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Saharsa नगर निगम में भ्रष्टाचार के आरोपों पर बड़ी कार्रवाई: विकास योजनाओं और टोल वसूली की होगी विभागीय जांच

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Saharsa बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने सहरसा नगर निगम में चल रही विकास योजनाओं और टोल व पार्किंग शुल्क वसूली में कथित वित्तीय गड़बड़ियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है.

विभाग ने भ्रष्टाचार के इन गंभीर आरोपों की विस्तृत जांच के लिए एक चार सदस्यीय विभागीय समिति का गठन किया है. इस समिति को अगले 15 दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी कर स्पष्ट मंतव्य के साथ विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया गया है.

Saharsa News: पूर्व मंत्री की शिकायत पर विभाग का कड़ा एक्शन

सरकार द्वारा जारी आधिकारिक कार्यालय आदेश के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई पूर्व मंत्री डॉ. आलोक रंजन द्वारा विभाग को सौंपे गए परिवाद पत्र (शिकायत पत्र) के आधार पर शुरू की गई है. उन्होंने नगर निगम के कामकाज में कई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था, जिसके बाद सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति से यह जांच बैठाई गई है.

इन मुख्य आरोपों के घेरे में है Saharsa नगर निगम

विभागीय आदेश के अनुसार, जांच समिति मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को केंद्र में रखकर अपनी तफ्तीश करेगी:

  • योजनाओं को टुकड़ों में बांटने का खेल: शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम के भीतर चल रही विभिन्न बड़ी विकास योजनाओं को जानबूझकर छोटे-छोटे खंडों में विभाजित किया गया. योजनाओं की लागत को 15 लाख रुपये से कम का दर्शाया गया, ताकि निविदा (टेंडर) नियमों को दरकिनार किया जा सके. इससे सरकारी धन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग की आशंका जताई गई है.

  • टोल और पार्किंग वसूली में घोटाला: शहर के विभिन्न प्रमुख चौक-चौराहों पर होने वाली टोल और पार्किंग शुल्क की वसूली में निविदा शर्तों के खुले उल्लंघन और भारी भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं.

संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में करेगी काम

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग ने संयुक्त सचिव संजय कुमार की अध्यक्षता में इस चार सदस्यीय जांच टीम को मैदान में उतारा है. इस उच्चस्तरीय टीम में विभाग के अन्य संबंधित तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारियों को भी शामिल किया गया है, जो सहरसा पहुंचकर फाइलों और धरातल पर चल रहे कार्यों का भौतिक सत्यापन करेंगे.

शिकायतकर्ता को भी भेजी गई प्रतिलिपि

विभाग ने इस कार्रवाई से जुड़े कार्यालय आदेश की एक प्रतिलिपि सभी संबंधित जांच अधिकारियों और जिला प्रशासन के साथ-साथ शिकायतकर्ता पूर्व मंत्री डॉ. आलोक रंजन को भी आवश्यक सूचना के लिए भेज दी है. विभाग की इस मुस्तैदी के बाद सहरसा नगर निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों के खेमे में हड़कंप मचा हुआ है.

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