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Darbhanga News: दरभंगा में शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, फर्जी और अमान्य डिग्री वाले 81 शिक्षक निगरानी विभाग के निशाने पर

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Darbhanga News: बिहार के दरभंगा जिले में फर्जी और अमान्य प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी शिक्षक की नौकरी पाने वालों की अब खैर नहीं है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने ऐसे 81 शिक्षकों को चिन्हित किया है जो सरकार द्वारा अमान्य घोषित की जा चुकीं डिग्रियों के दम पर वर्षों से सेवा में बने हुए हैं। इस खुलासे के बाद निगरानी विभाग ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को इन शिक्षकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का दोबारा कड़ा निर्देश जारी किया

उच्च न्यायालय के आदेश पर खुली पोल, 2006 से 2016 के बीच हुई नियुक्तियाँ संदेहास्पद: Darbhanga News

दरभंगा में अवैध प्रमाणपत्रों के आधार पर बहाल हुए शिक्षकों का यह मामला एक बार फिर गरमा गया है। माननीय उच्च न्यायालय के सख्त निर्देश के बाद, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो वर्ष 2006 से 2016 के बीच नियोजित हुए सभी शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशैक्षणिक प्रमाणपत्रों की गहन जांच कर रहा है। जांच के दौरान ब्यूरो ने पाया कि दर्जनों शिक्षकों की डिग्रियां पूरी तरह से अमान्य और संदिग्ध हैं, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है।

इन अमान्य संस्थानों की डिग्रियों पर चल रहा था नौकरी का खेल: Darbhanga News

निगरानी ब्यूरो द्वारा जारी की गई सूची के अनुसार, जिन 81 शिक्षकों पर गाज गिरने वाली है, उन्होंने देश के विभिन्न प्रतिबंधित या अमान्य संस्थानों से डिग्रियां ली थीं। इसका विवरण इस प्रकार है:

हिंदी विद्यापीठ देवघर: इस संस्थान के प्रमाणपत्र पर सबसे अधिक 54 शिक्षक विभिन्न विद्यालयों में अपनी सेवा दे रहे हैं।

हिंदी साहित्य सम्मेलन: यहाँ की डिग्री के आधार पर 11 शिक्षक कार्यरत हैं।

महिला विद्यापीठ इलाहाबाद: इस संस्थान के जाली या अमान्य कागजात पर 8 शिक्षक बहाल हैं।

काशी विद्यापीठ वाराणसी: यहाँ के प्रमाणपत्रों पर 4 शिक्षक नौकरी का लाभ ले रहे हैं।

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय: इस संस्थान की डिग्री वाले 3 शिक्षक रडार पर हैं।

दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा: यहाँ के प्रमाणपत्र पर 1 शिक्षक कार्यरत पाया गया है।

ये सभी 81 आरोपी वर्तमान में जिले के विभिन्न प्रारंभिक, माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक के रूप में तथा कुछ पुस्तकालयाध्यक्ष (लाइब्रेरियन) के पदों पर तैनात हैं।

सरकार ने 2008 में ही लगा दी थी रोक, फिर भी हुई बहाली: Darbhanga News

हैरानी की बात यह है कि बिहार सरकार ने 25 अगस्त 2008 को ही एक अधिसूचना जारी कर देश के 28 शैक्षणिक संस्थानों के प्रमाणपत्रों को पूरी तरह से अमान्य (Invaid) घोषित कर दिया था। निगरानी के निशाने पर आए ये सभी छह संस्थान भी इसी प्रतिबंधित सूची में शामिल थे। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर इन डिग्रियों के आधार पर नियुक्तियां की गईं और वे आज तक वेतन उठा रहे हैं।

प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप; अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें

स्थानीय नागरिकों और ईमानदार शिक्षक संघों का आरोप है कि जिला शिक्षा विभाग के स्थापना कार्यालय में बैठे कुछ रसूखदार अधिकारियों और बिचौलियों की मिलीभगत के कारण ही ये शिक्षक इतने वर्षों तक बचे रहे और इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन अब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के कड़े रुख और नए अल्टीमेटम के बाद, देखना यह होगा कि प्रशासन इन जालसाज शिक्षकों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर क्या एक्शन लेता है।

 

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