Bihar
बिहार की सियासत पर Sanjay Jha का बड़ा बयान: ‘राजनीति करनी है तो JDU के इर्द-गिर्द रहना होगा’
वैशाली/पटना: बिहार के आगामी राजनीतिक समीकरणों और दलगत शक्ति संतुलन को लेकर जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha ने एक बड़ा और तीखा राजनीतिक संदेश दिया है।
वैशाली जिले के हिलालपुर में आयोजित ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि बिहार में अगर किसी भी दल को प्रासंगिक राजनीति करनी है, तो उसे जेडीयू के आसपास रहकर ही आगे बढ़ना होगा। उनके इस बयान को एनडीए के सहयोगी दल भाजपा समेत समूचे विपक्षी खेमे के लिए एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
बिहार की राजनीति की धुरी है जनता दल (यूनाइटेड)
संजय झा ने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की सियासत कभी भी जेडीयू और नीतीश कुमार के विकास मॉडल को दरकिनार करके नहीं चल सकती। उन्होंने कहा कि विगत दो दशकों में राज्य की राजनीति का केंद्र बिंदु जेडीयू ही रहा है और भविष्य में भी यह स्थिति जस की तस रहेगी।
उन्होंने किसी विशेष दल का नाम लिए बिना कहा कि चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, जो भी दल बिहार में अपनी जमीन तलाशना चाहता है, उसे जनता दल (यूनाइटेड) की मजबूत उपस्थिति और उसके प्रभाव क्षेत्र को स्वीकार करके ही आगे बढ़ना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन के भीतर जेडीयू की वरिष्ठ और मार्गदर्शक भूमिका को स्थापित करने के लिहाज से यह बयान काफी रणनीतिक है।
निशांत कुमार पार्टी का भविष्य, संभालेंगे आगे की कमान: Sanjay Jha
कार्यक्रम के मंच से संजय झा ने नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की राजनीतिक भूमिका पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि निशांत कुमार आने वाले दिनों में जेडीयू का भविष्य हैं और उनके सक्षम नेतृत्व में पार्टी संगठनात्मक रूप से नई ऊंचाइयों को छुएगी।
उल्लेखनीय है कि मार्च 2026 में सक्रिय राजनीति में विधिवत कदम रखने के बाद से निशांत कुमार पार्टी के सांगठनिक अभियानों, जनसंवाद कार्यक्रमों और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। संजय झा ने रेखांकित किया कि युवा नेतृत्व के तौर पर निशांत पार्टी के कैडर और नई पीढ़ी के मतदाताओं को एक नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं।
फरक्का बराज से बिहार को नुकसान, एकजुटता की अपील
‘नीतीश संवाद’ के दौरान संजय झा ने बिहार की जल नीतियों और आपदा प्रबंधन से जुड़ा ऐतिहासिक फरक्का बराज का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों में फरक्का जल संधि और बराज के प्रतिकूल प्रभावों के चलते गंगा नदी में गाद (सिल्टेशन) की भारी समस्या उत्पन्न हुई है, जिससे बिहार को हर साल विनाशकारी बाढ़ और बाद में सुखाड़ का दोहरा दंश झेलना पड़ता है।
उन्होंने इस क्षेत्रीय और पर्यावरणीय संकट के स्थायी समाधान के लिए केंद्र स्तर पर ठोस नीतिगत पुनर्विचार की आवश्यकता जताई और आम लोगों से इस गंभीर विषय पर एकजुट होने का आह्वान किया।
शीर्ष नेताओं की रही उपस्थिति
हिलालपुर में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री सह वैशाली जिले के प्रभारी मंत्री तथा अन्य वरिष्ठ नेता व हजारों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। नेताओं ने एक स्वर में सरकार के विकासात्मक कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
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