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₹1830 करोड़ कहां खर्च हुए? Bihar Mukhiya Mahasangh ने पंचायती राज विभाग से मांगा हिसाब, ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ आंदोलन की चेतावनी

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पटना। बिहार में पंचायतों के विकास मद से जुड़े 1830 करोड़ रुपये के खर्च को लेकर बिहार प्रदेश मुखिया महासंघ (Bihar Mukhiya Mahasangh) ने पंचायती राज विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

पटना में आयोजित पंचायत प्रतिनिधियों और प्रखंड अध्यक्षों की संयुक्त बैठक में संगठन ने वित्तीय लेन-देन में पूर्ण पारदर्शिता की मांग उठाई। महासंघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने 1830 करोड़ रुपये के उपयोग का हिसाब सार्वजनिक नहीं किया और प्रतिनिधियों की लंबित समस्याओं का समाधान नहीं निकाला, तो राज्यव्यापी ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ आंदोलन शुरू किया जाएगा।

Bihar Mukhiya Mahasangh: खराब सोलर लाइट, पंचायत सरकार भवन और कन्या विवाह योजना पर सवाल

बैठक के दौरान राज्यभर से आए प्रतिनिधियों ने विभागीय योजनाओं और अफसरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं:

  • योजनाओं में अनियमितता: प्रतिनिधियों ने पंचायतों में लगाई गई खराब सोलर स्ट्रीट लाइटों के रख-रखाव, अधूरे पड़े पंचायत सरकार भवनों के निर्माण और मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

  • अधिकारियों की मनमानी: पंचायत सचिवों के तबादले और जिला परिषद से संबंधित वित्तीय अधिकारों व आवंटन में पारदर्शिता की कमी को लेकर विभागीय अधिकारियों के रवैये पर सवाल खड़े किए गए।

  • पारदर्शिता की अनिवार्यता: महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि विकास और कायाकल्प अभियानों में प्रशासन को पूरा सहयोग देने को तैयार हैं, लेकिन पंचायतों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और सार्वजनिक धन का स्पष्ट हिसाब जरूरी है।

  • प्रमुख प्रतिनिधियों की मौजूदगी: बैठक में पंच-सरपंच संघ के अध्यक्ष अमोद कुमार निराला और प्रमुख संघ की कार्यकारी अध्यक्ष जयमाला कुमारी पासवान सहित कई संगठनों के पदाधिकारी शामिल रहे।

Bihar Mukhiya Mahasangh: कांग्रेस ने भी छेड़ा मजदूरों का मुद्दा: उदित राज ने दी मनरेगा पर आंदोलन की चेतावनी

इधर, कांग्रेस ने भी प्रदेश में असंगठित कामगारों और मजदूरों की स्थिति पर सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन का ऐलान किया है:

  • मनरेगा अधिकारों में कटौती का आरोप: पटना स्थित सदाकत आश्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के साथ प्रेस वार्ता करते हुए पूर्व सांसद डॉ. उदित राज ने आरोप लगाया कि पहले मनरेगा में रोजगार कानूनी अधिकार था, लेकिन नई व्यवस्थाओं से यह दायरा सीमित हो गया है। इससे बिहार जैसे अत्यधिक गरीबी व बेरोजगारी वाले राज्य में श्रमिकों पर सीधा असर पड़ रहा है।

  • कर्मचारियों की सुरक्षा व न्यूनतम वेतन: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि नगर निगमों, सरकारी विभागों और संविदा पर काम कर रहे चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को न तो समय पर उचित वेतन मिल रहा है और न ही सामाजिक सुरक्षा। कांग्रेस असंगठित कामगारों और संविदा कर्मियों के अधिकारों के लिए सड़क पर उतरेगी।

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