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Supaul EPF Scam: किसान सलाहकार संघ का फूटा गुस्सा

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बिहार के सुपौल (Supaul EPF Scam) जिले में कृषि विभाग के भीतर एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। बिहार राज्य किसान सलाहकार संघ ने जिले के 158 किसान सलाहकारों के भविष्य निधि (EPF) खाते में भारी हेरफेर और गबन का आरोप लगाते हुए कृषि विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने इसे अमानवीय और किसान सलाहकारों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ करार दिया है।

Supaul EPF Scam: मेहनत की गाढ़ी कमाई पर डाका: ₹2.5 करोड़ का नुकसान

किसान सलाहकार संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमन कुमार ने इस कथित घोटाले पर तीखी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने मामले के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हुए कहा:

  • मूल राशि का गबन: जिले के 158 किसान सलाहकारों के मासिक वेतन से काटी गई करीब 1.20 करोड़ रुपये की ईपीएफ राशि को संबंधित ईपीएफओ (EPFO) खातों में जमा ही नहीं किया गया।

  • ब्याज का नुकसान: यदि इस राशि पर मिलने वाले ब्याज और अन्य वित्तीय लाभों को जोड़ दिया जाए, तो मेहनतकश किसान सलाहकारों को कुल मिलाकर लगभग 2.5 करोड़ रुपये की भारी आर्थिक क्षति हुई है।

  • बुढ़ापे का सहारा छीना: डॉ. अमन ने भावुक होते हुए कहा कि यह पैसा कोई सरकारी खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारियों के खून-पसीने की कमाई थी जो उनके बुढ़ापे और सामाजिक सुरक्षा का एकमात्र आधार थी।

Supaul EPF Scam: लेखापाल हर्ष रंजन और विभागीय अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप

संघ ने सीधे तौर पर विभाग के अंदर बैठे सफेदपोशों पर उंगली उठाई है। डॉ. अमन कुमार ने आरोप लगाया कि इस पूरे घोटाले के पीछे लेखापाल (Accountant) हर्ष रंजन सहित कृषि विभाग के कुछ अन्य कर्मियों और रसूखदार अधिकारियों का सिंडिकेट काम कर रहा था।

“बिना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर वर्षों तक ईपीएफ का पैसा गायब रखना मुमकिन नहीं है। यह सीधे तौर पर एक सोची-समझी साजिश है।” — डॉ. अमन कुमार, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष

संघ की मुख्य मांगें: “संपत्ति जब्त हो और जेल भेजें”

किसान सलाहकार संघ ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन के सामने अपनी कड़े रुख के साथ निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  1. उच्चस्तरीय जांच: पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

  2. जेल और वसूली: मुख्य आरोपी हर्ष रंजन और संलिप्त अधिकारियों को अविलंब गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए और उनसे गबन की गई पूरी राशि वसूल की जाए।

  3. संपत्ति की जब्ती: दोषियों की चल एवं अचल संपत्तियों को कुर्क (जब्त) किया जाए और उस पैसे से किसान सलाहकारों के नुकसान की भरपाई की जाए।

मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से हस्तक्षेप की अपील

संघ ने सुपौल के जिला पदाधिकारी (DM), बिहार के कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री से इस संवेदनशील मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई और सलाहकारों का पैसा वापस नहीं मिला, तो संघ पूरे राज्य में उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

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