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Madhepura News: मधेपुरा नगर परिषद की लापरवाही, कचरे के ढेर में तब्दील हुआ शहर, मंडराया महामारी का खतरा

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Madhepura News: बिहार के कोसी क्षेत्र का प्रमुख जिला मुख्यालय, मधेपुरा, इन दिनों कचरे के संकट से जूझ रहा है। शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और नगर प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है। मुख्य बाजारों से लेकर रिहायशी इलाकों तक, हर तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है।

मुख्य चौराहे बने ‘डंपिंग यार्ड’: सुभाष चौक और पूर्णिया गोला बेहाल: Madhepura News

शहर के सबसे व्यस्ततम और हृदयस्थल माने जाने वाले सुभाष चौक और पूर्णिया गोला की स्थिति सबसे ज्यादा दयनीय है। इन इलाकों से रोजाना हजारों नागरिकों और वीआईपी वाहनों का आवागमन होता है। इसके बावजूद, सड़कों पर बिखरा सड़ता कचरा और बजबजाते डस्टबिन राहगीरों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुके हैं। यही हाल पुरानी कचहरी चौक, अस्पताल रोड, कॉलेज चौक और स्टेशन रोड का भी है, जहाँ पैदल चलना भी दूभर हो गया है।

व्यापारियों का फूटा गुस्सा: “टैक्स पूरा, सफाई अधूरी”: Madhepura News

नगर परिषद की इस लचर कार्यशैली के खिलाफ स्थानीय दुकानदारों और निवासियों में भारी जन-आक्रोश है। व्यापारियों का साफ तौर पर कहना है कि:

  • वे हर महीने नियमित रूप से नगर निकाय को टैक्स का भुगतान करते हैं।

  • बदले में उन्हें व्यापार में घाटा और अपनी दुकानों के ठीक सामने असहनीय सड़ांध मिल रही है।

  • नगर परिषद के विशेष सफाई अभियान और फॉगिंग के दावे सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं, धरातल पर सच्चाई इसके विपरीत है।

  • पड़ोसी जिले पूर्णिया की स्वच्छता से तुलना करते हुए लोगों ने कहा कि अधिकारी मधेपुरा को सिर्फ एक कचरा डंपिंग यार्ड बनाकर छोड़ चुके हैं।

फेल हुआ ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management): Madhepura News

शहर की जमीनी हकीकत का विश्लेषण करने पर यह साफ हो जाता है कि मधेपुरा में ठोस कचरा प्रबंधन पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है।

  • ओवरफ्लो होते डस्टबिन: लाखों रुपये की लागत से खरीदे गए आधुनिक डस्टबिन या तो टूट चुके हैं या कचरे से पूरी तरह लबालब होकर सड़कों पर पलट रहे हैं।

  • मजबूरी में सड़क पर कचरा: डस्टबिनों की समय पर सफाई न होने के कारण स्थानीय लोग और दुकानदार मजबूरी में उनके आसपास ही कचरा फेंकने को विवश हैं।

चिकित्सकों की बड़ी चेतावनी: स्थानीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने आगाह किया है कि उमस और आगामी बरसात के मौसम में इस सड़ते कचरे के कारण मच्छरों और घातक जीवाणुओं का प्रकोप बढ़ गया है। यदि अगले 48 घंटों के भीतर युद्ध स्तर पर सफाई नहीं की गई, तो शहर में डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और हैजा जैसी संक्रामक बीमारियां महामारी का रूप ले सकती हैं।

समाधान की मांग: जवाबदेही और डिजिटल मॉनिटरिंग जरूरी: Madhepura News

मधेपुरा को इस नरकीय स्थिति से उबारने के लिए अब स्थानीय सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी (DM) से सीधे हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। शहर को स्वच्छ बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की जा रही है:

  1. जवाबदेही तय हो: वार्ड वार सफाई जमादारों और कर्मियों की जवाबदेही तय की जाए ताकि लापरवाही पर लगाम लग सके।

  2. डिजिटल मॉनिटरिंग: कचरा उठाने वाले वाहनों की ट्रैकिंग के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाए।

  3. जन जागरूकता: आम जनता से भी अपील की जा रही है कि वे खुले में कचरा फेंकने से परहेज करें, क्योंकि बिना सामूहिक प्रयास के शहर को सुंदर और स्वस्थ नहीं बनाया जा सकता।

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