Bihar
Madhepura News: राजभवन की सख्त कार्रवाई, कुलपति से 15 दिनों में मांगा जवाब
Madhepura News: भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (बीएनएमयू) की कार्यशैली को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए राज्यपाल सचिवालय ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। राज्यपाल के अपर सचिव संजय कुमार द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में कुलपति को निर्देश दिया गया है कि वे विश्वविद्यालय पर लगे सभी प्रशासनिक और वित्तीय आरोपों का बिंदुवार स्पष्टीकरण तैयार कर 15 दिनों के भीतर राजभवन को सौंपें। इस कदम से विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
यूएमआईएस और सीआईएमएस परियोजनाओं में वित्तीय अनियमितता के आरोप: Madhepura News
राज्यपाल सचिवालय द्वारा भेजे गए पत्र में विश्वविद्यालय की डिजिटल परियोजनाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं:
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प्रौद्योगिकी प्रणालियों में गड़बड़ी: यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (UMIS) और कॉलेज इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (CIMS) के क्रियान्वयन और संचालन में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
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कर्मचारियों और शिक्षकों की समस्याएं: शिकायतों में केवल वित्तीय मामले ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मियों की सेवा संबंधी दिक्कतों, उनके वेतन/पदोन्नति से जुड़े मुद्दों और छात्र-शिक्षक संगठनों के साथ किए जा रहे कथित अन्यायपूर्ण व्यवहार का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।
केंद्रीय मंत्री और सांसदों की शिकायतों पर संज्ञान: Madhepura News
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब बिहार के प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को सीधे राजभवन के सामने उठाया। राज्यपाल सचिवालय ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई निम्नलिखित नेताओं द्वारा प्राप्त शिकायत पत्रों के आधार पर की जा रही है:
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गिरिराज सिंह: केंद्रीय मंत्री
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राजेश रंजन (पप्पू यादव): सांसद
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डॉ. संजीव कुमार सिंह: विधान परिषद सदस्य (MLC)
इन सभी जनप्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली, नियमों और मानक प्रावधानों के उल्लंघन तथा विभिन्न प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता की कमी को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं। 5 जून 2026 को जारी किए गए इस पत्र के बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन के पास अपनी सफाई और साक्ष्य पेश करने के लिए बेहद सीमित समय है। आने वाले दो हफ्तों के भीतर बीएनएमयू प्रशासन को हर एक आरोप का दस्तावेजी प्रमाण देना होगा। शिक्षा जगत और छात्रों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या जवाब देता है और इसके बाद राजभवन की ओर से क्या बड़ी दंडात्मक या सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है।