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Saharsa: एमएलटी कॉलेज में समावेशी देखभाल व्यवस्था पर जागरूकता रैली, नीति आयोग की रिपोर्ट पर मंथन

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Saharsa: सहरसा स्थित एमएलटी कॉलेज में सेवा, संवेदना और सामाजिक समावेशन का संदेश प्रसारित करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता रैली और विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट ‘रीइमेजिनिंग केयर स्ट्रैटेजीज फॉर एम्पावरिंग केयरगिवर्स इन विकसित भारत@2047’ को केंद्र में रखकर ‘अवेयरनेस कैंपेन टू स्ट्रेंथेन द इंक्लूसिव केयरगिविंग इकोसिस्टम इन आवर सोसाइटी’ विषय पर आयोजित हुआ। महाविद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. सुमन कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों, कर्मियों और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

Saharsa: देखभाल व्यवस्था को व्यवस्थित और जवाबदेह बनाना जरूरी: डॉ. सुमन कुमार

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. सुमन कुमार ने कहा कि नीति आयोग की यह पहल देश में उभरती देखभाल व्यवस्था (केयरगिविंग इकोसिस्टम) को औपचारिक, जवाबदेह और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम है। उन्होंने रेखांकित किया कि परिवार और समाज में अनौपचारिक रूप से बुजुर्गों, बीमारों और बच्चों की देखभाल करने वाले लोगों के श्रम को अब तक उचित सामाजिक और आर्थिक मान्यता नहीं मिल पाई है।

डॉ. कुमार ने कहा कि रिपोर्ट के प्रमुख सुझावों में देखभाल कार्य को औपचारिक मान्यता देना, केयरगिवर्स के लिए सम्मानजनक न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करना, व्यापक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना तथा देखभाल संबंधी योग्यताओं को ‘राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क’ (NSQF) के साथ जोड़ना शामिल है। इससे असंगठित क्षेत्र के देखभालकर्ताओं को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी।

Saharsa: बुजुर्गों व दिव्यांगों के प्रति संवेदनशीलता से सशक्त होगा समाज

राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. बलवीर कुमार झा ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने वृद्धजनों, दिव्यांगों और असहाय नागरिकों के प्रति कितना संवेदनशील है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आगे आकर समाज के कमजोर तबकों की सहायता करें।

डॉ. झा ने कहा कि एक सशक्त और समावेशी देखभाल व्यवस्था न केवल सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करती है, बल्कि यह युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण आजीविका और पेशेवर रोजगार के नए द्वार भी खोलती है। ‘विकसित भारत@2047’ के राष्ट्रीय विजन को साकार करने के लिए मानवीय संवेदनशीलता और मजबूत देखभाल नेटवर्क सबसे बुनियादी आवश्यकता है।

भारतीय संस्कृति की मूल पहचान है सेवा और करुणा

हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मयंक भार्गव ने कहा कि सेवा, परोपकार और संवेदना भारतीय संस्कृति के मूल तत्व रहे हैं। आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में ऐसे जागरूकता अभियानों के माध्यम से नई पीढ़ी को पारिवारिक और सामाजिक दायित्वों से जोड़ना बेहद जरूरी है। इससे वृद्धों और दिव्यांगों के लिए सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर उपलब्ध कल्याणकारी योजनाओं व सुविधाओं की जानकारी भी आम जनमानस तक पहुंचेगी।

कार्यक्रम के समापन सत्र में डॉ. अंशु ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि केयरगिविंग को संस्थागत और आर्थिक मान्यता मिलने से भारत भविष्य में कुशल देखभाल सेवाओं के वैश्विक केंद्र (ग्लोबल हब) के रूप में उभर सकता है।

बड़ी संख्या में शिक्षक और छात्र रहे उपस्थित

जागरूकता रैली के दौरान छात्र-छात्राओं ने हाथों में प्रेरक तख्तियां लेकर समाज में संवेदनशीलता और देखभाल का संदेश दिया। इस अवसर पर डॉ. वीणा, डॉ. दीप्ति, डॉ. अभिलाषा, डॉ. संयुक्ता, डॉ. अन्नु, डॉ. कौशल, डॉ. जयंत, डॉ. गौतम, डॉ. कोमल, डॉ. एकता, डॉ. देवदत्त, डॉ. हिमांशु, डॉ. मुकेश, डॉ. महेश, डॉ. बेग, डॉ. राजेश, आशुतोष सिंह, अमित सिंह, सौरभ, शिवम और प्रमोद सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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