Bihar
Supaul Darbhanga फोरलेन: NHAI ने जारी किया टेंडर, 9 महीने में तैयार होगी DPR
दरभंगा। मिथिलांचल और सीमांचल के रेल व सड़क नेटवर्क (Supaul-Darbhanga) को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सुपौल से दरभंगा तक प्रस्तावित फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज कर दिया है।
🚨NHAI has floated a tender for the DPR of a proposed 4-lane Highway connecting Supaul and Darbhanga.
Length: 80 km
Consultancy Period: 9 monthsCorridor:
Supaul → Beria Manch → Madhepur → Darbhanga pic.twitter.com/MftLqBDDBl— Bihar Infra Tales (@BiharInfraTales) July 10, 2026
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंसल्टेंसी सेवा का टेंडर आमंत्रित किया गया है।
यह नया फोरलेन लगभग 80 किलोमीटर लंबा होगा, जो सुपौल को बेड़िया मंच और मधुबनी जिले के मधेपुर के रास्ते सीधे दरभंगा से जोड़ेगा।
Supaul-Darbhanga: नौ महीने में पूरी करनी होगी डीपीआर की प्रक्रिया
टेंडर के नियमों और शर्तों के अनुसार, जिस कंसल्टेंसी एजेंसी का चयन किया जाएगा, उसे विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) सौंपने के लिए 9 महीने की समयसीमा दी गई है। इस अवधि के भीतर एजेंसी को निम्नलिखित महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं का गहन अध्ययन करना होगा:
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व्यवहार्यता (Fasibility): सड़क निर्माण की व्यवहार्यता और इसके भौगोलिक स्वरूप का अध्ययन।
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यातायात घनत्व व पर्यावरण: रूट पर गाड़ियों के दबाव (ट्रैफिक डेंसिटी) और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन।
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लागत और निर्माण ढांचा: आवश्यक पुल-पुलिया के निर्माण, भूमि अधिग्रहण की जरूरत और कुल संभावित वित्तीय लागत की विस्तृत रूपरेखा।
Supaul-Darbhanga: स्वीकृति मिलते ही शुरू होगा भूमि अधिग्रहण
एनएचएआई के मुताबिक, जैसे ही कंसल्टेंसी एजेंसी द्वारा तैयार की गई डीपीआर को अंतिम मंजूरी मिल जाएगी, इस परियोजना के भौतिक निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके ठीक बाद आवश्यक भूमि अधिग्रहण और टेंडरिंग की अन्य कानूनी औपचारिकताओं को पूरा कर धरातल पर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
Supaul-Darbhanga: तीन जिलों की बदलेगी तस्वीर, व्यापार और शिक्षा को मिलेगी रफ्तार
प्रस्तावित फोरलेन के बन जाने से मुख्य रूप से दरभंगा, मधुबनी और सुपौल जिलों को सीधा लाभ पहुंचेगा। इन इलाकों के बीच न सिर्फ यात्रा सुरक्षित और बेहद कम समय में पूरी होगी, बल्कि माल ढुलाई भी आसान हो जाएगी। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस मार्ग की मांग वर्षों से की जा रही थी, और टेंडर प्रक्रिया शुरू होने से अब विकास की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं, जिससे कृषि, व्यापार, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई रफ्तार मिलेगी।
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