Bihar

AIIMS की डाइट शीट में ‘Mithila Makhana’ को मिली जगह, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को मिलेगा फायदा

Published

on

दरभंगा। Mithila Makhana: भारत के मखाना उद्योग और बिहार के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण सामने आया है। देश के सर्वोच्च चिकित्सा संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली ने ‘मिथिला के मखाना’ को अपनी मदर एंड चाइल्ड यूनिट की आधिकारिक डाइट शीट (Official Diet Sheet) में शामिल कर लिया है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने तथा मरीजों को पौष्टिक व संतुलित आहार देने की दिशा में इसे स्वास्थ्य जगत का एक बड़ा और सराहनीय कदम माना जा रहा है।

Mithila Makhana: महीनों के वैज्ञानिक संवाद और अथक प्रयासों के बाद मिली सफलता

मखाना को राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिष्ठित अस्पताल की डाइट शीट में शामिल कराने के पीछे दरभंगा जिले के मनीगाछी स्थित एमआइडीएएस (MIDAS) फार्मर्स प्रोड्यूसर्स कंपनी (FPC) बिहार के चेयरमैन राजीव रंजन के प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

राजीव रंजन ने बताया कि वे पिछले कई महीनों से एम्स के वरिष्ठ चिकित्सकों, डाइटिशियनों और पोषण सलाहकारों के साथ लगातार बैठकें कर रहे थे। इस दौरान मखाना के पोषण मूल्य, वैज्ञानिक शोध और इसके औषधीय व स्वास्थ्य लाभों पर विस्तार से चर्चा की गई। गहन वैज्ञानिक तथ्यों और शोध के आकलन के बाद एम्स के विशेषज्ञों की टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची कि मखाना मरीजों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बढ़ते बच्चों के लिए एक अत्यंत पौष्टिक, सुरक्षित और सुपाच्य आहार है। इसके बाद ही इसे आधिकारिक तौर पर डाइट चार्ट में जगह दी गई, जिसे पूरे मखाना उद्योग और बिहार के लाखों किसानों की एक बड़ी जीत माना जा रहा है।

Mithila Makhana: पोषक तत्वों का खजाना है मखाना

चिकित्सा और आहार विशेषज्ञों के अनुसार, मखाना एक बेहतरीन सुपरफूड है जो निम्नलिखित गुणों से भरपूर है:

  • पोषक तत्व: यह उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और जरूरी एंटीऑक्सीडेंट्स का उत्कृष्ट स्रोत है।

  • पाचन में आसान: कम वसा (लो-फैट) और ग्लूटेन-फ्री (Gluten-Free) होने के कारण यह बेहद हल्का होता है और आसानी से पच जाता है, जो कमजोर और बीमार मरीजों के स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल आदर्श है।

उत्पादक किसानों की बढ़ेगी आय, मखाना उद्योग को मिलेगी नई उड़ान

कृषि एवं आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि एम्स जैसे देश के सबसे बड़े और विश्वसनीय चिकित्सा संस्थान द्वारा मखाना को अपनाए जाने से इसके बाजार में भारी उछाल आएगा। इससे मिथिलांचल क्षेत्र सहित देश के लाखों मखाना उत्पादक किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। साथ ही, यह शुरुआत देश के इस पारंपरिक सुपरफूड को भविष्य के विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य और पोषण कार्यक्रमों में शामिल करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।

यह भी पढ़े: Saharsa: सड़क निर्माण में अड़ंगा, रास्ता खाली कराने के लिए डीएम से गुहार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Trending

Exit mobile version