Bihar
Saharsa MEMU Fire की जांच तेज: लखनऊ, झाझा और बंगाल से पहुंचीं एक्सपर्ट टीमें; तकनीकी साक्ष्य जुटाने में जुटे विशेषज्ञ
सहरसा। Saharsa MEMU Fire : समस्तीपुर-सहरसा मेमू पैसेंजर ट्रेन (ट्रेन संख्या 63344) में लगी भीषण आग की घटना के बाद रेलवे प्रशासन जांच प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
आग लगने के सटीक तकनीकी कारणों का पता लगाने के लिए लखनऊ, पश्चिम बंगाल और झाझा से बुलाई गई विशेषज्ञ टीमों ने सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पहुंचकर जले हुए कोच से वैज्ञानिक व तकनीकी साक्ष्य एकत्र करना शुरू कर दिया है।
Saharsa MEMU Fire : सैंपल एकत्र कर लैब भेजेगी एक्सपर्ट टीम
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, आग की विभीषिका इतनी भयानक थी कि डिब्बे का बड़ा हिस्सा पूरी तरह जलकर खाक हो चुका है। कोच की विद्युत आपूर्ति प्रणाली, एयर टैंक और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी उपकरण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे जांच अधिकारियों के सामने चुनौतियां बढ़ गई हैं। विशेषज्ञ टीम कोच के अलग-अलग हिस्सों को काटकर तकनीकी नमूने एकत्र कर रही है, जिन्हें विस्तृत फोरेंसिक और लैब टेस्ट के लिए भेजा जाएगा।
Saharsa MEMU Fire : संयुक्त रिपोर्ट मुख्यालय भेजी गई
घटनास्थल पर विभिन्न तकनीकी विभागों द्वारा की गई शुरुआती जांच के आधार पर एक संयुक्त रिपोर्ट तैयार कर रेलवे मुख्यालय को प्रेषित कर दी गई है। हालांकि, अधिकारियों ने जांच के शुरुआती निष्कर्षों या रिपोर्ट के तथ्यों पर फिलहाल आधिकारिक बयान देने से परहेज किया है।
Saharsa MEMU Fire : लोको पायलट के बयान और ज्वलनशील पदार्थ के एंगल से जांच
जांच एजेंसियां लोको पायलट के बयानों की भी बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। लोको पायलट के अनुसार, शुरुआत में डिब्बे के नीचे एक तरफ धुआं और दूसरी तरफ हल्की आग देखी गई थी, जो देखते ही देखते महज 10 मिनट के भीतर विकराल रूप में तब्दील हो गई।
जांचकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि आग इतनी तेजी से कैसे फैली। क्या कोच के भीतर कोई ज्वलनशील या विस्फोटक सामग्री मौजूद थी, या फिर धुएं से अचानक आग भड़क उठी? हालांकि, किसी विस्फोटक सामग्री की मौजूदगी की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सोमवार तड़के हुआ था हादसा
उल्लेखनीय है कि सोमवार तड़के समस्तीपुर-सहरसा मेमू पैसेंजर ट्रेन सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या दो पर क्रॉसिंग के लिए रुकी हुई थी। इसी दौरान इंजन से सटे कोच से धुआं उठते देख लोको पायलट मुरारी कुमार और दीपक कुमार ने ट्रेन मैनेजर को सूचित कर अग्निशामक यंत्रों से आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन देखते ही देखते पूरा डिब्बा जलकर राख हो गया।