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Darbhanga News: जीनोम एडिटिंग का कमाल, अब सरसों में मिलेगा 6 गुना ज्यादा विटामिन-ई

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Darbhanga News: बिहार के दरभंगा स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में हाल ही में कृषि और विज्ञान के क्षेत्र से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण व्याख्यान आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने सरसों की एक ऐसी क्रांतिकारी किस्म के बारे में जानकारी साझा की, जो आने वाले समय में देश की पोषण सुरक्षा और सेहत की तस्वीर बदल सकती है।

बीएचयू के वैज्ञानिक डॉ. दीपक कुमार ने साझा किया अपना शोध: Darbhanga News

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग और डा. प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में ‘सतत कृषि की दिशा में पौधों में तनाव शमन और मूल्य संवर्धन के लिए जीनोम मैनीपुलेशन’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन हुआ। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपक कुमार ने आनुवंशिक इंजीनियरिंग (Genetic Engineering) और पादप जैव प्रौद्योगिकी में हो रहे नए प्रयोगों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय सरसों (ब्रैसिका जुनसिया) पर किए गए अपने सफल रिसर्च को दुनिया के सामने रखा।

कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में मददगार: नई सरसों की खासियतें: Darbhanga News

डॉ. दीपक कुमार और उनकी टीम द्वारा विकसित की गई सरसों की यह नई ट्रांसजेनिक किस्म आम सरसों से कई मायनों में अलग और बेहतर है:

  • विटामिन-ई की प्रचुरता: इस नई किस्म में सामान्य सरसों के मुकाबले 6 गुना अधिक विटामिन-ई (अल्फा-टोकोफेरोल) पाया गया है।

  • एंटी-ऑक्सीडेंट का पावरहाउस: चूहों पर किए गए रिसर्च के आंकड़ों से पता चला है कि इस सरसों के सेवन से शरीर में एंटी-ऑक्सीडेंट का स्तर तेजी से सुधरता है।

  • कैंसर से बचाव: इस सरसों में ‘कीमोप्रिवेंटिव’ गुण पाए गए हैं, जो भविष्य में कैंसर जैसी घातक बीमारियों को रोकने में सहायक साबित हो सकते हैं।

जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए वरदान: Darbhanga News

बदलते मौसम और पर्यावरण की चुनौतियों के बीच यह तकनीक टिकाऊ खेती (Sustainable Agriculture) के लिए एक मील का पत्थर है।

कम लागत, बेहतर पैदावार: यह नई किस्म पर्यावरण के अनुकूल है। इसे उगाने के लिए कम पानी और बेहद कम रासायनिक उर्वरकों (Chemical Fertilizers) की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, इसमें कीटों और मौसम की मार (अजैविक तनाव) को झेलने की अद्भुत क्षमता है।

छात्रों और शोधकर्ताओं को मिला नया नजरिया

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डॉ. सविता वर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय हमेशा से अपने छात्रों को देश के शीर्ष वैज्ञानिकों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अंकित कुमार सिंह के स्वागत भाषण से हुई, जहाँ मंच पर प्रो. वैद्यनाथ झा और डॉ. गजेन्द्र प्रसाद जैसी विभूतियाँ मौजूद रहीं। व्याख्यान के अंत में डा. प्रभात दास फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस सत्र से विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को कृषि तकनीक को गहराई से समझने का मौका मिला।

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Supaul News: स्पेशल ट्रेन की लेटलतीफी से यात्री बेहाल, नई दिल्ली-सुपौल ट्रेन की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

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Supaul News: रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा के लिए शुरू की गई 04072 नई दिल्ली–सुपौल स्पेशल ट्रेन इन दिनों अपनी लगातार हो रही देरी के कारण चर्चा में है। घंटों लेट चलने की वजह से इस ट्रेन के यात्रियों का रेलवे के समयपालन (Punctuality) से भरोसा उठने लगा है, जिसके चलते लोग अब इस ट्रेन में सफर करने से परहेज कर रहे हैं।

लगातार कई दिनों से घंटों लेट पहुंच रही ट्रेन: Supaul News

सहरसा और सुपौल के यात्रियों के अनुसार, यह ट्रेन पिछले कई दिनों से अपने निर्धारित समय से काफी पीछे चल रही है। लेटलतीफी का आंकड़ा कुछ इस प्रकार है:

  • गुरुवार: अपने तय समय से 2 घंटे 19 मिनट की देरी से सहरसा स्टेशन पहुंची।

  • बुधवार: निर्धारित समय से 2 घंटे 24 मिनट विलंब से आई।

  • मंगलवार: यात्रियों को करीब साढ़े तीन घंटे तक ट्रेन का इंतजार करना पड़ा।

यात्रियों की शिकायत है कि इस स्पेशल ट्रेन को मार्ग के विभिन्न स्टेशनों पर बेवजह लंबे समय तक खड़ा रखा जाता है, जिससे पूरी यात्रा का शेड्यूल बिगड़ जाता है।

छात्र, कामकाजी लोग और मरीज सबसे ज्यादा परेशान: Supaul News

ट्रेन के समय पर न चलने के कारण सबसे बड़ा झटका उन लोगों को लग रहा है जो समय के पाबंद हैं।

  • नौकरीपेशा और छात्र: दफ्तर और कॉलेज समय पर न पहुंच पाने के कारण उनकी दैनिक योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

  • मरीज: दिल्ली से इलाज कराकर लौट रहे या बड़े अस्पतालों में जाने वाले मरीजों को स्टेशनों पर घंटों इंतजार करने के कारण भारी शारीरिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

निश्चित समय पर गंतव्य तक पहुंचने की गारंटी न होने के कारण अब लोग इस रूट पर बसों या अन्य ट्रेनों जैसे वैकल्पिक साधनों का सहारा लेने को मजबूर हैं।

रेलवे प्रशासन से समयपालन दुरुस्त करने की मांग: Supaul News

लगातार हो रही इस अव्यवस्था से नाराज यात्रियों ने अब रेलवे प्रशासन से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि ‘स्पेशल’ का टैग होने के बावजूद इसके परिचालन में इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है? यात्रियों ने मांग की है कि ट्रेन के रूट और इसके रुकने के समय की समीक्षा की जाए ताकि इसका परिचालन समयबद्ध और पारदर्शी हो सके।

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Madhepura News: जमीन की नापी हुई महंगी, राजस्व विभाग ने जारी की नई रेट लिस्ट

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Madhepura News: बिहार सरकार ने प्रशासनिक और तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जमीन मापी शुल्क में वृद्धि करने का निर्णय लिया है। अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रैयती जमीन की नापी के लिए लोगों को पहले के मुकाबले अधिक जेब ढीली करनी होगी। यह व्यवस्था बिहार काश्तकारी नियमावली, 1885 के नियम-23 के तहत ऑनलाइन आवेदन करने वाले रैयतों पर लागू होगी।

सामान्य मापी शुल्क की नई दरें: Madhepura News

सरकार द्वारा सामान्य प्रक्रिया के तहत मापी के लिए निम्नलिखित शुल्क तय किया गया है:

  • ग्रामीण क्षेत्र: ग्रामीण इलाकों में अब प्रति खेसरा 1,000 रुपये शुल्क देना होगा। हालांकि, एक आवेदन पर अधिकतम शुल्क की सीमा 4,000 रुपये तय की गई है।

  • शहरी क्षेत्र (नगर निगम/परिषद/पंचायत): शहरी इलाकों में प्रति खेसरा शुल्क 2,000 रुपये निर्धारित किया गया है, जिसमें अधिकतम सीमा 8,000 रुपये होगी।

तत्काल मापी के लिए देना होगा दोगुना शुल्क: Madhepura News

यदि कोई भू-धारी आपातकालीन या त्वरित आधार पर अपनी जमीन की पैमाइश कराना चाहता है, तो उसके लिए तत्काल मापी की सुविधा भी दी गई है, जिसकी दरें सामान्य से दोगुनी हैं:

  • ग्रामीण क्षेत्र (तत्काल): प्रति खेसरा 2,000 रुपये और अधिकतम 8,000 रुपये।

  • शहरी क्षेत्र (तत्काल): प्रति खेसरा 4,000 रुपये और अधिकतम 16,000 रुपये।

पारदर्शिता और विवादों के निपटारे में मिलेगी मदद: Madhepura News

राजस्व अधिकारी वीरेन्द्र पुरोहित के अनुसार, इस शुल्क वृद्धि का मुख्य उद्देश्य मापी की पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध (Time-bound) बनाना है। विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से अंचलों में लंबित भूमि विवादों के मामलों को तेजी से निपटाने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर, इस फैसले को लेकर आम किसानों और रैयतों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया है; कुछ लोग इसे बेहतर सेवा के रूप में देख रहे हैं, तो कुछ इसे अतिरिक्त आर्थिक बोझ मान रहे हैं। भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने स्पष्ट किया है कि सरकार की प्राथमिकता भू-धारियों को बिना किसी परेशानी के बेहतर और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना है।

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Bihar News: बिहार सरकार की नई पहल, मछुआरों को ₹5 लाख का मुफ्त दुर्घटना बीमा

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Bihar News: बिहार सरकार ने राज्य के मछुआरों और मछली पालकों के जीवन को सुरक्षित करने के लिए ₹5 लाख तक का मुफ्त दुर्घटना बीमा कवर देने का निर्णय लिया है। अक्सर तालाबों के रखरखाव या मछली पकड़ने के दौरान होने वाले हादसों को देखते हुए विभाग ने यह सुरक्षा कवच तैयार किया है।

योजना की मुख्य विशेषताएं: Bihar News

  • मुफ्त बीमा कवर: लाभार्थियों को ₹5 लाख तक का दुर्घटना बीमा दिया जाएगा।

  • प्रीमियम का खर्च: इस योजना के तहत बीमा प्रीमियम की पूरी राशि सरकार खुद वहन करेगी, जिससे मछुआरों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

  • आश्रितों को सहायता: किसी दुर्घटना में लाभार्थी की मृत्यु होने की स्थिति में सहायता राशि उनके परिवार (आश्रितों) को सौंपी जाएगी।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज: Bihar News

योजना का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आवेदन के समय निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे:

  1. पहचान पत्र [Aadhaar Redacted]

  2. बैंक पासबुक की फोटोकॉपी

  3. मत्स्य पालन से जुड़े होने का आवश्यक प्रमाण पत्र/दस्तावेज

सत्यापन और चयन प्रक्रिया: Bihar News

जिला मत्स्य पदाधिकारी संजय कुमार के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन मिलने के बाद विभाग द्वारा दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाएगी। इसके बाद फील्ड अधिकारियों द्वारा आवेदक के कार्यस्थल या तालाब का भौतिक निरीक्षण (Inspection) किया जाएगा। सभी मानक सही पाए जाने पर ही लाभार्थी को योजना से जोड़ा जाएगा। इस कदम से न केवल मछुआरा परिवारों को संकट के समय संबल मिलेगा, बल्कि राज्य में मत्स्य पालन के क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा।

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