Uncategorized

सहरसा में आंधी-बारिश से फसलें बर्बाद, मक्का और गेहूं को भारी नुकसान; मुआवजे की मांग तेज

Published

on

सहरसा में आंधी-बारिश से फसलें बर्बाद, मक्का और गेहूं को भारी नुकसान; मुआवजे की मांग तेज

सहरसा: जिले में अचानक बदले मौसम ने किसानों की कमर तोड़ दी है। तेज आंधी और बेमौसम बारिश के कारण मक्का और गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। सहरसा के साथ-साथ सिमरी बख्तियारपुर, सलखुआ, बनमा ईटहरी, सत्तरकटैया और सोनवर्षाराज प्रखंडों में भी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।


खेतों में बिछ गई फसल, उत्पादन पर संकट

तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी मक्के की फसल टूटकर जमीन पर गिर गई, जबकि कटाई के लिए तैयार गेहूं भी आंधी-पानी की चपेट में आ गया।

इस नुकसान से कृषि उत्पादन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


ग्रामीण इलाकों में भी नुकसान

केवल फसल ही नहीं, बल्कि कई ग्रामीण इलाकों में टांट-फूस के घर भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे लोगों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


किसानों का दर्द: “कटाई से पहले सब बर्बाद”

इस प्राकृतिक आपदा से किसानों में भारी नाराजगी और निराशा है।

  • सलखुआ के किसान मुरारी यादव ने कहा, “पीला सोना कही जाने वाली मक्का पूरी तरह बर्बाद हो गई।”
  • सिमरी बख्तियारपुर के आनंदी कुशवाहा बोले, “कुछ ही दिनों में गेहूं की कटाई होने वाली थी, लेकिन अब पूरी फसल खेत में गिर गई।”
  • बनमा ईटहरी के शंकर यादव ने इसे किसानों के लिए बड़ी आपदा बताया
  • सत्तरकटैया के अर्जुन चौधरी ने कहा कि सरकारी मुआवजा नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं होगा

मुआवजे और सर्वे की मांग

किसानों ने सरकार से मांग की है कि

  • तुरंत फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए
  • प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए

कृषि विभाग ने शुरू किया आकलन

कृषि विभाग के अनुसार:

  • जिले में करीब 45 हजार हेक्टेयर में मक्का
  • और 48 हजार हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है

जिला कृषि पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि नुकसान का आकलन शुरू कर दिया गया है और रिपोर्ट जल्द ही राज्य सरकार को भेजी जाएगी।


उत्पादन घटने की आशंका

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बेमौसम बारिश और तेज आंधी से जिले में कृषि उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा।


👉 फिलहाल किसान प्रशासन से राहत और मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि इस आपदा से हुए नुकसान की कुछ भरपाई हो सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Trending

Exit mobile version