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Bihar Weather Update: दक्षिण बिहार में 20 सितंबर तक बदलेगा मौसम, बारिश के आसार के बीच किसानों व पशुपालकों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश

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Bihar Weather Update: भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 16 से 20 सितंबर के दौरान दक्षिण बिहार के कई जिलों में बादलों की आवाजाही के साथ हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाओं के चलने का अनुमान है। खासकर औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर जिलों में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। इस अवधि में अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री और न्यूनतम 26 से 28 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। बदलते मौसम को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने फसलों की सुरक्षा और पशु स्वास्थ्य को लेकर व्यावहारिक परामर्श जारी किया है।

खरीफ फसलों में खरपतवार प्रबंधन: Bihar Weather Update

कम बारिश होने पर खेतों में खरपतवार तेजी से पनपते हैं, जिससे फसलों की पैदावार प्रभावित होती है।
  • समय पर निराई-गुड़ाई पूरी करें और 20 से 30 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से नाइट्रोजन का उपरिवेशन (टॉप ड्रेसिंग) करें।
  • खरपतवार नियंत्रण के लिए खेत में हल्की नमी होने पर बिस्पायरिबेक सोडियम (200 ग्राम/हेक्टेयर) और पायरेजोसल्फ्यूरॉन (200 ग्राम/हेक्टेयर) के घोल का छिड़काव करें, फिर नाइट्रोजन डालें।

दलहन व मक्का की सुरक्षा: Bihar Weather Update

  • मक्का: तना छेदक कीट की नियमित जांच करें। यदि मध्य कलिका सूखकर मुरझा जाए और खींचने पर आसानी से बाहर आ जाए, तो तुरंत स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह से कीटनाशक का प्रयोग करें।
  • अरहर: फसल में जरूरत के अनुसार गैप फिलिंग, छंटाई और निराई जारी रखें। इसके अलावा सितंबर में बोई जाने वाली अगेती अरहर के लिए खेतों की तैयारी शुरू करें।

सब्जियों व बागवानी की देखभाल: Bihar Weather Update

  • कद्दूवर्गीय सब्जियां: जलभराव से बचाने के लिए लताओं को बांस के मचान पर चढ़ाएं। फल मक्खी से बचाव के लिए खेतों में ‘मिथाइल यूजेनॉल ट्रैप’ लगाएं।
  • फूलगोभी व मिर्च: मध्य अवधि वाली फूलगोभी की बुआई के लिए यह समय उत्तम है। मिर्च की पौध को उठी हुई क्यारियों (रेज्ड बेड्स) पर ही लगाएं।
  • पपीता: पपीते के बीजों की बुआई के लिए मौसम अनुकूल है। प्रमाणित बीजों को उपचारित करके ही नर्सरी तैयार करें।

पशुधन की सुरक्षा और टीकाकरण: Bihar Weather Update

बरसात के मौसम में पशुओं में संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
  • पशुओं को गलघोंटू (HS), खुरपका-मुंहपका (FMD) और पीपीआर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए समय पर टीके लगवाएं।
  • लम्पी त्वचा रोग (LSD) से बचाव के लिए पशुशाला को सूखा रखें और फर्श पर नियमित चूने का छिड़काव करें।
  • बीमार पशुओं को स्वस्थ झुंड से तुरंत अलग करें और केवल ताजा व संतुलित आहार दें।

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