Bihar
पटना NEET छात्रा मौत मामला: किसी के खिलाफ नहीं मिले साक्ष्य, CBI ने कोर्ट में दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट
पटना: राजधानी पटना में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के चर्चित मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच पूरी कर ली है।
जांच एजेंसी को किसी भी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त या अभियोजन योग्य साक्ष्य नहीं मिले, जिसके आधार पर उसे आरोपी बनाया जा सके। इसके बाद सीबीआई ने विशेष पॉक्सो न्यायाधीश राजीव रंजन रमण की अदालत में क्लोजर रिपोर्ट (फाइनल रिपोर्ट) दाखिल कर दी है। अदालत ने मृतका के पिता को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर निर्धारित की है।
NEET Student Death: हॉस्टल में अचेत मिली थी छात्रा, इलाज के दौरान तोड़ा था दम
यह सनसनीखेज मामला पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के मुन्ना चक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा है। यहां रहकर नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा 6 जनवरी 2026 को हॉस्टल के एक बंद कमरे में गंभीर रूप से अचेत अवस्था में पाई गई थी। उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 11 जनवरी 2026 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतका के पिता ने शरीर पर चोट के निशान होने और दुष्कर्म के प्रयास की आशंका जताते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
NEET Student Death: डीएनए रिपोर्ट में नहीं मिला मिलान, पुलिस अफसरों पर भी गिरी थी गाज
घटना के बाद मेडिकल जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले को काफी संवेदनशील बना दिया था। जांच के दौरान छात्रा के अंतःवस्त्रों से वीर्य के अंश मिलने की बात सामने आई थी, जिसके बाद संदिग्धों, परिजनों और करीबियों के डीएनए सैंपल लेकर जांच कराई गई। हालांकि, किसी भी व्यक्ति का डीएनए प्रोफाइल घटनास्थल से मिले नमूनों से मेल नहीं खा सका।
शुरुआती जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में तत्कालीन थानाध्यक्ष रौशनी कुमारी और कदमकुआं के अपर थानाध्यक्ष हेमंत झा को निलंबित कर दिया गया था, जबकि हॉस्टल संचालक को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
जनआक्रोश के बाद बिहार सरकार ने CBI को सौंपी थी जांच
मामले को लेकर छात्रों और आम लोगों में भारी आक्रोश देखा गया था। पुलिसिया जांच पर लगातार उठ रहे सवालों को देखते हुए बिहार सरकार ने फरवरी 2026 में पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की थी। सीबीआई ने हॉस्टल से लेकर जहानाबाद तक सभी संबंधित पक्षों, डॉक्टरों और जांच अधिकारियों से गहन पूछताछ की और फॉरेंसिक सबूतों की दोबारा समीक्षा की।
क्लोजर रिपोर्ट के बाद कोर्ट के विकल्प और परिजनों का अधिकार
विशेष लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद के अनुसार, महीनों की पड़ताल के बाद भी जांच एजेंसी को कोई ऐसा ठोस सुराग या गवाह नहीं मिला जिससे मौत के वास्तविक कारणों या किसी दोषी की पुष्टि हो सके।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, क्लोजर रिपोर्ट का अर्थ यह नहीं है कि मामला स्वतः बंद हो गया। कोर्ट के पास रिपोर्ट को स्वीकार करने, खारिज कर पुनः जांच का आदेश देने या उपलब्ध तथ्यों के आधार पर स्वयं संज्ञान लेने का अधिकार सुरक्षित है। इसके अलावा, मृतका के परिजन अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन (विरोध याचिका) दाखिल कर अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। अदालत अब 13 अक्टूबर को परिजनों का पक्ष सुनने के बाद ही अंतिम फैसला लेगी।
यह भी पढ़े: Supaul: SH-91 पर बाइक सवार युवक को टक्कर मार अगवा किया, ग्रामीणों पर 4 राउंड फायरिंग