Bihar
Madhepura: डीएम की जनसुनवाई में पहुंचे 32 फरियादी, भूमि व पेंशन मामलों के त्वरित निष्पादन का आदेश
Madhepura: प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से सोमवार को मधेपुरा समाहरणालय स्थित जिलाधिकारी कार्यालय कक्ष में साप्ताहिक जनसुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जिलाधिकारी अभिषेक रंजन की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस जनसुनवाई में जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से पहुंचे 32 फरियादियों ने अपनी समस्याओं, शिकायतों और मांगों से संबंधित आवेदन डीएम के समक्ष प्रस्तुत किए। जिलाधिकारी ने प्रत्येक फरियादी से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
Madhepura: भूमि विवाद, पेंशन और राशन से जुड़े मामले रहे प्रमुख
जनसुनवाई के दौरान पहुंचे अधिकांश मामलों में भूमि विवाद, राशन कार्ड में नाम जुड़वाने, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री आवास योजना से जुड़ी शिकायतें प्रमुख रहीं। कई ग्रामीणों ने दाखिल-खारिज में देरी, भूमि मापी में अड़चनों और पड़ोसियों द्वारा जबरन रास्ते पर कब्जा करने जैसी आपत्तियां दर्ज कराईं।
इसके अलावा, बुजुर्गों और दिव्यांगों ने समय पर पेंशन न मिलने और राशन वितरण में डीलरों की मनमानी से जुड़ी शिकायतें रखीं। जिलाधिकारी ने सभी आवेदकों की बातों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना तथा कई मामलों में मौके पर मौजूद विभागीय अधिकारियों से तुरंत वस्तुस्थिति की जानकारी ली।
Madhepura: तय समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण समाधान के निर्देश
सभी 32 मामलों की समीक्षा करने के बाद डीएम अभिषेक रंजन ने अंचलाधिकारी (सीओ), प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अन्य संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने सख्त हिदायत दी कि प्रत्येक आवेदन को निर्धारित समय-सीमा के भीतर निष्पादित किया जाए।
डीएम ने कहा कि मामलों का निस्तारण केवल कागजों पर खानापूर्ति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि धरातल पर पारदर्शी, निष्पक्ष और न्यायसंगत परिणाम दिखना चाहिए ताकि आम नागरिकों को वास्तविक राहत मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसुनवाई में आने वाले मामलों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब या शिथिलता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासन और जनता के बीच सीधा सेतु है जनसुनवाई
जिलाधिकारी अभिषेक रंजन ने इस अवसर पर कहा कि जिला प्रशासन सुशासन, संवेदनशीलता और जनसहभागिता के सिद्धांतों पर काम कर रहा है। जनसुनवाई आम नागरिकों और जिले के शीर्ष अधिकारियों के बीच एक सीधा और प्रभावी संवाद मंच है। इसके माध्यम से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की बात सीधे प्रशासन तक पहुंचती है, जिससे जमीनी समस्याओं का त्वरित संज्ञान लेना संभव होता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनहित से जुड़े मामलों को शीर्ष प्राथमिकता दी जाए ताकि लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर न काटने पड़ें। प्रशासन का मुख्य ध्येय त्वरित निस्तारण, पारदर्शिता और जनता के भरोसे को मजबूत करना है।
यह भी पढ़े: Merchant Discount Rate: ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4% MDR से मुरलीगंज के व्यापारियों में असमंजस, 15 अक्टूबर से प्रभावी होगी व्यवस्था