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Saharsa News: सहरसा-मानसी रेलखंड के 21 स्टेशनों पर बदलेगा सिग्नल सिस्टम, 233 करोड़ से लगेगा EI सिस्टम

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Saharsa News: सहरसा में अब रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों के संचालन के लिए पुराने पैनल और उसके बटनों पर निर्भरता खत्म होने जा रही है. सहरसा-मानसी रेलखंड समेत समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों पर जल्द ही सिग्नलिंग व्यवस्था का पूरा सिस्टम बदलने की तैयारी है. यहां पैनल सिस्टम की जगह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग यानी ईआई सिस्टम लगाया जायेगा. इसके बाद ट्रेनों के परिचालन से जुड़ी गतिविधियां स्क्रीन पर दिखाई देंगी और माउस के जरिए ऑपरेशन किया जायेगा. भारतीय रेलवे ने इस बड़े बदलाव के लिए 233 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी है. वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद अब टेंडर की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है. रेलवे ने वर्ष 2027 तक ईआई वर्क पूरा करने का लक्ष्य रखा है. इस बदलाव का असर सिर्फ रेलवे कर्मचारियों के काम करने के तरीके तक सीमित नहीं रहेगा. आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था से ट्रेनों की स्थिति पर नजर रखना आसान होगा, तकनीकी बाधाओं को कम करने में मदद मिलेगी और भविष्य में कवच जैसी आधुनिक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के कार्यान्वयन का रास्ता भी मजबूत होगा.

21 स्टेशनों पर बदलेगी सिग्नलिंग की तस्वीर: Saharsa News

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के लिए समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों का चयन किया गया है. इनमें सिमरी बख्तियारपुर, कोपरिया, बदला घाट, धमारा घाट, मधुबनी, अंगार घाट, रुसेरा घाट, रामगढ़वा, भगवानपुर देसुआ, नरहन, नया नगर, राजनगर, सलौना, इमली, ओलापुर, सोनबरसा कचहरी, पंडौल, डॉ. श्रीकृष्ण सिंह नगर गढ़पुरा, बैजनाथपुर, बुधमा और मुरलीगंज शामिल हैं. सहरसा-मानसी रेलखंड के यात्रियों के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सिग्नलिंग सिस्टम सीधे ट्रेनों के सुरक्षित और सुचारु परिचालन से जुड़ा होता है. सिस्टम के आधुनिक होने से परिचालन क्षमता और ट्रेनों की गति बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.

पैनल के बटन गायब, दो स्क्रीन पर दिखेगी ट्रेन की स्थिति: Saharsa News

अभी इन स्टेशनों पर सिग्नलिंग और ट्रेन परिचालन से जुड़े काम पैनल सिस्टम के जरिए किये जाते हैं. इस व्यवस्था में अलग-अलग बटन के माध्यम से ऑपरेशन किया जाता है. इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग लागू होने के बाद यह प्रक्रिया पूरी तरह बदल जायेगी.नई व्यवस्था में प्रत्येक स्टेशन पर दो-दो स्क्रीन लगायी जायेंगी. पैनल के बटन की जगह स्क्रीन पर माउस के माध्यम से ऑपरेशन किया जायेगा. स्टेशन मैनेजर, स्टेशन अधीक्षक और ऑपरेटिंग विभाग के कर्मचारियों को सेक्शन में ट्रेनों की गति, स्थिति और परिचालन से जुड़ी जानकारी लगातार मिलती रहेगी. यानी किसी ट्रेन की स्थिति समझने और परिचालन से जुड़े ऑपरेशन के लिए कर्मचारियों को पुराने पैनल सिस्टम पर निर्भर नहीं रहना होगा. स्क्रीन आधारित सिस्टम में सूचनाएं अधिक आधुनिक तरीके से उपलब्ध होंगी.

बटन में खराबी से ट्रेन रोकने की नौबत होगी कम: Saharsa News

पुराने पैनल सिस्टम में कभी-कभी बटन या अन्य तकनीकी खराबी के कारण सिग्नलिंग व्यवस्था प्रभावित हो जाती है. ऐसी स्थिति में ट्रेन परिचालन को मैन्युअल तरीके से संचालित करना पड़ता है. इससे परिचालन प्रभावित होने की संभावना रहती है. इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लागू होने के बाद सिग्नलिंग व्यवस्था को अधिक आधुनिक और विश्वसनीय बनाने में मदद मिलेगी. इससे तकनीकी बाधाओं को कम करने के साथ रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में भी सहयोग मिलेगा. यात्रियों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि सिग्नलिंग से जुड़ी तकनीकी व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश होगी, जिससे ट्रेनों के संचालन में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सके.

कवच लागू करने में भी मिलेगी मदद: Saharsa News

रेलवे के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग पूरे मंडल के सिग्नलिंग बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था से स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच के कार्यान्वयन में भी मदद मिलेगी. कवच जैसी आधुनिक सुरक्षा प्रणाली के लिए मजबूत सिग्नलिंग बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में 21 स्टेशनों पर ईआई सिस्टम लगाने की योजना को भविष्य की रेलवे सुरक्षा व्यवस्था से भी जोड़कर देखा जा रहा है.

2027 तक पूरा करने का लक्ष्य, अब टेंडर की बारी

रेलवे ने ईआई वर्क को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है. फिलहाल वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है और इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. इसके बाद चयनित स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाने का काम आगे बढ़ेगा. पूर्व मध्य रेलवे की सीपीआरओ सरस्वती चंद्र ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के माध्यम से 21 स्टेशनों की सिग्नलिंग व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया जायेगा. पैनल सिस्टम की जगह स्क्रीन आधारित आधुनिक व्यवस्था काम करेगी और प्रत्येक स्टेशन पर दो-दो स्क्रीन के माध्यम से संचालन किया जायेगा. उन्होंने कहा कि यह पहल भारतीय रेलवे द्वारा पूरे नेटवर्क में सिग्नलिंग सिस्टम के आधुनिकीकरण, रेलवे सुरक्षा को मजबूत करने और परिचालन दक्षता बढ़ाने की दिशा में किये जा रहे निरंतर प्रयासों का हिस्सा है. अब निगाहें टेंडर प्रक्रिया और उसके बाद शुरू होने वाले काम पर हैं. यदि तय समयसीमा के अनुसार काम आगे बढ़ता है, तो 2027 तक इन 21 स्टेशनों पर सिग्नलिंग का पुराना चेहरा बदलकर स्क्रीन आधारित आधुनिक व्यवस्था दिखाई दे सकती है.

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मधेपुरा: सांसद Pappu Yadav मृतक गोलू के परिजनों से मिले

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मधेपुरा: सांसद Pappu Yadav मृतक गोलू के परिजनों से मिले

मधेपुरा: Pappu Yadav: मधेपुरा जिले के घैलाढ़ प्रखंड अंतर्गत भान गांव में सड़क हादसे का शिकार हुए 21 वर्षीय गोलू कुमार के घर मातम पसरा हुआ है। जिस नौजवान बेटे के कंधों पर पूरे परिवार के भविष्य की उम्मीदें टिकी थीं, उसकी असमय मौत ने परिजनों को तोड़कर रख दिया है।

इस गमगीन माहौल के बीच पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने भान गांव पहुंचे। इस संवेदनशील Madhepura Pappu Yadav Visit के दौरान उन्होंने शोकाकुल परिजनों को गले लगाकर सांत्वना दी और तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की। परिजनों से मुलाकात के बाद सांसद ने बिहार में बेलगाम अपराध, नशे के अवैध कारोबार और प्रशासनिक विफलता को लेकर सत्ता पक्ष पर तीखा हमला बोला।

Pappu Yadav: ट्रैक्टर चालक पिता के घर का बुझ गया इकलौता सहारा

भान गांव निवासी मंझय मंडल दिन-रात ट्रैक्टर चलाकर और खून-पसीना बहाकर अपने बच्चों का भरण-पोषण कर रहे थे। उनके परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं, जिनमें 21 वर्षीय गोलू कुमार परिवार का मुख्य आर्थिक संबल बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा था। एक आकस्मिक और दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने इस हंसते-खेलते गरीब परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए छीन लिया।

मृतक के पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और समूचे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। सांसद पप्पू यादव ने घर पहुंचकर परिजनों के आंसू पोंछे और भरोसा दिलाया कि इस कठिन परिस्थिति में वे परिवार को किसी भी कीमत पर असहाय नहीं रहने देंगे। उन्होंने पीड़ित परिवार को निजी कोष से फौरी आर्थिक मदद सौंपी और हरसंभव सहयोग जारी रखने का वचन दिया।

बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर सांसद Pappu Yadav का सीधा प्रहार

पीड़ित परिवार से भेंट करने के उपरांत मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए सांसद पप्पू यादव ने राज्य में लचर कानून-व्यवस्था पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश का आम नागरिक आज भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को विवश है। प्रतिदिन हत्या, लूट और गोलीबारी की घटनाएं सामने आ रही हैं, किंतु पुलिस प्रशासन निष्प्रभावी बना हुआ है।

सांसद ने गंभीर दावा किया कि बीते 75 दिनों के भीतर पुलिस कार्रवाई और हिरासत में 20 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा महिलाओं के खिलाफ हो रहे जघन्य अपराधों और पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिलने की प्रक्रिया पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए। उन्होंने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और गृह विभाग के शीर्ष नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार राज्य की जनता को बुनियादी सुरक्षा उपलब्ध कराने में विफल रही है।

नशे का जाल, सिंडिकेट और राजनीतिक साठगांठ का आरोप

सांसद ने राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में तेजी से पांव पसार रहे नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सफेदपोश नेताओं, तस्करों और पुलिस तंत्र की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा काला कारोबार संचालित नहीं हो सकता। शराबबंदी के बावजूद हर गांव में नशा पहुंच रहा है, जिससे युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है।

उन्होंने एक जनप्रतिनिधि का हवाला देते हुए सनसनीखेज आरोप लगाया कि गंभीर आपराधिक मामलों में लिप्त रहने वाले लोगों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। सांसद ने सरकार से मांग की कि वह नशे के सिंडिकेट और अपराध के गठजोड़ को तोड़ने के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई करे।

धर्म और मानवता का सही अर्थ समझना जरूरी: Pappu Yadav

सामाजिक और नैतिक मूल्यों में आ रही गिरावट पर अफसोस जताते हुए पप्पू यादव ने कहा कि धर्म केवल धार्मिक अनुष्ठानों और बाहरी दिखावे तक सीमित नहीं है। सच्चा धर्म और असली पूजा तो गरीबों, मजलूमों, अनाथों और बेसहारा लोगों की सेवा करना और उनके चेहरों पर मुस्कान लाना है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज समाज में चारों तरफ स्वार्थ और अहंकार का बोलबाला हो चुका है, जबकि मर्यादा, त्याग और करुणा के मूल्य पीछे छूटते जा रहे हैं। जब तक समाज और शासन तंत्र में गरीबों के प्रति सच्ची संवेदना पैदा नहीं होगी, तब तक वास्तविक न्याय की कल्पना अधूरी रहेगी। मधेपुरा में सांसद की इस भावुक मुलाकात और तीखे राजनीतिक बयानों ने प्रशासनिक और सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।

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Darbhanga: मेले से युवती को अगवा कर दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार

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Darbhanga: मेले से युवती को अगवा कर दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार

Darbhanga : बिहार के दरभंगा जिले से कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को तार-तार कर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। बिरौल थाना क्षेत्र में सामने आया यह Darbhanga Biraul Mela Crime पूरे इलाके में चर्चा और आक्रोश का विषय बना हुआ है।

शिवनगर घाट पर आयोजित मेले में परिजनों के साथ घूमने आई एक 18 वर्षीय युवती को अगवा कर उसके साथ दुष्कर्म किए जाने की घटना ने प्रशासनिक चौकसी की पोल खोल दी है। पीड़िता की मां के लिखित बयान के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मुख्य नामजद आरोपी को धर दबोचा है, जबकि मामले में शामिल अन्य संदिग्धों की तलाश सरगर्मी से जारी है।

Darbhanga: शिवनगर घाट मेले में भारी भीड़ के बीच बिछड़ गई थी युवती

पीड़िता की मां द्वारा बिरौल थाने में दी गई लिखित शिकायत के अनुसार, वह 19 अक्टूबर की शाम अपने पूरे परिवार और 18 वर्षीय पुत्री के साथ शिवनगर घाट पर लगे मेले में पूजा-अर्चना और भ्रमण के लिए आई थीं। मेला परिसर में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की अत्यधिक भीड़ उमड़ी हुई थी। रात लगभग 10 बजे भारी जनसैलाब और धक्का-मुक्की के दौरान युवती अचानक अपनी मां और परिजनों की नजरों से ओझल होकर बिछड़ गई।

काफी देर तक जब वह नहीं मिली, तो परेशान परिजनों ने मेले के हर कोने में उसकी तलाश शुरू की। परिजनों ने मेला नियंत्रण कक्ष और पूजा समिति के लाउडस्पीकर से बार-बार युवती के नाम का उद्घोष (अनाउंसमेंट) भी कराया, परंतु देर रात तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। हताश होकर परिवार किसी अनहोनी की आशंका से सहम उठा।

Darbhanga: फोन पर बयां किया खौफनाक मंजर, बाइक पर अगवा करने का आरोप

पूरी रात अंधेरे में तलाश करने के बाद अगले दिन 20 अक्टूबर की सुबह करीब 6 बजे अचानक युवती ने अपनी मां के मोबाइल पर कॉल किया। रोते-बिलखते हुए उसने आपबीती सुनाई, जिसे सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़िता ने बताया कि जब वह भीड़ में रास्ता भटक गई थी, तभी नेउरी गांव निवासी परमेश्वर सदा का पुत्र परबिंद सदा अपने दो अज्ञात साथियों के साथ वहां आ धमका।

युवती का आरोप है कि आरोपियों ने उसका मुंह दबाकर जबरन मोटरसाइकिल पर बैठा लिया और सुनसान रास्तों से होते हुए उसे नेउरी गांव ले गए। वहां एक कमरे में बंधक बनाकर रात भर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। अगली सुबह आरोपी उसे वापस शिवनगर घाट चौक पर ले आए और किसी से कुछ भी न कहने की धमकी देते हुए जबरन एक टेंपो में बैठाकर फरार हो गए।

प्राथमिकी दर्ज, मुख्य आरोपी गिरफ्तार कर भेजा गया जेल

घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों ने सीधे बिरौल थाना पहुंचकर पुलिस को सारी दास्तान बताई और नामजद आवेदन सौंपा। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए भारतीय न्याय संहिता की संबंधित गंभीर धाराओं के अंतर्गत कांड अंकित किया।

थानाध्यक्ष चन्द्रमणि के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने तत्काल नेउरी गांव में घेराबंदी कर दबिश दी और मुख्य नामजद आरोपी परबिंद सदा को उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अभिरक्षा में प्राथमिक पूछताछ के बाद आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से विद्वान न्यायाधीश के आदेश पर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

डीएमसीएच में मेडिकल परीक्षण और फरार साथियों की तलाश

थानाध्यक्ष ने बताया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत पीड़िता को चिकित्सकीय जांच और फॉरेंसिक परीक्षण के लिए दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) भेजा गया है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद अदालत में पीड़िता का 164 के तहत बयान दर्ज कराया जाएगा।

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि घटना के वक्त मौजूद रहे दो अन्य अज्ञात सहयोगियों की पहचान और धरपकड़ के लिए तकनीकी आसूचना इकाई की मदद ली जा रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और मामले में त्वरित आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर स्पीडी ट्रायल के जरिए आरोपियों को कठोर सजा दिलाई जाएगी।

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BNMU: दुर्गा पूजा में वेतन नहीं मिलने पर गेस्ट शिक्षक नाराज

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BNMU: दुर्गा पूजा में वेतन नहीं मिलने पर गेस्ट शिक्षक नाराज

मधेपुरा: पूरे बिहार में दुर्गा पूजा का पावन पर्व हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (BNMU) मधेपुरा के सैकड़ों अतिथि प्राध्यापकों (गेस्ट प्रोफेसरों) के घरों में इस बार त्योहार का उत्साह फीका पड़ गया है।

राज्य सरकार द्वारा दुर्गा पूजा से पूर्व सभी शिक्षकों और कर्मियों का वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के सख्त दिशा-निर्देशों के बावजूद बीएनएमयू के अतिथि शिक्षकों को खाली हाथ छोड़ दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन और वित्त शाखा के इस उपेक्षापूर्ण रवैये से प्राध्यापकों में भारी रोष व्याप्त है।

BNMU: नियमित कर्मियों को मिला वेतन, अतिथि प्राध्यापकों के साथ भेदभाव

बिहार राज्य विश्वविद्यालय गेस्ट प्रोफेसर संघ की बीएनएमयू इकाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन के इस दोहरे मापदंड के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ की बीएनएमयू इकाई के संयोजक डॉ. राजीव जोशी, डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह, डॉ. सुमंत राव और डॉ. अक्षय कुमार चौधरी सहित कई वरिष्ठ शिक्षकों ने एक स्वर में वित्त विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

शिक्षकों का आरोप है कि राज्य सरकार ने त्योहार से लगभग एक सप्ताह पूर्व ही वेतन निकासी के स्पष्ट आदेश जारी कर दिए थे। इसके बावजूद विश्वविद्यालय के वित्त विभाग ने केवल नियमित शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के खातों में राशि भेजी, जबकि दिन-रात अध्यापन कार्य में जुटे अतिथि प्राध्यापकों के मानदेय की फाइल को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। शिक्षकों ने इसे प्रशासनिक पक्षपात और मानसिक प्रताड़ना करार दिया है।

BNMU: सरकारी आवंटन के बावजूद भुगतान में मनमानी

संघ के नेताओं ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा निराशाजनक बात यह है कि शिक्षा विभाग ने आवश्यक वित्तीय आवंटन विश्वविद्यालय को समय रहते भेज दिया था। पर्याप्त बजट और स्पष्ट प्रशासनिक निर्देशों की उपलब्धता के बाद भी वित्त विभाग के अधिकारियों ने प्रक्रिया में शिथिलता बरती।

गेस्ट प्रोफेसरों का कहना है कि जब सरकार ने समयबद्ध भुगतान के निर्देश जारी कर दिए थे, तो फिर किस आधार पर उनके मानदेय पर रोक लगाई गई। त्योहारी सीजन में वेतन न मिलने से दर्जनों शिक्षक परिवारों के सामने रोजमर्रा के खर्चे और पूजा की आवश्यक खरीदारी को लेकर गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया। इस अव्यवस्था ने विश्वविद्यालय प्रशासन की वित्तीय निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा से हस्तक्षेप की गुहार

बढ़ते गतिरोध के बीच गेस्ट प्रोफेसर संघ के प्रतिनिधिमंडल ने बीएनएमयू के कुलपति प्रो. डॉ. विमलेंदु शेखर झा से मामले में तत्काल संज्ञान लेने की गुहार लगाई है। संघ ने कुलपति से अनुरोध किया है कि वित्त विभाग के लापरवाह पदाधिकारियों और कर्मियों की जवाबदेही तय की जाए तथा उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

शिक्षकों ने मांग की है कि किसी भी प्रकार की तकनीकी अड़चनों को दूर करते हुए अविलंब उनके खातों में मानदेय अंतरित किया जाए ताकि वे आगामी पर्व-त्योहारों में इस आर्थिक संकट से उबर सकें।

अविलंब भुगतान न होने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी

गेस्ट प्रोफेसर संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए जल्द से जल्द लंबित मानदेय का भुगतान नहीं किया गया, तो वे मूकदर्शक नहीं बने रहेंगे। संघ ने आने वाले दिनों में शैक्षणिक कार्यों का बहिष्कार करने और परिसर में चरणबद्ध धरना-प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दी है। अतिथि शिक्षकों के इस आक्रोश से विश्वविद्यालय के पठन-पाठन और आगामी प्रशासनिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

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