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Saharsa Airport: सहरसा एयरपोर्ट के विस्तार को मिली हरी झंडी, 15 महीने में पूरा होगा काम

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Saharsa Airport: सहरसा और पूरे कोसी-सीमांचल क्षेत्र के निवासियों का वर्षों पुराना सपना अब हकीकत में बदलने जा रहा है। क्षेत्र में हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी मिली है। सहरसा हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण और विकास के लिए टेंडर (निविदा) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जिसके बाद इसके निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। सरकार ने इस पूरी परियोजना को अगले 15 महीनों में पूरा करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

₹35.14 करोड़ की लागत से चमकेगा एयरपोर्ट: Saharsa Airport

भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (AAI) ने इस पूरी कायाकल्प परियोजना के लिए लगभग 35.14 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इस टेंडर प्रक्रिया में देश की चार बड़ी निर्माण कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है, जिनमें शामिल हैं:

  • आद्याराज डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड

  • आनंद बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड

  • एमएचपीएल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड

  • एससीसी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड

फिलहाल इन कंपनियों के तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन का काम चल रहा है, जिसके तुरंत बाद निर्माण एजेंसी को अंतिम रूप देकर काम शुरू कर दिया जाएगा।

अत्याधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों से होगा लैस: Saharsa Airport

सहरसा एयरपोर्ट का निर्माण EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कंस्ट्रक्शन) मोड पर किया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से इसे पूरी तरह भूकंपरोधी बनाया जा रहा है।

  • तकनीक: भवन को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए ‘प्री-इंजीनियर्ड’ और ‘प्री-फैब्रिकेटेड’ संरचनाओं का इस्तेमाल होगा।

  • रनवे: यहाँ 1000 मीटर लंबा और 30 मीटर चौड़ा एक नया रनवे विकसित किया जाएगा।

  • टर्मिनल बिल्डिंग: यात्रियों की सुविधा के लिए 1580 वर्गमीटर में दो मंजिला आलीशान टर्मिनल भवन बनेगा।

  • अन्य सुविधाएं: विमानों की सुरक्षित आवाजाही के लिए 165 वर्गमीटर में एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) टावर और आपातकालीन स्थिति के लिए 451 वर्गमीटर में एक फायर स्टेशन का निर्माण भी किया जाएगा। इसके साथ ही भव्य पार्किंग, मजबूत बाउंड्री वॉल और बिजली-पानी के आधुनिक उपकेंद्र भी बनाए जाएंगे।

उड़ान भरेंगे 20 सीटों वाले छोटे विमान: Saharsa Airport

उन्नयन के बाद सहरसा हवाई अड्डे को कोड-2बी श्रेणी के विमानों के संचालन के योग्य बनाया जाएगा। इसका मतलब यह है कि शुरुआत में यहाँ से 19 से 20 यात्रियों की क्षमता वाले छोटे क्षेत्रीय विमान आसानी से उड़ान भर सकेंगे। यह कदम केंद्र सरकार की ‘उड़ान’ (उड़े देश का आम नागरिक) योजना और बिहार सरकार की क्षेत्रीय हवाई संपर्क नीति का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।

व्यापार, पर्यटन और रोजगार को लगेंगे पंख

इस एयरपोर्ट के चालू होने से न सिर्फ सहरसा बल्कि सुपौल, मधेपुरा और आसपास के सीमांचल जिलों के लाखों लोगों को सीधा फायदा होगा। स्थानीय लोगों और व्यापारियों में इसे लेकर भारी उत्साह है। हवाई सेवा शुरू होने से इस पिछड़े माने जाने वाले क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के सैकड़ों नए अवसर पैदा होंगे। कुल मिलाकर, सहरसा आने वाले दिनों में बिहार के एक प्रमुख क्षेत्रीय हब के रूप में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराएगा।

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