Bihar
Madhepura सदर अस्पताल में हाइड्रोसील व हर्निया की सर्जरी शुरू, महंगे निजी इलाज से मिलेगी मुक्ति
Madhepura : कोसी अंचल के मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। स्वास्थ्य मंत्री के विशेष निर्देशों के उपरांत मधेपुरा सदर अस्पताल में सर्जिकल बुनियादी ढांचे और सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
अब हाइड्रोसील और हर्निया जैसी आम सर्जिकल समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए निजी नर्सिंग होम की शरण लेने या दरभंगा, पटना जैसे दूरदराज के बड़े शहरों में जाने की मजबूरी समाप्त हो रही है। अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को सक्रिय कर हाल के दिनों में कई सफल ऑपरेशन किए गए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर सामान्य सर्जरी की राह पूरी तरह खुल गई है।
Madhepura News: स्थानीय स्तर पर ही सुलभ हुआ ऑपरेशन
हाइड्रोसील और हर्निया ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जिनके लिए पहले जिला स्तर पर विशेषज्ञ सर्जिकल सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को उच्च स्वास्थ्य केंद्रों के लिए रेफर कर दिया जाता था। इस अनावश्यक रेफरल से मरीजों को समय और पैसे दोनों का भारी नुकसान उठाना पड़ता था। अब सदर अस्पताल में ही आधुनिक उपकरणों और कुशल चिकित्सकों की देखरेख में इन बीमारियों के ऑपरेशन की नियमित व्यवस्था शुरू कर दी गई है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोसील में पुरुषों के अंडकोष के आसपास तरल पदार्थ एकत्र होने से सूजन और असहजता होती है, जबकि हर्निया में मांसपेशियों की कमजोरी के कारण आंतरिक अंग या ऊतक बाहर उभर आते हैं। कई मामलों में इन दोनों बीमारियों का एकमात्र स्थाई समाधान सर्जरी ही होता है। सदर अस्पताल में यह सुविधा मिलने से मरीजों को घर के पास ही विशेषज्ञ देखभाल सुलभ हो गई है।
Madhepura News: निर्धन परिवारों को महंगे निजी खर्च से राहत
सरकारी अस्पताल में इस सुविधा के प्रारंभ होने का सर्वाधिक लाभ आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि के परिवारों को मिलेगा। निजी अस्पतालों में इन बीमारियों के ऑपरेशन पर हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त बाहर के शहरों में जाने पर यात्रा, परिजनों के ठहरने और खान-पान का अतिरिक्त वित्तीय बोझ गरीब परिवारों की कमर तोड़ देता था। सदर अस्पताल में मुफ्त जांच, दवा और कुशल चिकित्सकों द्वारा नि:शुल्क सर्जरी उपलब्ध होने से आम जनता को इस दोहरी मार से सीधी राहत मिलेगी।
पूरी जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद ही निर्णय
अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल पहुंचने वाले प्रत्येक मरीज का पहले वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा गहन परीक्षण और जरूरी पैथोलॉजिकल व रेडियोलॉजिकल जांच की जाएगी। चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर जब यह पुष्टि हो जाएगी कि मरीज की स्थिति सामान्य सर्जरी के अनुकूल है, तभी ऑपरेशन की तारीख तय की जाएगी।
वहीं, यदि कोई मामला अत्यधिक जटिल या उच्च जोखिम वाला पाया जाता है, जिसके लिए सुपर-स्पेशियलिटी स्तर के संसाधनों और आईसीयू बैकअप की अनिवार्यता होगी, केवल उन्हीं मरीजों को उच्चतर स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जाएगा। इस दोहरी व्यवस्था से जहां गंभीर रोगियों को समय पर सही उपचार केंद्र मिल सकेगा, वहीं सामान्य सर्जिकल मामलों का समयबद्ध निस्तारण जिला मुख्यालय में ही संभव हो सकेगा।
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