प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए अब सभी पंचायत सरकार भवनों में कर्मियों की नियमित रोस्टर उपस्थिति और बायोमेट्रिक अटेंडेंस प्रणाली लागू करने का निर्देश दिया गया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। वहीं, ग्रामीण इलाकों में गहराते पेयजल संकट को दूर करने के लिए पीएचईडी (PHED) विभाग को ईटावा, शिवनगर, पोहदी सहित विभिन्न जलमीनारों की नियमित सफाई करने तथा पूर्ण हो चुके बोरिंग सिस्टम को जल्द से जल्द चालू करने को कहा गया।

इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बनी सहमति:  Darbhanga News

बैठक में विकास के कई अन्य पहलुओं पर भी विस्तृत चर्चा हुई और सहमति बनी, जिनमें प्रमुख हैं:

  • खाद्य आपूर्ति को दुरुस्त करने के लिए सरकारी गोदामों की नियमित जांच।

  • जिले की क्षतिग्रस्त सड़कों की त्वरित मरम्मत।

  • मनरेगा के तहत पोखरों और तालाबों का संरक्षण।

  • स्वच्छता कर्मियों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी कौशल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी जनप्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि प्रभारी मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा। इस महत्वपूर्ण बैठक में मंत्री मदन सहनी, सांसद अशोक कुमार यादव, विधायक जीवेश कुमार और महापौर अंजुम आरा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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Darbhanga के वैज्ञानिक का वैश्विक पटल पर परचम: लगातार तीसरी बार दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल

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Darbhanga के वैज्ञानिक का वैश्विक पटल पर परचम: लगातार तीसरी बार दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल

Darbhanga : मिथिलांचल की उर्वर बौद्धिक धरती ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है। दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड अंतर्गत पैगंबरपुर गांव निवासी डॉ. संतोष कुमार ने वैश्विक विज्ञान जगत में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

अमेरिका के प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और विख्यात शोध प्रकाशक एल्सेवियर द्वारा संयुक्त रूप से जारी दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत (Top 2%) वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में डॉ. संतोष को लगातार तीसरी बार स्थान मिला है। फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी (खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) विषय में उन्हें वैश्विक स्तर पर 652वीं रैंक प्रदान की गई है। उनका अनुसंधान मुख्य रूप से खाद्य सुरक्षा, भंडारण क्षमता के विस्तार और प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्ति दिलाने वाली पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग तकनीकों पर केंद्रित है।

Darbhanga  News: टिकाऊ पैकेजिंग और खाद्य संरक्षण पर गहन अनुसंधान

डॉ. संतोष कुमार वर्तमान में असम स्थित केंद्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईटी), कोकराझार के खाद्य अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वह मई 2011 से इस संस्थान में अध्यापन और उच्चस्तरीय शोध कार्य में सक्रिय हैं। उनका मुख्य शोध कार्य सस्टेनेबल फूड पैकेजिंग, बायोडिग्रेडेबल मैटेरियल्स (जैव-अपघटनीय सामग्री), खाद्य-योग्य (एडिबल) कोटिंग्स और सुरक्षात्मक फिल्मों के विकास पर आधारित है।

डॉ. कुमार की तकनीक का मुख्य उद्देश्य खाद्य उत्पादों की पोषण गुणवत्ता, स्वाद और ताजगी को बिना किसी रासायनिक मिलावट के लंबे समय तक सुरक्षित रखना है। इसके अलावा, वह ‘सक्रिय एवं स्मार्ट पैकेजिंग’ प्रणालियों पर भी काम कर रहे हैं। इस उन्नत तकनीक के जरिए पैकेजिंग का आवरण स्वतः खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और ताजगी के स्तर पर नजर रखने में सक्षम होता है, जिससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन मिल सके।

Darbhanga  news: प्राकृतिक स्रोतों से विकल्प तैयार कर प्लास्टिक प्रदूषण पर चोट

वैज्ञानिक डॉ. संतोष कुमार के शोध में बायोपॉलिमर आधारित संरचनाओं और प्राकृतिक वर्णकों (नेचुरल पिगमेंट्स) का उपयोग प्रमुखता से शामिल है। वह कृषि अवशेषों, प्राकृतिक संसाधनों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों से निकलने वाले उप-उत्पादों (वेस्ट बायोमास) का पुनः उपयोग कर मूल्यवर्धित पैकेजिंग सामग्री तैयार करने की तकनीक विकसित कर रहे हैं।

उनका यह नवाचार एकल-उपयोग वाले हानिकारक प्लास्टिक (सिंगल-यूज प्लास्टिक) के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल वैश्विक स्तर पर होने वाली खाद्य पदार्थों की बर्बादी (फूड वेस्टेज) को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी, बल्कि पैकेजिंग उद्योग से उत्पन्न होने वाले पर्यावरणीय कचरे और कार्बन फुटप्रिंट को घटाकर सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।

पैतृक गांव पैगंबरपुर में हर्ष, युवाओं के लिए बने प्रेरणा

जमादार साह के पुत्र डॉ. संतोष कुमार के एक ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्वस्तरीय वैज्ञानिकों की कतार में खड़े होने पर उनके पैतृक गांव पैगंबरपुर सहित समूचे दरभंगा जिले में गर्व का माहौल है। अपनी इस उपलब्धि पर उन्होंने अपने माता-पिता, गुरुजनों, शोधार्थियों और छात्रों का आभार जताया। शिक्षाविदों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार तीसरी बार अंतरराष्ट्रीय मानक सूची में शामिल होकर डॉ. कुमार ने यह साबित कर दिया है कि लगन और शोध निष्ठा से सुदूर देहात का युवा भी दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकता है। यह उपलब्धि विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए बड़ी प्रेरणा साबित होगी।

 

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कश्मीर में लहलहाएगी Mithila Makhana की फसल: दरभंगा के वैज्ञानिक देंगे तकनीकी सहयोग

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Mithila Makhana

दरभंगा: जीआई टैग प्राप्त ‘Mithila Makhana’ अब अपनी पारंपरिक भौगोलिक सीमाओं से निकलकर कश्मीर घाटी के जलस्रोतों में अपनी जड़ें जमाने जा रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के दरभंगा स्थित राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र और शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SKUAST) के बीच हुए रणनीतिक शोध समझौते के तहत इस योजना पर जमीनी काम तेज हो गया है।

इस वैज्ञानिक सहयोग का मुख्य उद्देश्य कश्मीर के स्थानीय कृषि-पारिस्थितिकी तंत्र में मखाने की व्यावसायिक खेती की संभावनाएं तलाशना और वहां के किसानों को उन्नत उत्पादन व प्रसंस्करण तकनीकों में दक्ष बनाना है।

Mithila Makhana: दरभंगा से कश्मीर तक पहुंचेगी आधुनिक जलीय कृषि तकनीक

दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच मखाना, कमल ककड़ी (कमल) और सिंघाड़े जैसी जलीय फसलों के उत्पादन, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) में संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए औपचारिक समझौता हुआ था।

इसी वैज्ञानिक आदान-प्रदान के अंतर्गत अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आई.एस. सिंह ने बांडीपोरा-वन स्थित कृषि विज्ञान केंद्र का दौरा कर स्थानीय कृषि वैज्ञानिकों के साथ तकनीकी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया। योजना के अनुसार, घाटी के उपयुक्त जलजमाव वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां प्रायोगिक खेती के जरिए किसानों को फसल सुरक्षा और पौध प्रबंधन की बारीकियां सिखाई जाएंगी।

Mithila Makhana: नवंबर-दिसंबर में घाटी का दौरा करेगा चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल

जम्मू-कश्मीर कृषि विभाग के विशेष अनुरोध पर राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार के नेतृत्व में वैज्ञानिकों का एक चार सदस्यीय दल आगामी नवंबर-दिसंबर में कश्मीर का विस्तृत दौरा करेगा। यह दल कश्मीर के विभिन्न आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) और शांत जलस्रोतों की मिट्टी व पानी के नमूनों का परीक्षण करेगा। इसके साथ ही स्थानीय किसानों और कृषि प्रसार अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिसमें मखाना रोपण से लेकर कटाई तक की संपूर्ण वैज्ञानिक पद्धति की जानकारी दी जाएगी।

कश्मीर के जलाशयों में परखी जाएगी ‘स्वर्ण वैदेही’ किस्म

इस अनुसंधान परियोजना के केंद्र में दरभंगा अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित मखाने की पहली उन्नत और अधिक उपज देने वाली किस्म स्वर्ण वैदेही है। यह किस्म स्थिर जल, दलदली भूमि और जलभराव वाले क्षेत्रों में बेहतर पैदावार देने के लिए पहचानी जाती है।

हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि मिथिला के समशीतोष्ण वातावरण और कश्मीर की अल्पाइन जलवायु में काफी अंतर है। ऐसे में कश्मीर के न्यूनतम तापमान, सूर्य के प्रकाश की अवधि और पानी की प्रकृति के बीच यह फसल किस प्रकार अनुकूलन करती है, इसका अंतिम परिणाम वहां किए जाने वाले प्रायोगिक परीक्षणों और फील्ड प्रदर्शन के बाद ही सामने आएगा।

देश के 10 राज्यों तक मखाना तकनीक का विस्तार

बिहार वर्तमान में देश का 85 प्रतिशत से अधिक मखाना उत्पादन करता है, जिसमें दरभंगा अग्रणी केंद्र रहा है। अब राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र इस तकनीकी अनुभव को देश के 10 विभिन्न गैर-पारंपरिक राज्यों तक पहुंचाने के अभियान में जुटा है।

यदि कश्मीर की झीलों और जलजमाव वाले क्षेत्रों में मखाने की खेती व्यावहारिक रूप से सफल साबित होती है, तो यह कश्मीरी किसानों के लिए पारंपरिक फसलों से इतर आजीविका और फसल विविधीकरण का एक अत्यंत लाभकारी व टिकाऊ विकल्प बन सकता है।

 

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Darbhanga Crime News: बिरौल के चमेली देवी हत्याकांड में पुलिस की कार्रवाई तेज, आधा दर्जन संदिग्ध हिरासत में; कई ठिकानों पर छापेमारी

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Darbhanga Crime News: दरभंगा जिले के बिरौल थाना क्षेत्र अंतर्गत सहसराम गांव में हुई चमेली देवी की नृशंस हत्या के मामले में पुलिस प्रशासन ने तफ्तीश तेज कर दी है। गला रेतकर की गई इस वारदात के बाद इलाके में भारी आक्रोश और तनाव का माहौल है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ग्रामीण एसपी साक्षी कुमारी ने खुद कमान संभाल ली है और पुलिस अधिकारियों को जल्द से जल्द अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

ग्रामीण एसपी ने बिरौल थाने पहुंचकर की समीक्षा, एसआईटी गठित: Darbhanga Crime News

वारदात की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण पुलिस अधीक्षक साक्षी कुमारी ने बिरौल थाने का दौरा किया और जांच दल के साथ समीक्षा बैठक की।

  • विशेष जांच दल (SIT): हत्याकांड के खुलासे के लिए एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया है।

  • रणनीति और निर्देश: ग्रामीण एसपी ने अधिकारियों को वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाने तथा सभी संभावित पहलुओं की गहन पड़ताल करने का निर्देश दिया।

लूट के दौरान पहचान उजागर होने पर हत्या की आशंका: Darbhanga Crime News

पुलिस की शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आ रही है कि वारदात के पीछे लूट या चोरी की मंशा हो सकती है:

  • आशंका जताई जा रही है कि अपराधी चोरी की नीयत से घर में दाखिल हुए थे।

  • आहट होने पर चमेली देवी की नींद खुल गई और उन्होंने किसी अपराधी को पहचान लिया।

  • पहचान उजागर होने के डर से अपराधियों ने धारदार हथियार से गला रेतकर उनकी हत्या कर दी। हालांकि, पुलिस का कहना है कि यह केवल प्रारंभिक बिंदु है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

वैज्ञानिक व फोरेंसिक जांच, आधा दर्जन से अधिक संदिग्धों से पूछताछ: Darbhanga Crime News

एसआईटी मामले की तह तक पहुंचने के लिए हर संभव तकनीकी साधन का सहारा ले रही है:

  • तकनीकी साक्ष्य: घटना स्थल के आसपास के मोबाइल टावर डंप डेटा और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच की जा रही है।

  • फोरेंसिक टीम: घटनास्थल से उठाए गए फिंगरप्रिंट और फोरेंसिक नमूनों का विश्लेषण किया जा रहा है।

  • हिरासत और छापेमारी: शनिवार रात से लेकर रविवार दोपहर तक आधा दर्जन से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की गई है। उनसे मिले इनपुट के आधार पर संदिग्ध ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।

पुलिस का दावा: अहम सुराग हाथ लगे, जल्द होगा खुलासा

बिरौल थानाध्यक्ष चंद्रमणि ने बताया कि जांच दल को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस टीम संदिग्धों के आपराधिक इतिहास और घटना में उनकी संलिप्तता की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि मामले का पर्दाफाश कर मुख्य अभियुक्तों को जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

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