Bihar
बिहार में PPP मोड पर बनेंगे दो नए सरकारी मेडिकल कॉलेज, सहरसा और गोपालगंज में तैयारी तेज
बिहार में PPP मोड पर बनेंगे दो नए सरकारी मेडिकल कॉलेज, सहरसा और गोपालगंज में तैयारी तेज
पटना: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में नए सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों का निर्माण लोक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर किया जाएगा। इस योजना के तहत फिलहाल सहरसा और गोपालगंज में मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
सरकार की यह पहल सात निश्चय पार्ट-3 के तहत शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से कई जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
PPP मॉडल से मजबूत होगा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर
राज्य सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक जिलों में मेडिकल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। PPP मॉडल के जरिए निजी निवेश के साथ आधुनिक ढांचा और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज बनाए जाने हैं, वहां जमीन की पहचान कर उसे स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि परियोजनाओं को समयसीमा के भीतर पूरा किया जा सके।
गोपालगंज में जमीन चिह्नित
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि गोपालगंज जिले में मेडिकल कॉलेज के लिए मांझा प्रखंड में 24 एकड़ 37 डिसमील जमीन चिह्नित की गई है। जिला प्रशासन द्वारा जमीन का हस्तांतरण भी कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि जमीन की तकनीकी जांच के लिए बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (BMSICL) की विशेषज्ञ टीम को स्थल निरीक्षण का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सरकार का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में जिले के लिए एक बड़ा हेल्थ हब साबित होगी।
सहरसा में भी मेडिकल कॉलेज की तैयारी
कोसी क्षेत्र के महत्वपूर्ण जिले सहरसा में भी मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग लंबे समय से उठती रही है। सरकार ने इस दिशा में प्रक्रिया तेज कर दी है।
PPP मॉडल पर बनने वाले इन मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, अत्याधुनिक मशीनें और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे स्थानीय स्तर पर ही बेहतर इलाज और मेडिकल शिक्षा के अवसर मिल सकेंगे।
स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा
सरकार का कहना है कि अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से नए मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के निर्माण से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।
इन संस्थानों के शुरू होने से
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मरीजों को बड़े शहरों में इलाज के लिए जाने की मजबूरी कम होगी
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स्थानीय युवाओं को मेडिकल शिक्षा के अवसर मिलेंगे
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स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
राज्य सरकार को उम्मीद है कि यह पहल बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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मधेपुरा में वज्रपात से पोल्ट्री फार्म में भीषण आग, 4000 मुर्गों की मौत; लाखों का नुकसान
मधेपुरा में वज्रपात से पोल्ट्री फार्म में भीषण आग, 4000 मुर्गों की मौत; लाखों का नुकसान
मधेपुरा: जिले के सुखासन गांव में शुक्रवार देर रात वज्रपात से एक पोल्ट्री फार्म में भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में करीब 4000 मुर्गों की जलकर मौत हो गई, जबकि फार्म में रखा सारा सामान भी आग की भेंट चढ़ गया। घटना रात करीब 11 बजे की बताई जा रही है।
बिजली गिरते ही आग ने लिया विकराल रूप
जानकारी के अनुसार, सुखासन निवासी नीरज कुमार सिंह के पोल्ट्री फार्म पर अचानक बिजली गिरने से आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरे फार्म को अपनी चपेट में ले लिया।
इस दौरान फार्म में रखा
- अनाज
- तराजू
- पंखे
- फीडर
- अन्य उपकरण
सभी जलकर राख हो गए।
कर्ज लेकर शुरू किया था व्यवसाय, सब कुछ बर्बाद
पीड़ित नीरज कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष फरवरी में स्वयं सहायता समूह से करीब 1.5 लाख रुपये का लोन लेकर इस व्यवसाय की शुरुआत की थी।
उन्होंने कहा कि पहले ही बर्ड फ्लू की आशंका से कारोबार प्रभावित था, और अब इस हादसे ने पूरी तरह से उनकी कमर तोड़ दी है।
इस अग्निकांड में उन्हें करीब 5 से 6 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
आसपास के घरों में भी असर
स्थानीय मुखिया बौआ सिंह के अनुसार, वज्रपात इतना तेज था कि आसपास के कई घरों में
- फ्रिज
- पंखे
- मोबाइल चार्जर
- इनवर्टर
जैसे बिजली उपकरण भी खराब हो गए।
इसके अलावा इलाके में बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई, जिससे ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ी।
प्रशासन से मुआवजे की मांग
घटना की सूचना प्रशासन को दे दी गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी मामले को उठाया है।
पीड़ित परिवार ने सरकार से आर्थिक सहायता और मुआवजे की मांग की है।
नीरज कुमार सिंह का कहना है कि कर्ज लेकर शुरू किया गया उनका यह व्यवसाय पूरी तरह नष्ट हो गया है और अब परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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सहरसा में आंधी-बारिश से फसलें बर्बाद, मक्का और गेहूं को भारी नुकसान; मुआवजे की मांग तेज
सहरसा में आंधी-बारिश से फसलें बर्बाद, मक्का और गेहूं को भारी नुकसान; मुआवजे की मांग तेज
सहरसा: जिले में अचानक बदले मौसम ने किसानों की कमर तोड़ दी है। तेज आंधी और बेमौसम बारिश के कारण मक्का और गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। सहरसा के साथ-साथ सिमरी बख्तियारपुर, सलखुआ, बनमा ईटहरी, सत्तरकटैया और सोनवर्षाराज प्रखंडों में भी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
खेतों में बिछ गई फसल, उत्पादन पर संकट
तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी मक्के की फसल टूटकर जमीन पर गिर गई, जबकि कटाई के लिए तैयार गेहूं भी आंधी-पानी की चपेट में आ गया।
इस नुकसान से कृषि उत्पादन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ग्रामीण इलाकों में भी नुकसान
केवल फसल ही नहीं, बल्कि कई ग्रामीण इलाकों में टांट-फूस के घर भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे लोगों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों का दर्द: “कटाई से पहले सब बर्बाद”
इस प्राकृतिक आपदा से किसानों में भारी नाराजगी और निराशा है।
- सलखुआ के किसान मुरारी यादव ने कहा, “पीला सोना कही जाने वाली मक्का पूरी तरह बर्बाद हो गई।”
- सिमरी बख्तियारपुर के आनंदी कुशवाहा बोले, “कुछ ही दिनों में गेहूं की कटाई होने वाली थी, लेकिन अब पूरी फसल खेत में गिर गई।”
- बनमा ईटहरी के शंकर यादव ने इसे किसानों के लिए बड़ी आपदा बताया
- सत्तरकटैया के अर्जुन चौधरी ने कहा कि सरकारी मुआवजा नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं होगा
मुआवजे और सर्वे की मांग
किसानों ने सरकार से मांग की है कि
- तुरंत फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए
- प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए
कृषि विभाग ने शुरू किया आकलन
कृषि विभाग के अनुसार:
- जिले में करीब 45 हजार हेक्टेयर में मक्का
- और 48 हजार हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है
जिला कृषि पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि नुकसान का आकलन शुरू कर दिया गया है और रिपोर्ट जल्द ही राज्य सरकार को भेजी जाएगी।
उत्पादन घटने की आशंका
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बेमौसम बारिश और तेज आंधी से जिले में कृषि उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा।
👉 फिलहाल किसान प्रशासन से राहत और मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि इस आपदा से हुए नुकसान की कुछ भरपाई हो सके।
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