Bihar
Saharsa: वैशाली एक्सप्रेस के एसी कोच से 33 लीटर विदेशी शराब जब्त, तस्कर फरार
Saharsa: बिहार में सख्त शराबबंदी कानून के बावजूद तस्करों द्वारा शराब की अवैध ढुलाई के लिए नित नए तौर-तरीके अपनाए जा रहे हैं। अब लक्जरी यात्रा का बहाना बनाकर सुपरफास्ट ट्रेनों के वातानुकूलित (एसी) कोचों को तस्करी का जरिया बनाया जाने लगा है। हालांकि, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की सतर्कता ने ऐसे ही एक मंसूबे को नाकाम कर दिया। सहरसा पहुंची वैशाली एक्सप्रेस के खाली रैक के एसी डिब्बों से लावारिस हालत में 44 बोतल विदेशी शराब बरामद की गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 43 हजार रुपये आंकी गई है।
Saharsa: गुप्त सूचना पर आरपीएफ ने बिछाया था सुरक्षा का जाल
शराब की इस खेप को पकड़ने के लिए आरपीएफ ने सुनियोजित तरीके से जाल बिछाया था। सहरसा आरपीएफ को पुख्ता इनपुट मिला था कि ट्रेन संख्या 15566 वैशाली एक्सप्रेस के खाली रैक में विदेशी शराब की बड़ी खेप ललितग्राम से सहरसा लाई जा रही है। सूचना मिलते ही पोस्ट कमांडर धनंजय कुमार ने तत्काल विशेष निगरानी दल का गठन किया।
तस्करों को बीच रास्ते में माल उतारने से रोकने के लिए रूट के स्टेशनों पर भी कड़ी चौकसी रखी गई। सहायक उप निरीक्षक राजेश कुमार काजी को ट्रेन में गोपनीय निगरानी के लिए लगाया गया, जबकि राघवपुर स्टेशन पर प्रधान आरक्षी सत्येंद्र नाथ तिवारी और सरायगढ़ स्टेशन पर प्रधान आरक्षी बबलू शर्मा को तैनात किया गया था।
Saharsa: वाशिंग पिट तक निगरानी, बी-1 और बी-2 कोच में मिली खेप
बुधवार तड़के करीब 5:15 बजे जब ट्रेन सहरसा के प्लेटफॉर्म नंबर दो पर पहुंची, तो सहायक उप निरीक्षक सुनील कुमार पांडेय के नेतृत्व में बोगियों की सघन जांच शुरू हुई। शुरुआती जांच में एसी कोच बी-1 और बी-2 में कुछ संदिग्ध लावारिस बैग देखे गए। जवानों ने बैग उठाने वाले का इंतजार किया, लेकिन कोई सामने नहीं आया।
इसके बाद सुबह करीब 7:15 बजे ट्रेन जब वाशिंग पिट में धुलाई के लिए पहुंची, तब आरपीएफ टीम ने वीडियोग्राफी के साथ तलाशी ली। इस दौरान बी-1 कोच की सीट संख्या 33 और 49 के नीचे से पीले रंग के झोले मिले, जबकि बी-2 कोच की सीट संख्या 17 और 29 के नीचे से एक बड़ा बैग और प्लास्टिक का झोला बरामद किया गया।
33 लीटर शराब जब्त, उत्पाद विभाग को सौंपी गई खेप
कैमरे के सामने जब बैगों को खोला गया तो विभिन्न नामी ब्रांडों की कुल 44 बोतलें (लगभग 33 लीटर) विदेशी शराब निकलीं। बाजार में इसकी कीमत करीब 43 हजार रुपये है। आरपीएफ की सख्त घेराबंदी की भनक पाकर शातिर तस्कर संभवतः पहले ही फरार हो गए। आरपीएफ ने पूरी खेप को जब्त कर आगे की कार्रवाई के लिए उत्पाद विभाग को सौंप दिया। सूचना मिलने पर उत्पाद विभाग के सहायक अवर निरीक्षक लक्ष्मण कुमार टीम के साथ मौके पर पहुंचे और माल को अपने कब्जे में लिया।
एसी डिब्बों में तस्करी से सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
सुपरफास्ट ट्रेनों के एसी कोचों का उपयोग शराब तस्करी के लिए होना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर चिंता का विषय है। इससे यह सवाल भी खड़ा होता है कि सुरक्षा जांच के बावजूद ललितग्राम से सहरसा तक यह खेप कोच के भीतर कैसे पहुंची। फिलहाल सहरसा आरपीएफ और उत्पाद विभाग रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं ताकि बैग रखने वालों की पहचान कर इस तस्करी नेटवर्क पर शिकंजा कसा जा सके।
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