Bihar
20 साल के ‘नीतीश युग’ के अंत की चर्चा तेज !
20 साल के ‘नीतीश युग’ के अंत की चर्चा तेज, आज राज्यसभा के लिए नामांकन करेंगे CM नीतीश कुमार
पटना: बिहार की राजनीति के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करने वाले हैं। उनके इस कदम को राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कई राजनीतिक विश्लेषक इसे लगभग दो दशक तक चले “नीतीश युग” के अंत की शुरुआत मान रहे हैं।
अमित शाह की मौजूदगी में हो सकता है नामांकन
सूत्रों के मुताबिक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करेंगे। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भी पटना पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नीतीश कुमार के नामांकन के दौरान भाजपा और जदयू के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी से यह संदेश देने की कोशिश होगी कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है।
बिहार की राजनीति में बड़ा संकेत
करीब 20 वर्षों तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना राज्य की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। 2005 से लगातार बिहार की राजनीति को दिशा देने वाले नीतीश कुमार ने विकास, सुशासन और सामाजिक संतुलन के मुद्दों पर अपनी अलग पहचान बनाई।
अब उनके राज्यसभा जाने की संभावना को नेतृत्व परिवर्तन और नई राजनीतिक व्यवस्था की शुरुआत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
कार्यकर्ताओं में बेचैनी और विरोध
इस फैसले को लेकर जदयू कार्यकर्ताओं के बीच बेचैनी भी देखने को मिल रही है। पार्टी के कई पुराने कार्यकर्ता इस बात को लेकर चिंतित हैं कि नीतीश कुमार के बाद संगठन की कमान किसके हाथ में होगी।
जदयू कार्यालय के बाहर कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध की भी तैयारी की है। उनका कहना है कि पार्टी को एकजुट रखने की क्षमता नीतीश कुमार में ही है और उनके सक्रिय राजनीति से हटने से संगठन कमजोर हो सकता है।
सोशल मीडिया पर भावुक संदेश
राज्यसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक संदेश भी साझा किया। उन्होंने लिखा कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनके मन में यह इच्छा रही है कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें।
उन्होंने बिहार की जनता का आभार जताते हुए कहा कि पिछले दो दशकों से अधिक समय तक लोगों ने उन पर भरोसा बनाए रखा और उसी विश्वास के सहारे उन्होंने राज्य की सेवा करने का प्रयास किया।
जनता से रिश्ता रहेगा कायम
अपने संदेश में नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि राज्यसभा जाने के बाद भी उनका जनता से रिश्ता पहले जैसा बना रहेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बिहार के विकास के लिए उनका संकल्प आगे भी जारी रहेगा।
नई सरकार को देंगे मार्गदर्शन
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले समय में बिहार में जो भी नई सरकार बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह संदेश सिर्फ राज्यसभा चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार की भविष्य की राजनीति के संकेत भी देता है।
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मधेपुरा में वज्रपात से पोल्ट्री फार्म में भीषण आग, 4000 मुर्गों की मौत; लाखों का नुकसान
मधेपुरा में वज्रपात से पोल्ट्री फार्म में भीषण आग, 4000 मुर्गों की मौत; लाखों का नुकसान
मधेपुरा: जिले के सुखासन गांव में शुक्रवार देर रात वज्रपात से एक पोल्ट्री फार्म में भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में करीब 4000 मुर्गों की जलकर मौत हो गई, जबकि फार्म में रखा सारा सामान भी आग की भेंट चढ़ गया। घटना रात करीब 11 बजे की बताई जा रही है।
बिजली गिरते ही आग ने लिया विकराल रूप
जानकारी के अनुसार, सुखासन निवासी नीरज कुमार सिंह के पोल्ट्री फार्म पर अचानक बिजली गिरने से आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरे फार्म को अपनी चपेट में ले लिया।
इस दौरान फार्म में रखा
- अनाज
- तराजू
- पंखे
- फीडर
- अन्य उपकरण
सभी जलकर राख हो गए।
कर्ज लेकर शुरू किया था व्यवसाय, सब कुछ बर्बाद
पीड़ित नीरज कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष फरवरी में स्वयं सहायता समूह से करीब 1.5 लाख रुपये का लोन लेकर इस व्यवसाय की शुरुआत की थी।
उन्होंने कहा कि पहले ही बर्ड फ्लू की आशंका से कारोबार प्रभावित था, और अब इस हादसे ने पूरी तरह से उनकी कमर तोड़ दी है।
इस अग्निकांड में उन्हें करीब 5 से 6 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
आसपास के घरों में भी असर
स्थानीय मुखिया बौआ सिंह के अनुसार, वज्रपात इतना तेज था कि आसपास के कई घरों में
- फ्रिज
- पंखे
- मोबाइल चार्जर
- इनवर्टर
जैसे बिजली उपकरण भी खराब हो गए।
इसके अलावा इलाके में बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई, जिससे ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ी।
प्रशासन से मुआवजे की मांग
घटना की सूचना प्रशासन को दे दी गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी मामले को उठाया है।
पीड़ित परिवार ने सरकार से आर्थिक सहायता और मुआवजे की मांग की है।
नीरज कुमार सिंह का कहना है कि कर्ज लेकर शुरू किया गया उनका यह व्यवसाय पूरी तरह नष्ट हो गया है और अब परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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सहरसा में आंधी-बारिश से फसलें बर्बाद, मक्का और गेहूं को भारी नुकसान; मुआवजे की मांग तेज
सहरसा में आंधी-बारिश से फसलें बर्बाद, मक्का और गेहूं को भारी नुकसान; मुआवजे की मांग तेज
सहरसा: जिले में अचानक बदले मौसम ने किसानों की कमर तोड़ दी है। तेज आंधी और बेमौसम बारिश के कारण मक्का और गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। सहरसा के साथ-साथ सिमरी बख्तियारपुर, सलखुआ, बनमा ईटहरी, सत्तरकटैया और सोनवर्षाराज प्रखंडों में भी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
खेतों में बिछ गई फसल, उत्पादन पर संकट
तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी मक्के की फसल टूटकर जमीन पर गिर गई, जबकि कटाई के लिए तैयार गेहूं भी आंधी-पानी की चपेट में आ गया।
इस नुकसान से कृषि उत्पादन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीण इलाकों में भी नुकसान
केवल फसल ही नहीं, बल्कि कई ग्रामीण इलाकों में टांट-फूस के घर भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे लोगों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों का दर्द: “कटाई से पहले सब बर्बाद”
इस प्राकृतिक आपदा से किसानों में भारी नाराजगी और निराशा है।
- सलखुआ के किसान मुरारी यादव ने कहा, “पीला सोना कही जाने वाली मक्का पूरी तरह बर्बाद हो गई।”
- सिमरी बख्तियारपुर के आनंदी कुशवाहा बोले, “कुछ ही दिनों में गेहूं की कटाई होने वाली थी, लेकिन अब पूरी फसल खेत में गिर गई।”
- बनमा ईटहरी के शंकर यादव ने इसे किसानों के लिए बड़ी आपदा बताया
- सत्तरकटैया के अर्जुन चौधरी ने कहा कि सरकारी मुआवजा नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं होगा
मुआवजे और सर्वे की मांग
किसानों ने सरकार से मांग की है कि
- तुरंत फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए
- प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए
कृषि विभाग ने शुरू किया आकलन
कृषि विभाग के अनुसार:
- जिले में करीब 45 हजार हेक्टेयर में मक्का
- और 48 हजार हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है
जिला कृषि पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि नुकसान का आकलन शुरू कर दिया गया है और रिपोर्ट जल्द ही राज्य सरकार को भेजी जाएगी।
उत्पादन घटने की आशंका
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बेमौसम बारिश और तेज आंधी से जिले में कृषि उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा।
👉 फिलहाल किसान प्रशासन से राहत और मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि इस आपदा से हुए नुकसान की कुछ भरपाई हो सके।
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