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Supaul: अमहा पंचायत में गोबर गैस प्लांट जल्द होगा चालू, स्वच्छ ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा

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Supaul: ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन से निकलने वाले गोबर और जैविक कचरे के बेहतर प्रबंधन तथा स्वच्छ पर्यावरण को बढ़ावा देने की दिशा में सुपौल जिले में बड़ी पहल हुई है।

सदर प्रखंड अंतर्गत अमहा पंचायत में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत स्थापित बायोगैस संयंत्र को पुनः क्रियाशील बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारी पूरी कर ली गई है। क्षेत्र के विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इस Supaul Gobardhan Bio Gas Plant को समयबद्ध रूप से चालू कराने के उद्देश्य से उप विकास आयुक्त (डीडीसी) इन्द्रवीर कुमार ने स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यकारी एजेंसी और स्थानीय अधिकारियों को सभी तकनीकी बाधाओं को दूर करते हुए प्लांट का नियमित संचालन तत्काल शुरू कराने का सख्त निर्देश दिया है।

जैविक कचरे का सही उपयोग और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की पहल

लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान और केंद्र सरकार की गोबरधन योजना के समन्वय से गांवों में अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में यह संयंत्र मील का पत्थर साबित होने वाला है। अमहा पंचायत में स्थापित इस प्लांट के चालू होने से पशुपालकों के घरों से निकलने वाले गोबर का समुचित निस्तारण संभव हो सकेगा।

बायोगैस के उत्पादन से न केवल गांवों को धुआंमुक्त और स्वच्छ ऊर्जा का सुलभ विकल्प मिलेगा, बल्कि प्लांट से निकलने वाली स्लरी (अवशेष) का उपयोग किसान उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में अपने खेतों में कर सकेंगे। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और रासायनिक उर्वरकों पर ग्रामीणों की निर्भरता कम होगी।

Supaul: डीडीसी ने लिया जायजा, तकनीकी एजेंसी को दिए निर्देश

निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त इन्द्रवीर कुमार ने प्लांट के डाइजेस्टर, गैस पाइपलाइन, स्टोरेज टैंक और अन्य तकनीकी ढांचों की मौजूदा स्थिति का बारीकी से परीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद निर्माण एजेंसी ‘निदान’ के प्रतिनिधि विशाल कुमार से परियोजना के लंबित कार्यों और संचालन की रूपरेखा पर बिंदुवार चर्चा की।

एजेंसी के प्रतिनिधि ने डीडीसी को आश्वस्त किया कि शेष आवश्यक तकनीकी सुधारों को पूरा कर जल्द से जल्द प्लांट को क्रियाशील कर दिया जाएगा। उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर समन्वय और तकनीकी सहयोग की मांग की, जिस पर डीडीसी ने पूर्ण प्रशासनिक सहयोग का भरोसा दिलाया।

स्थानीय कर्मियों को मिलेगा प्रशिक्षण, सीएलएफ जुटाएगा कच्चा माल

संयंत्र को शुरू करने के बाद उसके टिकाऊ और निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई गई है। डीडीसी ने एजेंसी को निर्देश दिया कि प्लांट के दैनिक रखरखाव और संचालन के लिए स्थानीय युवकों और कर्मियों को व्यावहारिक तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि भविष्य में किसी खराबी की स्थिति में तुरंत स्थानीय स्तर पर समाधान हो सके।

वहीं, प्लांट को नियमित रूप से चलाने के लिए कच्चे माल यानी गोबर की पर्याप्त आपूर्ति सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके लिए संकुल स्तरीय संघ (सीएलएफ) के सदस्यों को प्रतिदिन आवश्यकतानुसार गोबर एकत्रित कर प्लांट तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पशुपालकों को भी अतिरिक्त आय का जरिया मिल सकेगा।

जीविका को सौंपी गई निगरानी की कमान, जिला कार्यालय को जाएगी रिपोर्ट

योजना की पारदर्शिता और नियमित प्रगति के लिए डीडीसी ने जीविका के प्रखंड परियोजना प्रबंधक (बीपीएम) को निदान एजेंसी द्वारा किए जा रहे कार्यों की सतत निगरानी करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्लांट के संचालन और प्रगति का साप्ताहिक प्रतिवेदन जिला स्वच्छता कार्यालय को अनिवार्य रूप से भेजा जाए।

निरीक्षण के दौरान डीआरडीए निदेशक आशुतोष कुमार, जिला समन्वयक सोनम कुमारी, जीविका बीपीएम, प्रखंड समन्वयक, एजेंसी प्रतिनिधि विशाल कुमार और सीएलएफ की महिला सदस्य मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। प्रशासन के इस सक्रिय कदम से अमहा और आसपास के ग्रामीणों में स्वच्छ ऊर्जा मिलने की उम्मीद जग गई है।

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