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Darbhanga News: दरभंगा में विश्वविद्यालयों की सुस्ती पर उठे सवाल, क्या 1 जुलाई से शुरू हो पाएंगी कक्षाएं?
Darbhanga News: बिहार के उच्च शिक्षा सत्र को नियमित करने और शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। राजभवन और शिक्षा विभाग के कड़े निर्देशों के बाद सूबे में एक सख्त ‘समान शैक्षिक कैलेंडर’ लागू किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सभी विश्वविद्यालयों में समय पर दाखिला और कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करना था। परंतु, दरभंगा के प्रमुख विश्वविद्यालयों की धीमी कार्यप्रणाली के कारण इस महत्वाकांक्षी कैलेंडर के सफल अनुपालन पर अब गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होने लगे हैं।
‘समान शैक्षिक कैलेंडर’ और जमीनी हकीकत में टकराव: Darbhanga News
आधिकारिक गाइडलाइन के अनुसार, बिहार के सभी पारंपरिक विश्वविद्यालयों में हर हाल में 1 जुलाई से नया सत्र और कक्षाएं शुरू होना अनिवार्य है, ताकि छात्रों को नियममुताबिक पूरे 180 दिनों की अनिवार्य पढ़ाई का अवसर मिल सके। लेकिन वर्तमान स्थितियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जब कॉलेजों में ब्लैकबोर्ड पर चॉक चलनी चाहिए थी, तब विश्वविद्यालय केवल दाखिले की औपचारिकताओं में ही उलझे रहेंगे।
दरभंगा के प्रमुख विश्वविद्यालयों में नामांकन का गणित:Darbhanga News
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ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU): चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में नामांकन के लिए पहली चयन सूची का प्रकाशन ही 17 जून को किया जाएगा। इसके बाद, चयनित कॉलेजों में काउंसिलिंग और नामांकन की प्रक्रिया 19 जून से 2 जुलाई तक चलेगी। यहाँ विश्वविद्यालय प्रशासन ने 3 जुलाई से कक्षाएं शुरू करने की तिथि निर्धारित की है।
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कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय (KSDSU): यहाँ की स्थिति और भी सुस्त है। शास्त्री प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि ही बढ़ाकर 6 जुलाई तय की गई है।
ऐसे में यह साफ है कि जुलाई के पहले हफ्ते तक छात्र केवल दाखिले की कतारों में खड़े नजर आएंगे, जिससे 1 जुलाई से पढ़ाई शुरू करने का लक्ष्य पूरा होना असंभव लग रहा है।
तकनीकी चुनौतियाँ और प्रशासन का दावा: Darbhanga News
सत्र में हो रही इस देरी के पीछे ‘समर्थ पोर्टल’ पर सभी पाठ्यक्रमों को जोड़ने में लगा अतिरिक्त समय भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। हालांकि, इस प्रशासनिक सुस्ती और देरी के बीच कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय (KSDSU) के प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय ने आश्वस्त करते हुए कहा है “समर्थ पोर्टल पर पाठ्यक्रमों को अपलोड करने में थोड़ा समय अवश्य लगा है, लेकिन विश्वविद्यालय हर हाल में समय पर वर्गारंभ (कक्षाएं शुरू) कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें किसी भी स्तर पर कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।” अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपने दावों पर कितना खरा उतरता है और छात्रों के 180 दिनों की पढ़ाई के अधिकार को कैसे सुरक्षित रख पाता है।