Connect with us

Bihar

Bihar News: कोमल मीणा बनीं पटना ग्रामीण SP, गृह विभाग ने 10 अफसरों का किया तबादला

Published

on

Bihar News

Bihar News: बिहार सरकार के गृह विभाग ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 10 पुलिस पदाधिकारियों का तबादला और नई पदस्थापना की अधिसूचना जारी की है। राज्यपाल के आदेश से सरकार के अपर सचिव दीपक कुमार द्वारा 4 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार, 2018, 2023 और 2024 बैच के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इनमें पटना के नए ग्रामीण एसपी सहित कई महत्वपूर्ण अनुमंडलों में नए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) नियुक्त किए गए हैं।

कोमल मीणा को ग्रामीण पटना की कमान, पूर्ण कुमार झा निगरानी ब्यूरो भेजे गए: Bihar News

  • कोमल मीणा: 2023 बैच की पुलिस अधिकारी कोमल मीणा को पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), पटना के पद पर तैनात किया गया है। इससे पूर्व वे पटना में एसडीपीओ-2 (विधि-व्यवस्था) के रूप में कार्यरत थीं।

  • पूर्ण कुमार झा: 2018 बैच के अधिकारी पूर्ण कुमार झा, जो पुलिस मुख्यालय में पदस्थापन की प्रतीक्षा में थे, उन्हें पुलिस अधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (पटना) बनाया गया है।

पटना, जहानाबाद और जमुई सहित कई अनुमंडलों में नए SDPO तैनात: Bihar News

  • सुषमा सागर: 2023 बैच की सहायक पुलिस अधीक्षक सुषमा सागर को पदोन्नत करते हुए पटना में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-2 (विधि-व्यवस्था) की जिम्मेदारी दी गई है।

  • अनिकेत कुमार द्विवेदी (2024 बैच): समस्तीपुर के एएसपी पद से स्थानांतरित कर एसडीपीओ-1, जहानाबाद बनाया गया।

  • दीप्ति मोनाली (2024 बैच): गया की सहायक पुलिस अधीक्षक से एसडीपीओ, जमुई के पद पर पदस्थापित।

  • हेमंत सिंह (2024 बैच): पूर्वी चंपारण से तबादला कर एसडीपीओ-1 (नगर), भागलपुर की जिम्मेदारी दी गई।

  • कार्तिकेयन ए (2024 बैच): पश्चिमी चंपारण से हटाकर एसडीपीओ-2 (नगर), मुजफ्फरपुर बनाया गया।

  • केतन अशोक इंगोले (2024 बैच): दरभंगा के एएसपी से एसडीपीओ, रजौली (नवादा) बनाए गए।

  • प्रसन्न कुमार एमडी (2024 बैच): मुजफ्फरपुर से स्थानांतरित कर एसडीपीओ, नरकटियागंज (पश्चिमी चंपारण) बनाया गया।

  • सईम रजा (2024 बैच): भागलपुर के एएसपी से एसडीपीओ, नवगछिया की कमान सौंपी गई।

मुख्यालय में योगदान के निर्देश गृह विभाग के अनुसार, जिन अधिकारियों को तत्काल नई जगह योगदान देने का स्पष्ट निर्देश नहीं है, वे अगले आदेश तक बिहार पुलिस मुख्यालय, पटना में पदस्थापन की प्रतीक्षा में अपना योगदान दर्ज कराएंगे।

 

यह भी पढ़े: Darbhanga News: दरभंगा में नाबालिग अपहरण के फरार आरोपी के घर कुर्की, कोर्ट के आदेश पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Bihar

Darbhanga मजार विवाद: 19वें दिन भी धरना जारी, समर्थन में पहुंचे सांसद पप्पू यादव

Published

on

Darbhanga मजार विवाद: 19वें दिन भी धरना जारी, समर्थन में पहुंचे सांसद पप्पू यादव

Darbhanga: बिहार के दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड अंतर्गत चंदनपट्टी रघुनाथपुर स्थित ऐतिहासिक मजार को सड़क निर्माण या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई से बचाने की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को 19वें दिन में प्रवेश कर गया।

इस बीच पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारियों की मांगों का खुलकर समर्थन किया। आंदोलन स्थल पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए सांसद ने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, संवैधानिक अधिकारों और गंगा-जमुनी तहजीब को अक्षुण्ण रखने पर विशेष बल दिया।

‘साझी विरासत और पूर्वजों के सम्मान का सवाल’

सांसद पप्पू यादव ने अपने संबोधन में कहा कि यह संघर्ष किसी एक खास वर्ग या मजहब की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह आम अवाम, साझी संस्कृति और पूर्वजों के सम्मान से जुड़ा संवेदनशील मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दशकों से इस स्थल को लेकर कोई विवाद या व्यवधान नहीं था, तो अब अचानक इसे विवादित बनाने का प्रयास क्यों किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि देश और समाज तभी प्रगति कर सकता है जब मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और मजार सभी समान रूप से सुरक्षित रहें। आस्था के केंद्रों पर कोई भी प्रहार सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाता है।

Darbhanga  News: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के संज्ञान में पहुंचा मामला

सड़क चौड़ीकरण अथवा संबंधित परियोजना के कारण मजार के अस्तित्व पर खड़े हुए खतरे को लेकर सांसद ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया। उन्होंने जानकारी दी कि यह पूरा विषय केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के संज्ञान में लाया जा चुका है। सांसद ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के साथ-साथ जनभावनाओं और धार्मिक धरोहरों का संरक्षण भी उतना ही अनिवार्य है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह व्यक्तिगत स्तर पर यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि किसी भी मंदिर अथवा मजार व कब्रिस्तान को कोई आंच न पहुंचे और तकनीकी संरेखण (अलाइनमेंट) में संशोधन कराया जा सके।

19 दिनों से शांतिपूर्ण आंदोलन पर डटे हैं ग्रामीण

चंदनपट्टी रघुनाथपुर में चल रहा यह धरना पिछले 19 दिनों से निरंतर शांतिपूर्ण ढंग से जारी है। स्थानीय नागरिक, बुजुर्ग और युवा दिन-रात धरना स्थल पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह मजार उनकी कई पीढ़ियों की आस्था का केंद्र रही है, इसलिए प्रशासन को जनभावनाओं का आदर करते हुए वैकल्पिक मार्ग या सुरक्षात्मक उपाय निकालने चाहिए। गुरुवार को सांसद की उपस्थिति ने आंदोलन में नई ऊर्जा फूंक दी और प्रदर्शनकारियों ने अपनी आवाज को और मजबूती से बुलंद किया।

प्रमुख राजनीतिक व सामाजिक हस्तियां रहीं उपस्थित

धरना मंच पर सांसद पप्पू यादव के साथ कई अन्य राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में पूर्व विधायक फराज फातमी, कांग्रेस के जिला प्रवक्ता मोहम्मद चांद सहित विभिन्न दलों और सामाजिक संगठनों के कई प्रमुख कार्यकर्ता शामिल रहे। उपस्थित वक्ताओं ने एक सुर में स्थानीय प्रशासन और सरकार से मांग की कि मामले में हठधर्मिता त्यागकर तत्काल वार्ता की जाए और सौहार्दपूर्ण वातावरण में इस विवाद का स्थायी समाधान निकाला जाए।

यह भी पढ़े: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिले झारखंड चैंबर के पदाधिकारी

 

यह भी पढ़े: Saharsa: चैनपुर का ऐतिहासिक मां काली मंदिर, जहां पूरी होती है हर मनोकामना

Continue Reading

Bihar

Saharsa: चैनपुर का ऐतिहासिक मां काली मंदिर, जहां पूरी होती है हर मनोकामना

Published

on

Saharsa: कोसी प्रमंडल के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक परिदृश्य में सहरसा जिले के चैनपुर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर की ख्याति एक जाग्रत सिद्धपीठ के रूप में है। सदियों से यह पावन स्थल सनातन आस्था, शक्ति उपासना और तांत्रिक अनुष्ठान का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

वर्तमान समय में चैनपुर में दो काली मंदिर स्थापित हो चुके हैं, परंतु आस्थावान भक्तों के बीच सबसे पुराना मूल मंदिर आज भी आस्था का मुख्य केंद्र है। सहरसा ही नहीं, बल्कि सुपौल, मधेपुरा, खगड़िया, दरभंगा और मधुबनी सहित पूरे मिथिलांचल व सीमांचल से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन यहां मां भगवती के चरणों में शीश नवाकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करने पहुंचते हैं।

Saharsa: दशकों पुरानी परंपरा और शक्ति साधना की पीठ

चैनपुर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर अपने अलौकिक आध्यात्मिक वातावरण और शक्ति संचय की भूमि के रूप में जाना जाता है। यहां नियमित रूप से मां काली की वैदिक और तांत्रिक दोनों पद्धतियों से विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ब्रह्म मुहूर्त में प्रातःकालीन मंगल आरती और संध्या वेला में महाआरती के दौरान बजने वाले घंटे-घड़ियाल, शंख की ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं।

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, इस दरबार में जो भी भक्त सच्चे अंतःकरण और निष्कपट भाव से झोली फैलाता है, मां उसकी हर मनोकामना अवश्य पूर्ण करती हैं। संतान प्राप्ति, असाध्य रोगों से मुक्ति और पारिवारिक संकटों के निवारण हेतु दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में घी के अखंड दीप प्रज्वलित कर मां से आशीर्वाद मांगते हैं। हाल के वर्षों में मंदिर प्रबंधन और ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, पेयजल व्यवस्था, शेड और प्रकाश के समुचित प्रबंध किए गए हैं, जिससे आने वाले भक्तों को सुगमता होती है।

Saharsa: नवरात्र, अमावस्या और दीपावली पर उमड़ता है जनसैलाब

सामान्य दिनों में भी यहां भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन शारदीय व चैत्र नवरात्र, प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तथा विशेष रूप से कार्तिक अमावस्या (दीपावली की रात) को यहां विशाल धार्मिक समागम देखने को मिलता है। इन पावन तिथियों पर माता का अलौकिक व मनोहारी भव्य श्रृंगार किया जाता है। अखंड दीप, हवन और रात्रि जागरण के साथ भजन-कीर्तन का दौर अनवरत चलता है।

इस पीठ की एक प्रमुख और प्राचीन परंपरा मन्नत पूरी होने पर छाग (बकरे) की बलि प्रदान करने की है। विशेषकर दीपावली और काली पूजा के अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु अपनी प्रतिज्ञा और संकल्प के अनुसार यहां बलि अर्पित करते हैं तथा मां को तांत्रिक व सात्विक भोग समर्पित करते हैं।

धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन और संस्कृति की धरोहर

चैनपुर का यह मां काली मंदिर केवल पूजा-पाठ का स्थल नहीं, बल्कि स्थानीय लोकसंस्कृति और धार्मिक पर्यटन का भी एक जीवंत केंद्र बन चुका है। नवरात्र और काली पूजा के समय यहां लगने वाला मेला ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक समरसता को नई ऊर्जा प्रदान करता है। मंदिर की ऐतिहासिक बनावट, प्राचीन वटवृक्ष और शांत परिवेश श्रद्धालुओं को गहन मानसिक शांति की अनुभूति कराते हैं। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि यदि इस ऐतिहासिक सिद्धपीठ को पर्यटन विभाग के मानचित्र पर प्रमुखता से विकसित किया जाए, तो यह समूचे कोसी क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन का एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

 

यह भी पढ़े: Supaul: SH-91 पर बाइक सवार युवक को टक्कर मार अगवा किया, ग्रामीणों पर 4 राउंड फायरिंग

 

यह भी पढ़े: सीएम हेमंत सोरेन ने अनुसेवक अंगद महतो को दी भावभीनी विदाई

Continue Reading

Bihar

Triveniganj में अवैध विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर सील, संचालक फरार

Published

on

triveniganj

त्रिवेणीगंज (सुपौल): सुपौल जिले के Triveniganj  अनुमंडल क्षेत्र में अवैध रूप से कुकुरमुत्ते की तरह फल-फूल रहे निजी क्लीनिकों और पैथोलॉजी-अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों के विरुद्ध स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने अपना कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।

इसी क्रम में मंगलवार की शाम अनुमंडलीय अस्पताल चौक स्थित ‘विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर’ पर औचक छापेमारी की गई। जांच के दौरान केंद्र संचालन से जुड़ा कोई भी वैध निबंधन (रजिस्ट्रेशन) अथवा अनुमति पत्र प्रस्तुत नहीं किया जा सका। मौके से मुख्य संचालक भी फरार पाया गया, जिसके बाद जांच दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे सेंटर को सील कर दिया।

Triveniganj  Crime: औचक निरीक्षण में न मिले कागजात, न मिले विशेषज्ञ डॉक्टर

मंगलवार देर शाम अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. उमेश कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की एक उच्चस्तरीय टीम ने अस्पताल चौक पर अचानक दबिश दी। इस छापेमारी दल में स्वास्थ्य प्रबंधक एस. अदीब अहमद के साथ स्थानीय पुलिस बल के जवान भी तैनात थे।

जांच टीम के पहुंचते ही अल्ट्रासाउंड केंद्र पर अफरा-तफरी मच गई और मुख्य संचालक मौके से खिसक गया। जांच दल ने जब परिसर में मौजूद संचालक के भाई से पीसीपीएनडीटी (PNDT) एक्ट के तहत अनिवार्य निबंधन, वैध कागजात और योग्यता प्रमाण पत्र मांगे, तो वह कोई भी दस्तावेज दिखाने में असमर्थ रहा। इसके अलावा सेंटर में कोई रेडियोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ चिकित्सक भी उपस्थित नहीं था, जिसके अभाव में अल्ट्रासाउंड जांच का संचालन पूरी तरह गैरकानूनी है।

Triveniganj  News: लंबे समय से चल रहा था खेल, बोर्ड लगाकर हो रहा था गुमराह

स्थानीय सूत्रों के अनुसार विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर काफी समय से अनुमंडलीय अस्पताल के ठीक सामने धड़ल्ले से संचालित किया जा रहा था। बाहर बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर अत्याधुनिक और उच्च स्तरीय जांच सुविधाओं का दावा कर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले भोले-भाले मरीजों को आकर्षित किया जाता था।

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सेंटर नियमों को ताक पर रखकर अप्रशिक्षित कर्मियों के सहारे चलाया जा रहा था। गंभीर अनियमितताओं और मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खुले खिलवाड़ को देखते हुए अधिकारियों ने विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए केंद्र के मुख्य प्रवेश द्वार को सील कर दिया।

उपाधीक्षक का बयान: दर्ज होगी प्राथमिकी, जारी रहेगा अभियान

कार्रवाई के संबंध में अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. उमेश कुमार ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण के दौरान विजय अल्ट्रासाउंड सेंटर का कोई वैध रिकॉर्ड नहीं मिला। न तो संचालक उपस्थित था और न ही कोई अधिकृत डॉक्टर। प्रथम दृष्टया अवैध पाए जाने पर सेंटर को सील कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की विस्तृत रिपोर्ट वरीय अधिकारियों और सिविल सर्जन को भेजी जा रही है, जिसके आधार पर संबंधित संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

फर्जी क्लीनिक और नर्सिंग होम संचालकों में फैली बेचैनी

स्वास्थ्य विभाग की इस सख्त कार्रवाई के बाद त्रिवेणीगंज और आसपास के इलाकों में अवैध रूप से चल रहे निजी नर्सिंग होम, जांच केंद्रों और झोलाछाप चिकित्सकों में हड़कंप मच गया है। कई संचालक अपनी दुकानों के शटर गिराकर भूमिगत हो गए हैं। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए मांग की है कि यह अभियान केवल सील करने तक सीमित न रहे, बल्कि अवैध स्वास्थ्य माफियाओं के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमे दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए।

 

यह भी पढ़े: Supaul: SH-91 पर बाइक सवार युवक को टक्कर मार अगवा किया, ग्रामीणों पर 4 राउंड फायरिंग

 

यह भी पढ़े: सीएम हेमंत सोरेन ने अनुसेवक अंगद महतो को दी भावभीनी विदाई

 

Continue Reading

Trending

© Copyright 2026, All Rights Reserved | Koshi Samachar