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 Rishu Shree Tender Scam: टेंडर माफिया रिशु श्री और उसके सिंडिकेट के खिलाफ चल रही जांच

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 Rishu Shree Tender Scam: बिहार में टेंडर और ठेकेदारी के खेल में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया कार्रवाई से लगाया जा सकता है. टेंडर माफिया रिशु श्री और उसके सिंडिकेट के खिलाफ चल रही जांच में अब एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है. जब्त किए गए मोबाइल और डिजिटल डेटा को खंगालने के बाद इस पूरे महाघोटाले में राजभवन और नौकरशाही के एक बड़े रसूखदार नाम की एंट्री हो गई है. जांच एजेंसियों के हाथ लगे दस्तावेजों से पता चला है कि रिशु श्री एक बेहद वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी के सीधे संपर्क में था और उन्हें ‘भैया’ कहकर संबोधित करता था. इस खुलासे के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है.

कौन हैं रिशु श्री के ‘आईएएस भैया’? ED खंगाल रही है कुंडली: Rishu Shree Tender Scam

ED की जांच के दौरान इस टेंडर घोटाले के तार राज्य के शीर्ष नौकरशाहों से जुड़ते दिख रहे हैं. जांच एजेंसी ने जब रिशु श्री और उसके करीबियों के डिजिटल डिवाइस, व्हाट्सएप चैट और कॉल लॉग्स को डिकोड किया, तो उसमें एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का बार-बार जिक्र मिला.

  • ‘भैया’ कोडनेम का रहस्य: रिशु श्री इस प्रभावशाली आईएएस अधिकारी को ‘भैया’ कहता था.

  • रसूख का इस्तेमाल: शुरुआती जांच के मुताबिक, इसी वरिष्ठ अधिकारी के रसूख और संरक्षण की बदौलत रिशु श्री का सिंडिकेट सरकारी विभागों में करोड़ों रुपये के टेंडर अपनी मनमर्जी से हथियाने में कामयाब रहता था. अब ED की टीम इस ‘आईएएस भैया’ की पहचान पुख्ता करने और उनके खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाने में लगी है.

टेंडर सिंडिकेट पर कसा शिकंजा: रिशु श्री के सहयोगी की गिरफ्तारी: Rishu Shree Tender Scam

इस मामले में जांच एजेंसियों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है. रिशु श्री के काले कारनामों और टेंडर मैनेज करने के खेल में बराबर के भागीदार रहे उसके एक मुख्य सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया गया है. इस गिरफ्तारी के बाद से सिंडिकेट के अन्य सदस्यों और पर्दे के पीछे बैठे मास्टरमाइंड्स के चेहरे बेनकाब होने की उम्मीद बढ़ गई है. गिरफ्तार सहयोगी से लगातार पूछताछ की जा रही है.

करोड़ों की अकूत संपत्ति और ‘डील’ करने का खास तरीका: Rishu Shree Tender Scam

जांच में यह बात साफ हो चुकी है कि रिशु श्री कोई साधारण ठेकेदार नहीं, बल्कि एक संगठित टेंडर माफिया है. सरकारी धन की लूट और अवैध तरीकों से उसने बहुत कम समय में करोड़ों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया है.

छापेमारी में करोड़ों की काली कमाई का खुलासा: Rishu Shree Tender Scam

एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई में रिशु श्री और उसके करीबियों के ठिकानों से अकूत चल-अचल संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं. आलीशान मकानों, जमीनों के कागजात और बेनामी निवेश के साथ-साथ करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता चला है. इस काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा सिंडिकेट को संरक्षण देने वाले मददगारों तक भी पहुंचाया जाता था.

कैसे होती थी करोड़ों के टेंडरों की डील?: Rishu Shree Tender Scam

जांच में यह भी सामने आया है कि इस सिंडिकेट के काम करने का तरीका बेहद शातिराना था:

  • विभागों में पैठ: ‘आईएएस भैया’ और अन्य बड़े संपर्कों का इस्तेमाल कर पहले सरकारी विभागों के भीतर टेंडर की शर्तों को अपने हिसाब से मोल्ड (मैनिपुलेट) कराया जाता था.

  • प्रतिस्पर्धा खत्म करना: डिजिटल डेटा से खुलासा हुआ है कि अन्य योग्य ठेकेदारों को डरा-धमका कर या फिर सांठगांठ के जरिए रेस से बाहर कर दिया जाता था, ताकि टेंडर सिर्फ रिशु श्री या उसकी डमी कंपनियों को ही मिले.

ब्यूरोक्रेसी में मंचा हड़कंप, आगे क्या होगी कार्रवाई?

मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों से मिले इन पुख्ता सुरागों के बाद अब ED इस मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है. माना जा रहा है कि जल्द ही संबंधित वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को पूछताछ के लिए समन भेजा जा सकता है. रिशु श्री के टेंडर माफिया नेटवर्क और प्रशासनिक अधिकारियों के इस अपवित्र गठजोड़ (Nexus) के पूरी तरह उजागर होने से बिहार के कई और बड़े नामी चेहरों पर कानून का शिकंजा कसना तय माना जा रहा है.

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