Bihar

70 लाख के सोने की जब्ती से हड़कंप, Saharsa-Madhepura के सराफा बाजार में सन्नाटा, तस्करी सिंडिकेट पर जांच तेज

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मधेपुरा: Saharsa-Madhepura: पश्चिम बंगाल के बागडोगरा में पुलिस द्वारा एक फॉर्च्यूनर वाहन के गुप्त चैंबर से करीब 70 लाख रुपये मूल्य का 465 ग्राम सोना बरामद किए जाने और सहरसा निवासी दो युवकों की गिरफ्तारी के बाद कोसी अंचल के सर्राफा बाजारों में खलबली मच गई है।

इस कार्रवाई के बाद मधेपुरा और सहरसा के आभूषण कारोबारियों तथा कथित रूप से सोने की अवैध खरीद-बिक्री व तस्करी से जुड़े नेटवर्क के बीच सन्नाटा और बेचैनी का माहौल है। पुलिस और जांच एजेंसियां अब सिलीगुड़ी से सहरसा और मधेपुरा तक फैली इस आपूर्ति श्रृंखला की कड़ियां जोड़ने में जुट गई हैं।

Saharsa-Madhepura Crime: सिलीगुड़ी से सहरसा तक के रूट पर पैनी नजर

बागडोगरा पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई में पकड़े गए दोनों युवकों का मूल निवास सहरसा होने और जिस लग्जरी वाहन से सोना ले जाया जा रहा था, वह भी सहरसा के ही एक स्वर्ण कारोबारी के नाम से निबंधित होने की बात सामने आई है। इसके बाद से स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जांच एजेंसियां मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं—यह सोना सिलीगुड़ी अथवा सीमावर्ती पूर्वोत्तर क्षेत्र में कहां से खरीदा गया, इसे किस माध्यम से गुप्त चैंबर में लोड कराया गया और सहरसा में यह खेप किस आभूषण कारोबारी या सिंडिकेट को सौंपी जानी थी। इन सवालों के ठोस उत्तर मिलने के बाद ही इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकेगा।

Saharsa-Madhepura Crime: कॉल डिटेल्स और वित्तीय लेन-देन खंगालने की तैयारी

मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस गिरफ्तार दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर), व्हाट्सएप चैट्स और संदिग्ध बैंक लेन-देन की डिजिटल कड़ियों को खंगालने में लगी है। प्रारंभिक अनुमान है कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं, बल्कि सिलीगुड़ी से कोसी और सीमांचल के जिलों में बिना वैध कागजात व टैक्स चोरी कर सोना खपाने का संगठित अंतरराज्यीय सिंडिकेट हो सकता है। फॉर्च्यूनर कार में विशेष रूप से गुप्त तहखाना (सीक्रेट चैंबर) बनाया जाना इस बात की पुष्टि करता है कि सोने की यह आवाजाही योजनाबद्ध तरीके से की जा रही थी।

सहरसा और मधेपुरा के सराफा मंडियों में दिनभर चर्चा

कार्रवाई की खबर मिलते ही मधेपुरा और सहरसा की सराफा मंडियों में दिनभर इसी जब्ती को लेकर कानाफूसी चलती रही। कारोबारी हलकों में यह सवाल तैरता रहा कि आखिर स्थानीय बाजार में इतनी बड़ी मात्रा में बिना बिल का सोना किसके संरक्षण में मंगाया जा रहा था। हालांकि, किसी भी स्थानीय व्यक्ति या पंजीकृत फर्म की सीधी संलिप्तता पर पुलिस की ओर से कोई औपचारिक आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन अवैध रूप से आभूषण निर्माण व बिक्री से जुड़े तबकों में संभावित छापेमारी को लेकर भारी घबराहट देखी जा रही है।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार, जारी है अनुसंधान

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह मामला महज जब्ती और दो ड्राइवरों या कैरियरों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा। जांच का दायरा सोने के मूल स्रोत, वित्तीय सिंडिकेट और अंतिम खरीदार तक पहुंचेगा। फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जब तक पूरे साक्ष्य और फॉरेंसिक तथा वित्तीय दस्तावेज सामने नहीं आ जाते, तब तक किसी भी स्थानीय प्रतिष्ठान को सीधे तौर पर दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। पूरे मामले में पुलिस की आगामी कार्रवाई और खुलासे पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

 

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