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Saharsa News: समय पर आकर भी रूठा मॉनसून, सहरसा में बिजली कटौती और सूखी नहरों ने बढ़ाई किसानों की आफत

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Saharsa News: बिहार के सहरसा जिले में इस बार मॉनसून ने समय पर दस्तक तो दी, लेकिन उसके बाद से ही बादलों ने ऐसी बेरुखी अख्तियार की है कि किसान दाने-दाने को तरसने की कगार पर पहुंच गए हैं। खेत सज-धजकर तैयार हैं, बिचड़े भी अपनी हरी चादर फैलाए खड़े हैं, लेकिन आसमान से बरसने वाली राहत की बूंदों के अभाव में धान की रोपनी का काम पूरी तरह थप पड़ा है। मौसम विभाग के दावे और भविष्यवाणियां धरातल पर हवा-हवाई साबित हो रही हैं, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं।

सूखे की आहट और बेअसर मौसम विभाग: Saharsa News

आसमान में रोज काले-घने बादल उमड़ते-घुमड़ते हैं, किसानों के दिलों में उम्मीद जगाते हैं, और फिर बिना बरसे ही लौट जाते हैं। सहरसा के किसान टकटकी लगाए सिर्फ आसमान की ओर देख रहे हैं। इस साल जिले में धान की खेती का लक्ष्य 75,934 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है, लेकिन जून बीतने को है और अब तक 50 एमएम बारिश भी नहीं हुई है, जिसने कृषि कार्य की कमर तोड़कर रख दी है।

आंकड़ों की जुबानी: जून महीने की बेरुखी: Saharsa News

अगवानपुर कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम तकनीकी पदाधिकारी जितेंद्र कुमार के अनुसार, जून महीने में अब तक मात्र 41.4 एमएम वर्षा दर्ज की गई है। अगर पिछले वर्ष की तुलना करें, तो इसी अवधि तक 100 एमएम से अधिक बारिश हो चुकी थी। हवा में नमी की भारी कमी के कारण बादल पानी में तब्दील नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि, मौसम विभाग एक बार फिर अगले दो-तीन दिनों में बारिश की संभावना जता रहा है, लेकिन किसानों का भरोसा अब डगमगाने लगा है।

ठप पड़ी धान की रोपनी और खेती का संकट: Saharsa News

आमतौर पर जून के पहले-दूसरे सप्ताह तक सहरसा में करीब 25 प्रतिशत धान की रोपनी पूरी हो जाती थी। लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल जुदा है; रोपनी की शुरुआत तक नहीं हो सकी है। कुछ संपन्न किसानों ने निजी पंपसेट के सहारे जैसे-तैसे बिचड़ा तो तैयार कर लिया है, लेकिन व्यापक स्तर पर खेतों को भरने और रोपनी करने के लिए भारी बारिश का कोई विकल्प नहीं है। जिला कृषि पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि भले ही 70 प्रतिशत क्षेत्र में बिचड़े का आच्छादन (बुआई) कर लिया गया है, लेकिन पानी न होने से कई छोटे किसान अब तक बिचड़ा भी नहीं डाल पाए हैं।

दोहरी मार: सूखी नहरें और बेपटरी बिजली व्यवस्था: Saharsa News

जब कुदरत ने साथ छोड़ा, तो सरकारी तंत्र की कमियों ने किसानों की मुसीबत को दोगुना कर दिया। सहरसा के किसान इस समय तिहरे संकट से जूझ रहे हैं:

  • सूखी पड़ी नहरें: जिले के कई इलाकों में नहरों का जाल होने के बावजूद वे केवल शोपीस बनकर रह गई हैं। मरम्मत के अभाव और ऊपर से जलापूर्ति न होने के कारण नहरें पूरी तरह सूखी हैं। अगर समय रहते इनमें पानी छोड़ा जाता, तो आज रोपनी का काम रुकता नहीं।

  • अघोषित बिजली कटौती: भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण इलाकों में बिजली की भारी किल्लत है। जिन किसानों के पास बिजली से चलने वाले पंपसेट हैं, वे भी सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि दिन हो या रात, बिजली कब आएगी और कब जाएगी, इसका कोई ठिकाना नहीं है।

गर्मी और उमस से बेहाल जनजीवन

सिर्फ फसलें ही नहीं, बल्कि आम जनजीवन भी इस बेरुखी से त्रस्त है। बारिश न होने के कारण जिले में गर्मी और उमस का प्रकोप चरम पर है। पिछले कुछ ही दिनों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर 36.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। अब तो बस हर आंख आसमान की तरफ टिकी है कि कब बदरा बरसें और इस तपती धरती के साथ-साथ किसानों की तकदीर को भी थोड़ी राहत मिले।

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