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Nasha Mukt Bihar अभियान के तहत ब्रह्माकुमारी बहनों ने जीविका दीदियों को किया जागरूक

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राघोपुर (सुपौल): Nasha Mukt Bihar: राज्य को व्यसनमुक्त, स्वस्थ और समृद्ध बनाने के उद्देश्य से संचालित जन-अभियान के अंतर्गत सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड में सामाजिक चेतना की नई अलख जगाई जा रही है।

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, सेवा केंद्र सिमराही-राघोपुर के तत्वावधान में ग्रामीण स्तर पर महिलाओं और परिवारों को मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस Nasha Mukt Bihar Campaign Raghopur के जरिए जीविका दीदियों को मुख्य संवाहक बनाते हुए नशे के सामाजिक, शारीरिक और आर्थिक नुकसानों के प्रति सजग किया जा रहा है। ब्रह्माकुमारी बहनों ने विभिन्न संकुलों में पहुंचकर जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं को नशामुक्ति का संकल्प दिलाया और उन्हें समाज में परिवर्तन का अग्रदूत बनने के लिए प्रेरित किया।

Nasha Mukt Bihar: दर्जनों ग्रामीण जीविका केंद्रों तक पहुंची जागरूकता की गूंज

इस सघन जन-जागरूकता अभियान के तहत ब्रह्माकुमारी संस्थान की समर्पित बहनों और सेवाधारियों की टीम राघोपुर प्रखंड के दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय रूप से पहुंच रही है।

अभियान के अंतर्गत राघोपुर मुख्यालय, धरहरा, राधानगर, सुखानगर, गणपतगंज, करजाइन, हरिराहा, हरीपुर, प्रतापगंज और दौलतपुर सहित आसपास के दर्जनों गांवों में संचालित जीविका स्वयं सहायता समूहों (SHG) के केंद्रों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में सैकड़ों की संख्या में जीविका दीदियों ने भाग लेकर नशे के खिलाफ एकजुटता का प्रदर्शन किया। आयोजकों ने बताया कि महिलाएं परिवार की धुरी होती हैं, इसलिए यदि वे जागरूक होंगी, तो पूरे परिवार और समाज को व्यसनमुक्त बनाना बेहद आसान हो जाएगा।

“नशे की लत केवल व्यक्ति नहीं, पूरे परिवार को करती है तबाह”

जागरूकता सत्रों को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी बीके बबीता दीदी, बीके पूजा बहन, बीके बीना बहन, बीके रेनू बहन और बीके किशोर भाई ने व्यसन के मानवीय और सामाजिक पहलुओं पर प्रकाश डाला।

वक्ताओं ने रेखांकित किया कि नशा न केवल सेवन करने वाले व्यक्ति के लीवर, फेफड़े और मानसिक संतुलन को बर्बाद करता है, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक रीढ़ को तोड़ देता है। नशे के कारण घरेलू हिंसा, कलह और सामाजिक प्रतिष्ठा में गिरावट आती है। बीके बबीता दीदी ने कहा कि किसी भी व्यसन से मुक्ति पाने के लिए केवल कानूनी प्रतिबंध काफी नहीं हैं, बल्कि व्यक्ति के भीतर आंतरिक शक्ति, सकारात्मक विचार और मजबूत आत्मबल का होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि दैनिक जीवन में राजयोग मेडिटेशन (ध्यान) और आध्यात्मिक जीवनशैली को अपनाकर व्यक्ति किसी भी प्रकार की मानसिक दुर्बलता और बुरी लत पर आसानी से काबू पा सकता है।

Nasha Mukt Bihar: जीविका दीदियों ने सामूहिक रूप से ली नशामुक्ति की शपथ

कार्यक्रम के समापन सत्र में उपस्थित सभी जीविका दीदियों को नशामुक्त समाज निर्माण की औपचारिक शपथ दिलाई गई। महिलाओं ने हाथ उठाकर प्रतिज्ञा की कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ या तंबाकू का सेवन नहीं करेंगी।

साथ ही उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि वे अपने घर के पुरुषों, बच्चों और पड़ोसियों को भी नशे के जानलेवा परिणामों के प्रति सचेत करेंगी और उन्हें नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करेंगी। जीविका दीदियों ने कहा कि शराबबंदी और नशामुक्ति को सफल बनाने के लिए वे अपने-अपने गांवों में निगरानी रखेंगी और जनजागरूकता रैलियों के माध्यम से जन-जन तक यह संदेश पहुंचाएंगी।

26 नवंबर तक पूरे राज्य में संचालित होगा विशेष अभियान

उल्लेखनीय है कि नशामुक्त बिहार अभियान के अंतर्गत 26 नवंबर तक पूरे राज्य में एक माह का सघन जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है।

इस अभियान का उद्देश्य बिहार के सभी 38 जिलों में फैले जीविका नेटवर्क के विशाल तंत्र का उपयोग करते हुए नशामुक्ति के संदेश को अंतिम घर तक पहुंचाना है। इस महाअभियान में ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय जैसे प्रतिष्ठित आध्यात्मिक और सामाजिक संस्थान सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि नशामुक्त बिहार का सपना तभी पूरी तरह साकार होगा जब प्रशासनिक कड़ाई के साथ-साथ समाज का प्रत्येक नागरिक अपनी नैतिक जिम्मेदारी को समझेगा।

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