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Supaul News: गरीबी का क्रूर चेहरा, मौत के बाद भी नसीब नहीं हुआ घर का आंगन

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Supaul News: हरियाणा और दिल्ली में मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालने वाला सुपौल (बिहार) का 20 वर्षीय युवक भल्लू कुमार अब इस दुनिया में नहीं रहा। 31 मई को इटावा के इकदिल थाना क्षेत्र में दिल्ली-हावड़ा रेलवे ट्रैक पर ट्रेन से गिरकर उसकी दर्दनाक मौत हो गई। जेब में मिले दस्तावेजों से उसकी पहचान तो हो गई, लेकिन असली त्रासदी इसके बाद शुरू हुई।

“मेरे पास शव लेने आने तक के पैसे नहीं…”, एक लाचार पिता की चीख: Supaul News

जब पुलिस और स्थानीय लोगों ने बिहार में भल्लू के पिता महादेव उरांव से संपर्क किया, तो उनका जवाब किसी भी संवेदनशील दिल को झकझोर देने वाला था। अत्यधिक गरीबी से जूझ रहे पिता ने भरे मन से कहा कि उनके पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वे बिहार से इटावा आकर अपने बेटे का आखिरी बार चेहरा देख सकें, शव को घर ले जाना तो दूर की बात थी।

फरिश्ता बनकर आया रक्तदाता समूह, दिल्ली से बुलाई गई दिव्यांग बहन: Supaul News

इस मुश्किल घड़ी में इटावा के एक स्थानीय रक्तदाता समूह ने मानवता की मिसाल पेश की। जब उन्हें पता चला कि भल्लू की बहन संजीता और उसके पति (दोनों दिव्यांग) दिल्ली में मजदूरी करते हैं और उनके पास भी किराए के पैसे नहीं हैं, तो समूह के सदस्यों ने ऑनलाइन पैसे भेजकर उन्हें इटावा बुलाया। उनके रहने और खाने की व्यवस्था भी की गई।

यमुना घाट पर हुआ अंतिम संस्कार, अपनों की मौजूदगी में दी गई विदाई: Supaul News

आखिरकार, रक्तदाता समूह के प्रयासों और बहन की मौजूदगी में भल्लू कुमार का विधि-विधान और पूरे सम्मान के साथ यमुना घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान शरद तिवारी, राजीव लोचन दीक्षित और अन्य सदस्यों ने एक परिवार की तरह खड़े होकर भल्लू को अंतिम विदाई दी।

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