Bihar
Madhepura सदर अस्पताल में सीटी स्कैन सुविधा ठप: दर-दर भटकने को मजबूर मरीज, हर माह 100 से अधिक गंभीर केस रेफर
Madhepura। जिले के सबसे बड़े सरकारी और मॉडल अस्पताल का दर्जा प्राप्त सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खुलती नजर आ रही है। अस्पताल में सीटी स्कैन (CT Scan) जैसी अति आवश्यक और जीवनरक्षक जांच सुविधा उपलब्ध नहीं होने से प्रतिदिन मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सिर की गंभीर चोट, सड़क दुर्घटना, न्यूरो और ब्रेन हेमरेज के मरीजों को इलाज में देरी और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
Madhepura News: इमरजेंसी मरीजों के लिए जिंदगी और मौत की जंग
चिकित्सकों के मुताबिक, सड़क हादसों में सिर में लगी चोट या ब्रेन हेमरेज के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद नाजुक (गोल्डन आवर) होते हैं, जिनमें तुरंत सीटी स्कैन की जरूरत होती है। लेकिन सदर अस्पताल में सुविधा न होने के कारण परिजनों को एंबुलेंस से मरीजों को सहरसा, भागलपुर, पटना या दरभंगा ले जाना पड़ता है। इस लंबी दूरी और समय की बर्बादी के कारण रास्ते में ही कई मरीजों की जान पर बन आती है।
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Madhepura News: निजी सेंटरों में महंगी जांच, गरीबों पर आर्थिक बोझ
सदर अस्पताल में सुविधा नहीं होने से गरीब और दिहाड़ी मजदूर वर्ग के लोगों को मजबूरन प्राइवेट पैथोलॉजी व स्कैन सेंटरों का रुख करना पड़ता है। परिजनों का कहना है कि निजी केंद्रों में ब्रेन सीटी स्कैन के लिए ₹2,000 से लेकर ₹3,500 तक वसूले जा रहे हैं। सरकारी दर पर यह जांच काफी सस्ती या मुफ्त हो सकती है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था के कारण गरीब परिवारों पर अचानक बड़ा आर्थिक बोझ पड़ जाता है।
Madhepura News: हर महीने 100 से ज्यादा मरीज हो रहे रेफर
अस्पताल के आंकड़ों और स्थानीय लोगों के अनुसार, सीटी स्कैन के अभाव में हर महीने औसतन 100 से अधिक क्रिटिकल मरीजों को पीएमसीएच (PMCH) या डीएमसीएच (DMCH) के लिए रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा, अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों, रेडियोलॉजिस्ट और जरूरी स्वास्थ्यकर्मियों की कमी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिससे मॉडल अस्पताल का दावा कागजी साबित हो रहा है।
स्थानीय लोगों और परिजनों ने उठाईं मुख्य मांगें
मरीजों के परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:
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सीटी स्कैन यूनिट की तुरंत स्थापना: सदर अस्पताल परिसर में जल्द से जल्द आधुनिक सीटी स्कैन मशीन लगाई जाए।
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निजी सेंटरों से आयुष्मान अनुबंध: जब तक सीटी स्कैन मशीन चालू नहीं होती, तब तक आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी केंद्रों से टाइअप कर मरीजों को नि:शुल्क जांच सुविधा दी जाए।
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24×7 टेक्नीशियन की तैनाती: ट्रॉमा सेंटर के मरीजों के लिए 24 घंटे रेडियोलॉजिस्ट और टेक्नीशियन की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
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